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उत्तर प्रदेश में एक परिवार का दावा, मोमो के लालच में नाबालिग ने दे दिए घर के क़रीब 85 लाख के गहने
- Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले में सातवीं क्लास में पढ़ने वाले एक किशोर के परिवार का दावा है कि उसने घर के क़रीब 85 लाख रुपये के गहने मोमो बेचने वालों को दे दिए.
परिवार का कहना है कि इस मामले का पता तब चला जब किशोर की बुआ अपने मायके पहुंचीं और अपने गहने लेने के लिए घर की अलमारी खोली. उन्हें वहां से अपने सारे गहने ग़ायब मिले.
परिजनों ने जब नाबालिग से पूछताछ की तो सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे ने पूरी घटना बता दी.
रामपुर कारखाना थाने के एसओ देवेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक़, मोमो खिलाने के नाम पर तीन युवकों ने 14 वर्षीय किशोर को फुसलाया था.
आरोप है कि युवकों ने पहले दोस्ती की और फिर धीरे-धीरे उसे बहलाकर गहने लाने के लिए उकसाने लगे.
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पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस मामले में पुलिस ने बीएनएस की धारा 305(ए) के तहत मुक़दमा लिखा है, जिसमें नाबालिग समेत चार अभियुक्तों का नाम शामिल है.
भारतीय न्याय संहिता की धारा 305 चोरी से संबंधित है. इस अपराध के लिए दोषी को 7 साल तक की क़ैद और जुर्माना हो सकता है.
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक अभियुक्त राकेश को गिरफ़्तार कर लिया है. इसके अलावा एक महिला को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस ने कुछ गहने भी बरामद कर लिए हैं.
देवरिया सदर के पुलिस क्षेत्राधिकारी सुनील रेड्डी ने गिरफ़्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस टीमें बाकी अभियुक्तों की तलाश कर रही हैं.
उन्होंने बताया कि जल्द ही बाक़ी ज़ेवरात भी बरामद कर लिए जाएंगे.
कैसे खुला राज़?
इस मामले की जानकारी तब सामने आई, जब नाबालिग की बुआ गहने लेने के लिए घर आई थीं. नाबालिग के पिता ने बताया कि जब उनकी बहन ने अपने गहने मांगे तो अलमारी में रखा सारा ज़ेवर ग़ायब पाया.
शक होने पर उन्होंने अपने बेटे से पूछताछ की, जिस पर उसने बताया कि वह मोमो खाने के लिए ज़ेवर डुमरी चौराहे के दुकानदारों को दे चुका है.
नाबालिग के पिता ने बताया कि वह वाराणसी के एक मंदिर में पुजारी के रूप में काम करते हैं.
उन्होंने कहा,''मेरा बेटा गांव में रहकर पढ़ाई करता है और उसे मोमो खाने की आदत थी. इसी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाते हुए देवरिया-कसया मार्ग स्थित डुमरी चौराहे पर मोमो की दुकान लगाने वाले तीन युवकों ने उससे मेल-जोल बढ़ाया और दोस्ती कर ली थी.''
घर में मौजूद नाबालिग के चाचा ने बताया कि पूरे परिवार के भाई-बहनों के गहने घर में रखे हुए थे.
नाबालिग़ के पिता ने दावा किया कि ग़ायब ज़ेवरात में एक जोड़ी सोने का हार, नौ सोने की अंगूठियां, दो सोने का मांगटीका, दो जोड़ी सोने के कंगन, 13 चांदी की बिछिया, 22 सोने की नथ की कील, चार सोने की बिछिया, पांच अन्य सोने की अंगूठियां और चार जोड़ी सोने की कान की बालियां शामिल हैं.
इन गहनों की अनुमानित क़ीमत क़रीब 85 लाख रुपये बताई जा रही है.
अभियुक्त के परिजन ने क्या कहा?
पुलिस जांच में सामने आया है कि अभियुक्तों ने पहले बच्चे को मुफ़्त मोमो खिलाकर उससे दोस्ती की थी. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे उसे बहलाया और घर से ज़ेवर लाने के लिए उकसाने लगे.
रामपुर कारखाना थाने के एसओ देवेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक़, नाबालिग ने बताया कि वह मोमो खाने के बदले घर से गहने निकालकर डुमरी चौराहे के दुकानदारों को देता रहा. उसने बताया कि यह सिलसिला क़रीब चार से छह महीने तक चलता रहा.
इस दौरान वह लगभग रोज़ाना घर की आलमारी से एक-एक कर ज़ेवर निकालता और बदले में मोमो खाता रहा. पुलिस का कहना है कि नाबालिग़ अपनी उम्र और समझ की कमी के कारण अभियुक्तों के झांसे में आ गया.
पुलिस ने बताया कि इस मामले में दीपक कुमार, राकेश और पिंटू के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. नाबालिग के परिजनों ने सभी गहनों की सूची पुलिस को सौंप दी है.
हालांकि अभियुक्तों के परिजनों का दावा है कि उन्होंने गहने वापस कर दिए थे.
अभियुक्त राकेश के परिजनों ने दावा किया कि जो गहने लिए थे, वे पुलिस को सौंप दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि परिजन चार कंगन की बात कर रहे हैं, जबकि उसने दो कंगन लिए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.