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पाकिस्तान में जज के कमरे से सेब और हैंड वॉश ग़ायब, एफ़आईआर के बाद पुलिस ने शुरू की जाँच
- Author, एहतेशाम अहमद शमी
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
पाकिस्तान के लाहौर में पुलिस ने एक सेशन कोर्ट के जज के कमरे से दो सेब और एक हैंड वॉश की कथित चोरी के लिए मामला दर्ज किया है.
इस मामले में न्यायाधीश के रीडर की शिकायत पर लाहौर के इस्लामपुरा पुलिस स्टेशन में एफ़आईआर दर्ज की गई है.
लाहौर के इस्लामपुरा पुलिस स्टेशन के ड्यूटी ऑफ़िसर इमरान ख़ान ने बीबीसी को बताया कि उन्हें ऑपरेशन विंग के एडिशनल सेशन जज के रीडर से मामला दर्ज करने का अनुरोध मिला था, जिस पर उन्होंने एफ़आईआर दर्ज कर ली है.
उन्होंने कहा कि एफ़आईआर की एक प्रति और संबंधित रिकॉर्ड अब आगे की कार्रवाई के लिए इनवेस्टिगेशन विंग को भेज दिए गए हैं.
इस मामले में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक़, पाँच दिसंबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लाहौर नूर मुहम्मद बिस्मिल के चैंबर से दो सेब और एक हैंड वॉश की बोतल चोरी हो गई थी.
एफ़आईआर में कहा गया है कि चोरी किए गए सामान की कुल क़ीमत 1,000 पाकिस्तानी रुपए है.
इस मामले में न्यायाधीश की अदालत में रीडर ही वादी हैं.
उन्होंने एफ़आईआर में कहा कि न्यायाधीश ने उन्हें पुलिस स्टेशन में घटना की रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया था.
'पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी'
लाहौर पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 380 के तहत यह मामला दर्ज किया है.
पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 380 चोरी से संबंधित है.
इस धारा के तहत चोरी का दोषी पाए जाने पर अभियुक्त को अधिकतम सात साल की जेल या जुर्माना, या दोनों सज़ाएँ हो सकती हैं.
यह कैसे मुमकिन है कि इस तरह की एफ़आईआर पाकिस्तान में दर्ज की जाए और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा न हो?
सोशल मीडिया पर जहाँ यूज़र्स दो सेब और हैंड वॉश की चोरी के मामले में केस दर्ज होने पर हैरानगी जता रहे हैं, वहीं कई लोग पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं.
सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर असरार अहमद नाम के एक यूज़र लिखते हैं कि लाहौर पुलिस ने इस मामले में तुरंत एफ़आईआर दर्ज कर ली है और शायद 'चोरी हुए सेब और हैंड वॉश की बरामदगी के लिए एक जेआईटी का भी गठन किया जाना चाहिए.'
वह कहते हैं, "आम जनता कह रही है कि अगर कच्चे और पके हुए दोनों तरह के लुटेरों के मामलों में ऐसा ही दोस्ताना और क़ानूनी रवैया देखने को मिले, तो पूरा देश अपने आप सीधा हो जाएगा."
एक अन्य यूज़र ने लिखा, "कभी-कभी ग़रीब लोग अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई गँवाने के बाद भी एफ़आईआर दर्ज नहीं करा पाते हैं."
हसन शब्बीर नाम के एक यूज़र ने लिखा, "आम लोगों के करोड़ों रुपए चोरी हो जाएँ, तो भी पुलिस एफ़आईआर दर्ज करने से कतराती है. लेकिन एक जज के दो सेब और हैंड वॉश चोरी होने पर पूरा देश विरोध कर रहा है."
दूसरी ओर, हैदर मजीद नामक एक यूज़र ने इसे 'पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी' बताया.
कई सोशल मीडिया यूज़र इस घटना की तुलना कुछ दिन पहले इस्लामाबाद में कार की चपेट में आने से स्कूटर सवार दो लड़कियों की मौत से करते नज़र आए.
वकास ख़लील नाम के एक यूज़र ने लिखा कि एक तरफ इस्लामाबाद की एक अदालत के वरिष्ठ अधिकारी के बेटे ने कथित तौर पर दो मासूम लड़कियों को रौंद दिया, लेकिन क़ानून चुप रहा. और दूसरी तरफ एक जज की अदालत से केवल दो सेब चुराने के लिए मामला दर्ज किया गया.
'पुलिस को रुमाल चोरी के लिए भी एफ़आईआर दर्ज करना अनिवार्य'
हालाँकि, दूसरी ओर, कुछ यूज़र्स का इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं कि चोरी तो चोरी होती है और पुलिस हर छोटी-मोटी चोरी के लिए भी एफ़आईआर दर्ज करने के लिए बाध्य है.
पाकिस्तान पुलिस के रिटायर्ड आईजी मुहम्मद अल्ताफ़ क़मर ने कहा कि घटना चाहे मोजे़ या रुमाल चोरी की हो, एफ़आईआर दर्ज करना पुलिस की ज़िम्मेदारी है.
बीबीसी उर्दू से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर छोटी घटनाओं को नज़रअंदाज़ किया गया तो बड़ी घटनाएँ घटेंगी.
वहीं, आपराधिक क़ानून विशेषज्ञ शकीला सलीम राणा एडवोकेट कहती हैं, "अपराध तो अपराध है, चाहे चोरी एक रुपए की हो या एक करोड़ रुपए की, यह अपराध है जो पकड़ा जा सकता है."
हालाँकि, उन्होंने कहा कि न्याय का यह मानक सभी के लिए समान होना चाहिए.
उन्होंने कहा, "यह न्याय बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों को मिलना चाहिए, और जिसके साथ अन्याय हुआ है, उसके लिए क़ानून को समान रूप से कार्य करना चाहिए."
बीबीसी हिन्दी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.