पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ तुर्की-ईरान समेत चार देशों के दौरे पर, भारत के बारे में क्या कहा

शहबाज़ शरीफ़ और राष्ट्रपति रेचेप तैयेप अर्दोआन

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इमेज कैप्शन, शहबाज़ शरीफ़ सबसे पहले तुर्की पहुंचे जहां उन्होंने राष्ट्रपति रेचेप तैयेप अर्दोआन के साथ कई मुद्दों पर वार्ता की

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ अपने पाँच दिनों के 'कूटनीतिक दौरे' के तहत अज़रबैजान पहुंच गए हैं.

इससे पहले वो तुर्की और ईरान भी गए थे, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के साथ ही भारत के साथ हुए हालिया सैन्य संघर्ष के बाद हुए क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की.

भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चला सैन्य संघर्ष बीते कुछ दशकों में सबसे भीषण था. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए, साथ ही सीमा पर गोलाबारी भी हुई. हालांकि, 10 मई को दोनों देशों ने संघर्षविराम का एलान किया.

इसके बाद भारत और पाकिस्तान अपने सहयोगी देशों तक अपने-अपने पक्ष रखने की कवायद में हैं. इसी के तहत भारत ने भी सात प्रतिनिधिनमंडल अलग-अलग देशों में भेजे हैं.

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भारत के साथ संघर्ष में साथ के लिए तुर्की को शुक्रिया

इस्तांबुल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और तुर्की के राष्ट्रपति

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इमेज कैप्शन, इस्तांबुल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और तुर्की के राष्ट्रपति

शहबाज़ शरीफ़ की 25 मई से शुरू हुई यात्रा 30 मई तक चलेगी. उनकी यात्रा का आख़िरी पड़ाव ताजिकिस्तान होगा.

भारत ने पाकिस्तान में कई जगहों को निशाना बनाकर 6-7 मई की दरम्यानी रात हमला किया. भारत ने इसे 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए चरमपंथी हमले की प्रतिक्रिया बताया था. इस चरमपंथी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया था. इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर 8-9 मई की दरम्यानी रात ड्रोन हमले किए थे.

शहबाज़ शरीफ़ की यात्रा की रविवार को शुरुआत तुर्की से हुई, जहां उन्होंने भारत के साथ हुए संघर्ष के दौरान समर्थन के लिए तुर्की का शुक्रिया अदा किया.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया, "दोनों नेताओं ने जम्मू-कश्मीर विवाद समेत एक-दूसरे की प्रमुख चिंताओं के प्रति अपने सैद्धांतिक समर्थन को दोहराया."

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पहलगाम में चरमपंथी हमले के बाद भारत के साथ बढ़े तनाव में तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का पक्ष लिया था. कश्मीर मुद्दे पर भी तुर्की कई सालों से पाकिस्तान का साथ देता रहा है.

सात मई को भारत की ओर से पाकिस्तान में किए गए हवाई हमलों के बाद तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से बात की थी.

तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक़, "अर्दोआन ने कहा कि तनाव और बढ़ने से रोकने के लिए तुर्की जो भी संभव होगा वह करेगा और इस संबंध में उनके कूटनीतिक संबंध जारी रहेंगे."

तुर्की के राष्ट्रपति ने पहलगाम हमले की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच कराने के पाकिस्तान के फ़ैसले का भी समर्थन किया था.

अर्दोआन ने नागरिकों की बढ़ती मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था, "हमें चिंता है कि पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव मिसाइल हमलों के साथ खुले संघर्ष की ओर बढ़ सकता है जिसके परिणामस्वरूप कई नागरिक शहीद हो गए हैं."

वहीं, भारत ने ये आरोप लगाया था कि पाकिस्तान ने भारत के अलग-अलग हिस्सों को 8-9 मई की दरम्यानी रात को बड़े पैमाने पर ड्रोन्स से निशाना बनाया था. भारत का कहना था कि ये ड्रोन तुर्की के एसिसगॉर्ड सोनगार ड्रोन थे.

इसके बाद भारत में तुर्की के उत्पादों के बहिष्कार की मांग ने भी ज़ोर पकड़ा था.

तुर्की के ड्रोन

ईरान में क्या बोले शहबाज़ शरीफ़

शहबाज़ शरीफ़

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इमेज कैप्शन, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के साथ शहबाज़ शरीफ़

दोनों दिनों के तुर्की दौरे के बाद शहबाज़ शरीफ़ सोमवार को ईरान पहुंचे. यहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि वो शांति के ख़ातिर भारत से वार्ता को तैयार हैं.

शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "हम कश्मीर और जल से जुड़े मुद्दे सहित सभी विवादों को बातचीत के ज़रिए सुलझाना चाहते हैं और अपने पड़ोसी के साथ व्यापाक तथा आतंकवाद-रोधी मुद्दों पर भी बातचीत करने के लिए तैयार हैं."

शरीफ़ ने ये भी दावा किया कि भारत के साथ तकरीबन चार दिनों तक चले संघर्ष में उनका देश 'विजयी' रहा.

भारत और पाकिस्तान के बीच जब सैन्य संघर्ष चरम पर था, तब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची दो दिनों के लिए भारत में थे. उनकी ये यात्रा पूर्वनियोजित थी.

लेकिन अराग़ची भारत आने से पहले पाकिस्तान भी पहुंचे थे. अराग़ची ने भारत और पाकिस्तान को अपने 'भाई जैसा पड़ोसी देश बताया था.'

इस दौरान उन्होंने ये उम्मीद जताई थी कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही क्षेत्र में तनाव बढ़ाने से परहेज़ करेंगे.

पहलगाम हमले के बाद भी ईरान ने दोनों देशों के बीच बेहतर समझदारी के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी.

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अराग़ची ने लिखा था, भारत और पाकिस्तान ईरान के भाईचारे वाले पड़ोसी हैं, जिनसे सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यता वाले संबंध हैं. अन्य पड़ोसियों की तरह, हम उन्हें अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हैं."

"तेहरान फ़ारसी कवि सादी द्वारा सिखाई गई भावना के अनुरूप, इस कठिन समय में अधिक समझ बनाने के लिए इस्लामाबाद और नई दिल्ली में अपने अच्छे संबंधों का इस्तेमाल करने को तैयार है."

हालांकि, ईरान इस संघर्ष में खुलकर किसी एक पक्ष में खड़ा नहीं दिखा था. लेकिन शहबाज़ शरीफ़ ने संघर्ष में साथ देने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान को शुक्रिया कहा.

अब शहबाज़ शरीफ़ अज़रबैजान पहुंच गए हैं.

अज़रबैजान ने दिया था पाकिस्तान का साथ

शहबाज़ शरीफ़

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इमेज कैप्शन, भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के दौरान अज़रबैजान ने एक बयान जारी कर पाकिस्तान के प्रति समर्थन जताया था

अज़रबैजान दक्षिण कॉकेशस क्षेत्र में स्थित है. यह ईरान के पड़ोस में है. सोवियत संघ के विघटन के बाद बने देशों में से अज़रबैजान भी एक था.

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया संघर्ष के दौरान अज़रबैजान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि हम उन सैन्य हमलों की निंदा करते हैं, जिसमें पाकिस्तान में कई नागरिकों की जान गई और कई लोग घायल हुए हैं.

"पाकिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए, हम निर्दोष पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं."

शहबाज़ शरीफ़ के कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक पाकिस्तानी पीएम यहां तुर्की और अज़रबैजान के साथ त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इसके साथ ही शहबाज़ शरीफ़ अज़रबैजान के राष्ट्रपति इलहम अलियेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे.

हाल के सालों में पाकिस्तान और अज़रबैजान के बीच रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में संबंध गहरे हुए हैं. साथ ही अज़रबैजान ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख का समर्थन भी किया है.

भारतीय प्रतिनिधिमंडलों का विदेश दौरा

शशि थरूर की अगुवाई वाला प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क के बाद अब गुयाना में है

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इमेज कैप्शन, शशि थरूर की अगुवाई वाला प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क के बाद अब गुयाना में है

पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष के बाद भारत ने भी सभी पार्टियों के कई सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग देशों में भेजा है.

इन प्रतिनिधिमंडलों को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है कि ये पाकिस्तान पर भारत की कार्रवाई के महत्व के बारे में सहयोगी देशों को बताएं और साथ ही भारत के पक्ष को सहयोगी देशों के सामने रखें.

जिन देशों में भारत के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे हैं उनमें अमेरिका, दक्षिण कोरिया, कुवैत, क़तर, डीआर कांगो और स्लोवेनिया शामिल हैं.

इन सात प्रतिनिधिमंडलों को बेल्जियम स्थित यूरोपियन यूनियन के मुख्यालय समेत कुल 32 देशों का दौरा करना है.

बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल को सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और अल्जीरिया का दौरा करना है. इस गुट में एआईएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हैं.

वहीं, इसके अलावा दूसरे प्रतिनिधिमंडल को रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में यूके, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, डेनमार्क और यूरोपियन यूनियन जाना है.

संजय कुमार झा के नेतृत्व में तीसरा प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर जाएगा.

श्रीकांत एकनाथ शिंदे की अगुवाई में चौथा प्रतिनिधिमंडल संयुक्त अरब अमीरात, लाइबेरिया, कांगो और सिएरा लियोन पहुंचेगा.

पांचवें प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई शशि थरूर को मिली है. ये समूह अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राज़ील और कोलंबिया का दौरा करेगा.

कनिमोई करुणानिधि के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल स्पेन, रूस, स्लोवेनिया, लातविया और रूस पहुंचेगा.

वहीं सुप्रिया सुले के साथ सातवां प्रतिनिधिमंडल मिस्र, क़तर, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका के लिए निकला है.

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