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बिहारः बीजेपी कार्यकर्ता की मौत कैसे हुई, पुलिस ने वीडियो फुटेज में क्या पाया, क्या कहते हैं परिजन?
- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से
इन दिनों बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है. सूबे के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का नाम सीबीआई की चार्जशीट में आने के बाद भाजपा नेता उनके इस्तीफ़े की माँग कर रहे हैं.
वहीं पूरे सत्र में ‘शिक्षक बहाली’ का मसला सड़क से लेकर सदन तक गूंजता रहा.
शिक्षक बहाली के मसले को लेकर भाजपा ने 13 जुलाई को विधानसभा मार्च का आह्वान किया था.
मार्च की शुरुआत पटना के गांधी मैदान से हुई और डाक बंगला चौराहे पहुंचते-पहुंचते इसे रोक दिया गया.
इस दौरान पुलिस और भाजपा के कार्यकर्ता कई बार आमने-सामने आते देखे गए. पुलिस ने जुलूस रोकने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का सहारा लिया.
इसी विरोध मार्च के दौरान भाजपा के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई, जिनकी पहचान जहानाबाद ज़िला इकाई के महामंत्री विजय कुमार सिंह के तौर पर की गई है.
इस घटना के बाद भाजपा के तमाम नेता सरकार पर ख़ासा हमलावर हो गए हैं. बिहार भाजपा ने शुक्रवार को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया.
पार्टी के विधायक काली पट्टी बांधे देखे गए. पार्टी के तमाम बड़े नेता भाजपा कार्यकर्ता के दाह संस्कार में शामिल हुए.
इसके बाद भाजपा के आला नेताओं ने राज्यपाल से मिलकर राज्य सरकार के ख़िलाफ़ ज्ञापन सौंपा.
बीजेपी ने बनाई जांच कमेटी
कार्यकर्ता की मौत की जाँच के लिए बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है.
इस कमेटी के प्रमुख झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास होंगे, वहीं मनोज तिवारी, सुनीता दुग्गल और विष्णु दयाल राम इसके सदस्य बनाए गए हैं.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कल शाम को बिहार सरकार पर हमला बोलते हुए इसे ‘जंगलराज रिटर्न’ कहा.
उन्होंने कहा कि, ‘जंगलराज की उत्पत्ति लालू प्रसाद ने की थी और आज नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने ‘जंगलराज रिटर्न’ किया है. आज बंगाल और बिहार की स्थिति एक जैसी है. दोनों जगहों पर लोकतंत्र ख़त्म हो गया है.’
वहीं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह ने भाजपा पर पलटवार किया.
उन्होंने कहा, “भाजपा कार्यकर्ता जब कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे ही नहीं तो फिर घायल कैसे हुए? अगर साहस है तो कोई विजय सिंह पर लाठीचार्ज का वीडियो या साक्ष्य दिखाए.”
उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का कहना है कि ‘सारी चीजें सामने आ रहीं हैं. जिनकी मृत्यु हुई उनके साथ के लोगों ने ही चीजें स्पष्ट कर दी हैं.’
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “देश की जनता जानती है कि भाजपा कैसे अफ़वाह फैलाती है, और नकारात्मक राजनीति करती है. नकारात्मक राजनीति नहीं होनी चाहिए.”
सम्राट चौधरी ने तो यहां तक आरोप लगाया कि “विजय सिंह की हत्या नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की वजह से हुई है. सरकार के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता की हत्या की है.”
पुलिस ने फुटेज में क्या पाया?
पटना के एसएसपी राजीव मिश्रा ने घटना के दिन शाम को ही सीसीटीवी फ़ुटेज जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की थी.
उन्होंने कहा, “पुलिस अभी किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुँची है कि भाजपा कार्यकर्ता की मौत कैसे हुई. मजिस्ट्रेट के क़ानूनी जाँच में किसी भी तरह के बाहरी चोट की बात नहीं है.”
उन्होंने कहा कि पुलिस के अनुसंधान में और सीसीटीवी फ़ुटेज में वे विजय सिंह अपने साथियों के साथ चलते और बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं.
एकदम सही जगह का फ़ुटेज नहीं है क्योंकि सीसीटीवी का कवरेज उससे 50 मीटर पहले का है. अभी पुलिस इस मामले में और भी डिटेल जुटा रही है.
हालाँकि इस मामले में गौर करने वाली बात है कि सीसीटीवी फ़ुटेज में जहां वे अंतिम तौर पर देखे गए वह डाक बंगला चौराहे से सटे मोहल्ले (छज्जूबाग) का इलाक़ा है.
यह इलाका मार्च के तय रूट से हटकर है, और कल उस इलाक़े में किसी तरह की भगदड़ की घटना नहीं हुई.
कौन थे विजय कुमार सिंह?
गुरुवार को भाजपा के विधानसभा मार्च में मृत कार्यकर्ता (विजय कुमार सिंह) जहानाबाद ज़िले के महामंत्री थे. वे पिछले 30 साल से राजनीतिक तौर पर सक्रिय थे. उनका मूल पेशा खेती-किसानी था.
उनके भाई कमल किशोर सिंह अपने भाई के मौत और उन्हें पहले पहल मिली ख़बर के बारे में बीबीसी से बातचीत की.
वो कहते हैं, "सुबह ही हमारी बात हुई थी और वो विधानसभा मार्च के लिए निकल गए थे. हमसे कह गए कि हम खेती सम्भालें. उसके बाद हमें डेढ़ बजे जानकारी मिली कि उनकी मृत्यु हो गई है. तब हमलोग पीएमसीएच गए और देखे कि उनका कपड़ा फटा था और चेहरे पर बाएँ साइड डंडे की चोट लगी थी."
जब हमने उनसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि प्रशासन ने अभी तक कोई बात नहीं बताई है.
मेडिकल हिस्ट्री के बारे में उनका था कि वे (विजय कुमार सिंह) हमेशा से एक स्वस्थ व्यक्ति रहे. सारी खेती खुद करते थे.
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का क्या है कहना?
बृजकिशोर शर्मा उर्फ़ विमलेश शर्मा गुरुवार (13 जुलाई) के दिन विजय कुमार सिंह के साथ विरोध मार्च में शामिल होने के लिए जहानाबाद से साथ गए थे और पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी रहे.
बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "हम और विजय जी आधे रास्ते तक साथ ही थे, लेकिन उसके बाद मैं आगे बढ़ गया और बैरिकेड तक पहुँच गया. हमारे वहाँ पहुँचते ही प्रशासन ने पानी की बौछार कर दी और लाठीचार्ज की शुरुआत कर दी. लाठीचार्ज शुरू होते ही सब भागने लगे. प्रशासन ने हमें 50 फीट तक खदेड़ा. जब प्रशासन ने खदेड़ा तभी हमारी मुलाक़ात साथी गुड्डू जी और विजय जी से हुई."
विमलेश शर्मा आगे कहते हैं, "जब हम तीनों लोग फिर से साथ हुए तो विजय जी बेचैनी की शिकायत करते हुए घर पर बेटे से बात करने लगे. तभी वो गिर पड़े. हमलोगों ने और साथियों के साथ उन्हें रिक्शे पर बिठाया और नज़दीक के तारा हॉस्पिटल में ले गए."
"हॉस्पिटल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया लेकिन हमें विश्वास नहीं हुआ. हमने एम्बुलेंस किया और उन्हें पीएमसीएच ले गए. वहाँ पहुँचने पर कहा गया कि ट्रीटमेंट हो रहा है, मरीज ठीक है, लेकिन जब 10 मिनट बाद केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय आए तब उन्हें मृत घोषित किया गया."
वहीं जब हमने उनसे ज़िला प्रशासन की ओर से घटना के वक्त छज्जूबाग इलाक़े में उनकी मौजूदगी के फ़ुटेज जारी करने को लेकर सवाल पूछे तो उन्होंने कहा, "यह बात बिल्कुल ग़लत है. यदि वो शुरू से छज्जूबाग इलाक़े में होते तो मेरा भी फुटेज प्रशासन जारी करे, जहां मुझपर पानी की बौछार हुई."
उनका यह भी कहना था, "जब पुलिस-प्रशासन लाठीचार्ज करने लगी तो डर के मारे सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता बग़ल की गली (छज्जूबाग जाने वाली गली) में घुस गए. मुख्य सड़क पर तो प्रशासन बर्बर लाठीचार्ज कर रही थी जैसे वे आतंकवादी हों."
वहीं विजय सिंह के भाई सुनील कुमार सिंह ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा, "मार्च के दौरान भगदड़ में गिरने से उनकी मौत हुई. उन्हें इसके बाबत जानकारी साथ चल रहे लोगों ने दी."
भाजपा के दूसरे कार्यकर्ता और प्रत्यक्षदर्शी भरत सिंह चन्द्रवंशी ने मीडियाकर्मियों से कहा, "समारोह में जाने से पहले ही भगदड़ मची और ऐसा संभव है कि वो गिर पड़े हों. उसके बाद उन्हें साथ के लोग नज़दीक के अस्पताल ले गए और वहाँ उनकी स्थिति गंभीर दिखी. बाद में एम्बुलेंस से भी ले जाया गया लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया."
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