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'मैंने अपने चोरी हुए फ़ोन को लंदन, दुबई और चीन जाते देखा'
- Author, जेसिका उरे और डॉली कार्टर
- पदनाम, बीबीसी लंदन और ईस्ट इन्वेस्टिगेशन्स
यह सब कुछ बहुत तेज़ी से होता है. बाइक की आवाज़, हल्का सा टच और कुछ सेकंड में आपकी पूरी डिजिटल ज़िंदगी ख़तरे में पड़ जाती है.
हैरानी और सदमे का ये सिलसिला ब्रिटेन की सड़कों पर दिन में सैकड़ों बार दोहराया जाता है.
फ़ोन चोरी का असर सिर्फ़ पैसों तक सीमित नहीं होता.
फ़ेनेला रॉलिंग का बिल्कुल नया आईफ़ोन 16 अगस्त में कैम्ब्रिज में ख़रीदारी के दौरान झपट लिया गया.
उस फ़ोन में उनकी फेफड़ों के लाइलाज कैंसर से जूझ रही मां के साथ अनमोल यादें (तस्वीरें) थीं. अब वे तस्वीरें हमेशा के लिए खो गईं क्योंकि न तो उनका बैकअप था और न ही आईक्लाउड सेटअप किया गया था.
रोते हुए उन्होंने कहा, "ये वो यादें हैं जो मैं कभी भी, कभी भी वापस नहीं पा सकूंगी."
'फाइंड माई' नाम के ऐप के ज़रिए फ़ेनेला ने देखा कि उनका मोबाइल रियल टाइम में ट्रेन से लंदन की ओर जा रहा था. एक हफ़्ते बाद वह दुबई में था. फिर चीन पहुंच गया. इसके बाद लगातार फ़िशिंग मैसेज आने लगे, जिनमें उनसे अकाउंट की जानकारी या फ़ोन को वाइप करने को कहा गया.
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता मैं अपनी मां के साथ कितना वक़्त और रहूंगी. मैं कुछ भी खोना नहीं चाहती."
लगातर बढ़ते स्नैचिंग के मामले
फ़ेनेला जैसी कहानियां अब आम हो चली हैं. संगठित अपराध गिरोह अब फ़ोन चोरी की तरफ़ मुड़ गए हैं. हर चोरी हुआ फ़ोन 400 पाउंड तक में बिक जाता है.
दोषी ठहराए गए फ़ोन स्नैचर सॉनी स्ट्रिंगर ने एक घंटे में 24 फ़ोन चुराए थे. पिछले साल अगस्त में उसे दो साल की जेल हुई.
लाइसेंस्ड टैक्सी ड्राइवर्स एसोसिएशन के चेयरमैन पॉल ब्रेनन ने कहा, "लंदन में ये आसान कमाई का ज़रिया है." .
उन्होंने कहा, "किसी को नहीं लगता कि उनके साथ ऐसा होगा, लेकिन जब होता है, तब समझ आता है. अब ऐसी घटनाएं बहुत बढ़ रही हैं."
"स्नैचर हमेशा इलेक्ट्रिक बाइक पर होते हैं, ताकि तुरंत भाग सकें. काले कपड़ों में, सिर पर हुड और चेहरा ढका होता है."
"हमारे पास नियमित ग्राहक हुआ करते थे जो दुनिया भर से आते थे, लेकिन अब वे यहां आने से कतरा रहे हैं. वो कहते हैं कि हम लंदन नहीं आ रहे क्योंकि अब ये सुरक्षित नहीं है."
मेट्रोपॉलिटन (मेट) पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक़, 2024 में एक लाख 17 हज़ार 211 फ़ोन चोरी हुए, जो 2019 के 91 हज़ार 481 के मुक़ाबले 25 प्रतिशत ज़्यादा है.
मेट पुलिस का कहना है कि लंदन की सड़कों पर ज़्यादातर स्नैचर हल्की, इलेक्ट्रिक मोटरबाइकों पर होते हैं, जिनकी रफ़्तार 60 मील प्रति घंटा (करीब 97 किलोमीटर प्रति घंटा) तक पहुंच जाती है.
इन बाइकों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए, पुलिस ने भी अब अपनी हाई-पावर्ड बाइकों का बेड़ा तैयार किया है ताकि अपराधियों का पीछा किया जा सके.
मेट पुलिस के सार्जेंट रयान पेरी ने कहा, "उन्हें ये (स्नैचरों को) बिलकुल पसंद नहीं कि हमारे पास अब वैसी बाइक्स हैं."
उन्होंने कहा, "उन्हें नफ़रत है कि हम सड़कों पर हैं लेकिन हमारे और जनता के लिए ये बहुत अच्छा है. अगर हम अपराध को रोक पाएं तो बढ़िया. लेकिन अगर वे फ़ोन छीनने आएंगे, तो हम वहीं होंगे. उन्हें पकड़ेंगे और अदालत के सामने पेश करेंगे."
आसमान से चोरों पर नज़र
फ़ोन चोरों के ख़िलाफ़ लड़ाई सिर्फ ज़मीनी स्तर पर नहीं लड़ी जा रही है.
नेशनल पुलिस एयर सर्विस (एनपीएएस) के टैक्टिकल फ़्लाइट ऑफ़िसर एंड्रयू लॉलेस ने कहा, "हम फ़ोन चोरों का सबसे बुरा सपना हैं."
उन्होंने कहा, "जैसे ही हम ऊपर पहुंच जाते हैं, उनके भाग निकलने की संभावना बेहद कम हो जाती है. हम खिड़की से बहुत कुछ देख सकते हैं. हम अपने कैमरों और दूसरे उपकरणों से संदिग्धों का पता लगाते हैं और उनका पीछा करते रहते हैं."
एनपीएएस लंदन के बेस मैनेजर सार्जेंट ग्लेन वॉकर ने एप्पिंग फ़ॉरेस्ट में बीबीसी को दिखाया कि कैसे ऑनबोर्ड कैमरे संदिग्धों के चेहरों तक ज़ूम कर सकते हैं.
उन्होंने कहा, "किसी इलाके़ में हेलीकॉप्टर की मौजूदगी अपने आप में अपराध रोकने वाला असर डाल सकती है. हमारा एयरक्राफ़्ट काफ़ी बड़ा और शोर करने वाला होता है. अगर हम वेस्टमिन्स्टर के ऊपर 1,000 फीट (300 मीटर) की ऊंचाई पर हैं और उस इलाके़ में लूटपाट की घटनाएं हुई हैं, तो ज़्यादातर बार चोर हेलीकॉप्टर की आवाज़ सुनकर या देखकर छिप जाते हैं."
स्नैचिंग के ख़िलाफ़ मुहिम
डिएगो गाल्डिनो ख़ुद को 'पिकपॉकेट हंटर' कहते हैं.
दिन में वह एक डिलिवरी ड्राइवर हैं, लेकिन उन्होंने चोरी की घटनाएं रोज़ाना देखते हुए उन्हें रिकॉर्ड करना शुरू किया और फिर सोशल मीडिया पर डालना शुरू किया.
उनका अकाउंट 'पिकपॉकेट लंदन' कुछ ही महीनों में लाखों व्यूज़ हासिल कर चुका है.
गाल्डिनो कहते हैं कि जब भी उन्हें कोई चोर दिखता है, तो लोगों को आगाह करना उनका 'सहज स्वभाव' है.
उन्होंने कहा, "मुझे महसूस हो रहा है कि शहर में अपराध दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. वे अपने चेहरे ढंकते हैं, ज़्यादातर दो या उससे ज़्यादा लोग होते हैं, हमेशा ग्रुप में रहते हैं."
"जब चोरी हो जाती है, तो सामान मिलना मुश्किल होता है क्योंकि वे तुरंत किसी और को दे देते हैं. इसलिए मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि मैं पहले ही चिल्ला दूं."
लंबे समय से माना जाता है कि लंदन में जेबकतरे एक तरह से 'घूमने वाले अपराधी' हैं. जो एक शहर से दूसरे शहर जाते रहते हैं ताकि पुलिस उन्हें पहचान न सके.
ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस (बीटीपी) ने भी ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी है, जहां फ़ोन चोर रोज़ाना लंदन आने-जाने वाली ट्रेनों में सफ़र करते हैं- जैसे ये उनका 'फ़ुल टाइम काम' हो.
फ़िन्सबरी पार्क स्टेशन पर बीबीसी एक पेट्रोलिंग टीम के साथ जुड़ी. इस दौरान एक बीटीपी अधिकारी ने सड़क पर चल रहे एक शख़्स की ओर इशारा किया.
उन्होंने कहा, "वो जो काले कैप वाला आदमी है, हम उसे जानते हैं. वो पोर्ट्समाउथ में रहता है. वो हर रोज़ पोर्ट्समाउथ से लंदन आता है फ़ोन चोरी करने. यही उसका फुल-टाइम जॉब है."
संदिग्ध का कुछ देर पीछा करने के बाद, वह स्टेशन से बिना चोरी किए निकल गया. इसके तुरंत बाद अधिकारियों को एक और संभावित चोर की तलाश में बुला लिया गया, जिसे उसी इलाके़ में देखा गया था.
विदेश से आने वाले चोर
बीटीपी अधिकारी अक्सर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के आसपास सादे कपड़ों में गश्त करते हैं. ख़ासकर फ़िन्सबरी पार्क जैसे इलाकों में, जिन्हें अपराध का हॉटस्पॉट माना जाता है.
एक अधिकारी ने कहा, "वे ये काम इंडस्ट्रियल लेवल पर कर रहे हैं, बहुत पैसा कमाने के लिए. कई चोर विदेश से आते हैं, कुछ हफ़्तों तक यहां चोरी करते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं."
लेकिन इलाके़ के कुछ फ़ोन चोर 'घरेलू' भी हैं.
अधिकारी ने कहा, "पिछले दो साल में यहां के आसपास के इलाकों से बहुत सारे लोग इस नेटवर्क का हिस्सा बन गए हैं. शायद 600 लोगों के आसपास. हमारे पास कम से कम 600 ऐसे लोगों की तस्वीरें हैं जो इसी गिरोह के सदस्य हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.