केंद्र की ओबीसी लिस्ट में इन छह राज्यों की 80 जातियों को शामिल करने की योजना- प्रेस रिव्यू

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के प्रमुख हंसराज गंगाराम अहीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के प्रमुख हंसराज गंगाराम अहीर

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के प्रमुख हंसराज गंगाराम अहीर ने कहा है कि आने वाले महीनों में केंद्र की ओबीसी लिस्ट में छह राज्यों के क़रीब 80 जातियों के नाम जोड़े जा सकते हैं.

उन्होंने अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू को बताया कि इसके लिए मंज़ूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

ये मामला ऐसे वक़्त सामने आया है, जब केंद्र सरकार पहले ही मोदी सरकार के दौर में ओबीसी की लिस्ट में बदलाव कर उसमें और जातियों को जोड़ने के काम को अपनी उपलब्धि के तौर पर गिना रही है.

बीते सप्ताह सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें सरकार ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और जम्मू और कश्मीर में कम से कम 16 समुदायों के नामों को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल किया गया है, ये सरकार की बड़ी उपलब्धि है.

आगे के वक़्त में महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा राज्यों से और जातियों को ओबीसी लिस्ट में शामिल किया जाएगा.

अख़बार लिखता है कि तेलंगाना सरकार ने केंद्र से गुज़ारिश की है कि राज्य की ओबीसी में मौजूद 40 जातियों के नाम केंद्र की ओबीसी लिस्ट में भी जोड़े जाएं.

वहीं आंध्र प्रदेश ने तुरुक कापू जाति और हिमाचल प्रदेश ने माझरा समुदाय का नाम केंद्र की सूची में शामिल करने की गुज़ारिश की है.

महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि लोधी, लिंगायत, भोयर पवार और झंडसे जातियों के नाम राज्य की ओबीसी लिस्ट में हैं, इन्हें केंद्र की लिस्ट में शामिल किया जाए.

वहीं पंजाब ने यादव समुदाय और हरियाणा ने गोसाई (या गोसांई) समुदाय का नाम केंद्र की लिस्ट में जोड़ने का आग्रह किया है.

द हिंदू के अनुसार, अहीर ने कहा कि "ये सभी गुज़ारिश फ़िलहाल आयोग के सामने हैं और आयोग इन पर विचार करेगा. हमने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है, उम्मीद है कि इन जातियों के नाम आगे बढ़ाए जा सकेंगे. इस बारे में फ़ैसला लेने के बाद आयोग कैबिनेट को अपनी सिफ़ारिश भेजेगा."

एनसीबीसी क़ानून 1993 के अनुसार, लिस्ट में जातियों को जोड़ने की प्रक्रिया के तहत आयोग एक बेंच बनाती है जो इससे जुड़ी सभी गुज़ारिश पर विचार करती है.

इसके बाद वो केंद्र सरकार को अपनी सिफ़ारिश भेजती है. इसके बाद केंद्र सरकार इस पर अपनी स्वीकृति देती है और लिस्ट में बदलाव को अमली जामा पहनाने के लिए क़ानून में ज़रूरी बदलाव करती है. इसके बाद इस बदलाव को आख़िरी स्वीकृति देने की ज़िम्मेदारी राष्ट्रपति की होती है.

हंसराज अहीर

इमेज स्रोत, Hansraj Ahir @Facebook

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

केंद्र, राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों की ओबीसी लिस्ट में कुल 2,650 अलग-अलग जातियों के नाम शामिल हैं.

साल 2014 यानी मोदी के सत्ता में आने के बाद इस लिस्ट में 16 समुदायों के नाम जोड़े गए हैं.

केंद्र सरकार ओबीसी लिस्ट में जातियों के नाम जोड़ने, साथ ही संविधान में किए 105वें संशोधन को अपनी उपलब्धि के तौर पर बता रही है.

इसके तहत सभी राज्यों को अपनी ओबीसी लिस्ट बनाने की इजाज़त दी गई है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित 671 समुदायों को शामिल किया गया है.

ओबीसी समुदायों के अलावा सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2011 में हुई पिछली जनगणना के बाद से अनुसूचित जाति की लिस्ट में मेन एंट्री के तौर पर चार समुदायों और सब-एंट्री के तौर पर 40 समुदायों के नामों को जोड़ा गया है. वहीं चार समुदायों के नाम को लिस्ट से हटाया गया है.

अख़बार कहता है कि मार्च 2023 तक की स्थिति के मुताबिक़ केंद्र की अनुसूचित जाति की लिस्ट में कुल 1,270 समुदायों के नाम शामिल हैं.

2021 के बाद से अनुसूचित जनजाति की लिस्ट में मेन एंट्री के तौर पर 5 समुदायों और सब-एंट्री के तौर पर 22 समुदायों के नामों को जोड़ा गया है.

वहीं मौजूदा जनजातियों में से 13 के नामों के दूसरे विकल्पों को भी लिस्ट में जोड़ा गया है. वहीं केवल एक समुदाय के नाम को लिस्ट से हटाया गया है.

मार्च 2023 तक की स्थिति के मुताबिक़ केंद्र की अनुसूचित जनजाति की लिस्ट में कुल 748 समुदायों के नाम शामिल हैं.

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया की तुलना में ओबीसी की लिस्ट में बदलाव के लिए रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति का इंतज़ार नहीं करना पड़ता. इसमें एनसीबीसी मुख्य भूमिका निभाती है.

1979 में बने मंडल आयोग के अनुसार समुदायों की सामाजिक, शिक्षा और आर्थिक मानदंडों के आधार पर एनसीबीसी इस मामले में विचार करती है और अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को भेजती है.

एनसीईआरटी

इमेज स्रोत, Parveen Kumar/Hindustan Times via Getty Images

33 शिक्षाविदों ने की एनसीईआरटी की क़िताबों से नाम हटाने की गुज़ारिश

एनसीईआरटी की राजनीतिक विज्ञान की क़िताबों से अपना नाम को लेकर राजनीतिक विज्ञान मामलों के विशेषज्ञ सुहास पलशिकर और योगेंद्र यादव के एनसीईआरटी को पत्र लिखने के बाद अब 33 शिक्षाविदों ने परिषद से ऐसी ही गुज़ारिश की है.

जनसत्ता ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 33 शिक्षाविदों ने परिषद से एनसीईआरटी की क़िताबों से ये कहते हुए नाम हटाने की गुज़ारिश की है कि "उनका सामूहिक रचनात्मक प्रयास ख़तरे में है."

अख़बार लिखता है कि जिन 33 शिक्षाविदों ने एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी को पत्र लिखकर अपना नाम हटाने की गुज़ारिश की है उनमें जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफ़ेसर कांति प्रसाद वाजपेयी हैं.

पत्र में जिन लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं उनमें अशोका यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रताप भानू मेहता, सीएसडीएस के पूर्व निदेशक राजीव भार्गव, जेएनयू की प्रोफ़ेसर निवेदिता मेनन, हैदराबार यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफ़ेसर केरी सूरी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज़ के पूर्व निदेशक पीटरल रोनाल्ड डिसूज़ा शामिल हैं.

इस पत्र में कहा गया है कि "चूंकि मूल पुस्तकों में कई व्यापक बदलाव किए गए हैं और इन्हें अलग तरह की क़िताब बना दिया गया है. ऐसे में हमारे लिए ये स्वीकार करना मुश्किल है कि इन्हें हमने तैयार किया है और इनसे हमारा नाम जुड़ा रहे."

ड्रोन

इमेज स्रोत, ANI

भारत अमेरिका से लेगा 31 प्रीडेटर ड्रोन

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से 31 प्रिडेटर (एमक्यू-9बी सी गार्डियन) ड्रोन खरीदने की योजना को मंज़ूरी दे दी है.

इसके बाद अब ये उम्मीद की जा रही है कि इस बारे में अगले सप्ताह मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान औपचारिक घोषणा की जा सकती है.

अख़बार लिखता है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल की एक बैठक में जनरल एटोमिक्स के बनाए ये ड्रोन खरीदने का फ़ैसला लिया गया है.

भारत लंबे वक्त से अमेरिका से ये ड्रोन हासिल करना चाहता है. प्रिडेटर ड्रोन हवा से ज़मीन में मार कर सकने वाली मिसाइलें ले जाने में सक्षम होते है और लगातार 27 घंटों तक हवा में रह सकते हैं. साथ ही ये लंबी दूरी में मौजूद ठिकाने पर सटीक निशाना लगाने के लिए स्मार्ट बम भी ले जा सकते हैं.

अख़बार लिखता है कि तीन अरब डॉलर क़ीमत के इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से 31 प्रिडेटर ड्रोन खरीदना चाहता है. इनमें से 15 नौसोना को दी जाएंगी, 8 वायु सेना और अन्य 8 थल सेना को दी जाएंगी.

पश्श्चिम बंगाल

इमेज स्रोत, ANI

चुनाव से पहले हिंसा

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार गुरुवार को पंचायत चुनावों से पहले हुई हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है. 8 जुलाई को होने वाले पंचायत चुनावों में गुरुवार को नामांकन का आख़िरी दिन था.

अख़बार लिखता है कि जहां उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा इलाक़े में गोलीबारी में सीपीआई(एम) के एक कार्यकर्ता की मौत हुई, वहीं दक्षिण 24 परगना में इंडियन सिकुलर फ्रंट के एक और तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत हुई है.

अख़बार लिखता है कि कोलकता से 30 किलोमीटर दूर भानगर में ताज़ा हिंसा की घटना हुई है, यहां इंडियन सिकुलर फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए. दोनों तरफ से एकदूसरे पर गोली चलाने की भी ख़बर है.

अख़बार लिखता है कि यहां के बिजयगंज बाज़ार इलाक़े में पुलिस की मौजूदगी में नामांकन सेंटर को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया.

इंडियन सिकुलर फ्रंट के एक नेता के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनके उम्मीदवार का नामाकंन पत्र छीन लिया जिसके बाद यहां हिंसा शुरू हुई. वहीं सीपीआईएम कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें नामांकन भरने से रोका गया.

हालांकि तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के हिंसा का आरोप विपक्षी पार्टियों पर लगाया है और कहा है कि आपसी झगड़े के कारण यहां हिंसा हुई.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)