यमन में सज़ा-ए-मौत का सामना कर रहीं नर्स निमिषा की अब भी बच सकती है जान, ये है विकल्प

- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी
निमिषा प्रिया, एक भारतीय नर्स हैं. उन पर यमन में उनके बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप है. यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने निमिषा प्रिया को मौत की सज़ा सुनाई है.
उत्तरी यमन के राष्ट्रपति महदी अल मशात ने इस सज़ा को मंज़ूरी दी है. यमन के उत्तरी भाग का नियंत्रण हूतियों के पास है,
लेकिन, निमिषा के पास अभी भी अपनी जान बचाने का एक विकल्प मौजूद है.
यमन से जब ये ख़बर आई कि भी निमिषा प्रिया की मौत की सज़ा को मंजूरी दे दी गई है, तो केरल के कोच्चि में निमिषा का परिवार परेशान हो गया.
लेकिन निमिषा के परिवार के वकील का कहना है कि अभी भी पीड़ित के परिवार से नर्स निमिषा को माफ़ करने के लिए बातचीत करने का विकल्प खुला है.

वकील ने क्या कहा?

दिल्ली में निमिषा के परिवार के वकील सुभाष चंद्रन ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''अभी भी पीड़ित के परिवार को 'ब्लड मनी' के तौर पर भुगतान किए जाने को लेकर बातचीत जारी है.''
''हमें पीड़ित के परिवार के साथ विचार-विमर्श करने की ज़रूरत है, मगर यह केवल भारत सरकार के सहयोग से ही संभव हो सकता है. हम ख़ुद पीड़ित के परिवार तक नहीं पहुंच सकते.''
यमन, शरिया क़ानून का पालन करने वाला देश है.
यमन जैसे शरिया कानून को मानने वाले देश में सरकार अभियुक्त को दी गई सज़ा तभी माफ़ कर सकती है जब पीड़ित पर हमला करने वाला व्यक्ति, पीड़ित के परिवार को 'ब्लड मनी' के रूप में दी जाने वाली रकम देने के लिए तैयार हो जाए.
हूती विद्रोहियों के बीच छिड़े गृहयुद्ध के बाद भारत ने अप्रैल 2015 में अपना दूतावास सना से स्थानांतरित कर दिया था.
निमिषा के वकील चंद्रन ने कहा, ''हम दो किस्तों में पहले ही 40 हज़ार अमेरिकी डॉलर (38 लाख रुपए) उस वकील को दे चुके हैं, जो पीड़ित के परिवार के साथ समझौता करवा रहे हैं.''
''हमने उनको पहले 20 हज़ार डॉलर (19 लाख रुपए) दिए थे. यह कुछ समय पहले की बात है. इसके बाद बीते शुक्रवार को हमने 20 हज़ार अमेरिकी डॉलर (19 लाख रुपए) और उनको दिए हैं.''
''पहली किस्त जिबूती में दी गई थी. बाद में दूतावास रियाद, सऊदी अरब स्थानांतरित हो गया था, इसलिए दूसरी किस्त वहां दी गई.''
निमिषा प्रिया की कहानी

निमिषा बमुश्किल 19 साल की रही होंगी, जब वो 2008 में यमन चली गईं. क्योंकि, वो अपनी मां की ज़िंदगी को आसान बनाना चाहती थीं. उस समय उनकी मां लोगों के घरों में काम करती थीं.
आज 57 वर्षीय प्रेमा कुमारी सना में उनकी बेटी निमिषा को माफ़ी मिलने का इंतज़ार कर रही हैं. निमिषा की एक 13 साल की बेटी भी है.
दरअसल, यमन जाने के तीन साल बाद, निमिषा एक ऑटोचालक टॉमी थॉमस से शादी करने के लिए वापस कोच्चि आई थीं. इसके बाद थॉमस भी निमिषा के साथ यमन चले गए थे.
वहां उन्होंने एक इलेक्ट्रिशियन के सहायक के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था.
फिर 2012 में, जब निमिषा ने एक बेटी को जन्म दिया, तो थॉमस वापस केरल लौट आए, क्योंकि यमन में बच्ची की परवरिश करना उनके लिए मुश्किल था.
कुछ समय बाद, निमिषा ने 2014 में एक बिज़नेस पार्टनर के साथ मिलकर खुद का एक क्लीनिक शुरू कर दिया था. यमन में, बिजनेस केवल स्थानीय पार्टनर के साथ ही शुरू किया जा सकता है.
निमिषा के मामले में, स्थानीय पार्टनर थे तलाल अब्दो महदी. जब निमिषा अपनी बेटी के बाप्टिज़्म के लिए कोच्चि आई थी, तब महदी भी उनके साथ आए थे.
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका के अनुसार, महदी जब निमिषा के घर गए, तब उन्होंने कथित तौर पर निमिषा की शादी की तस्वीरें चुरा ली थीं.
याचिका के मुताबिक इसके बाद उन्होंने ऐसा दिखावा किया था कि निमिषा से उनकी शादी हुई थी. महदी पर निमिषा को शारीरिक रूप से 'प्रताड़ित' करने और क्लीनिक से होने वाली पूरी कमाई छीन लेने का आरोप भी है.
निमिषा के पति टॉमी थॉमस ने बीबीसी हिंदी से कहा, "जब गृह युद्ध शुरू हुआ और भारत सरकार ने यमन की यात्रा पर रोक लगा दी, तब उनका (महदी) व्यवहार बदल गया था."
"निमिषा यमन नहीं छोड़ सकती थी. क्योंकि, वहां हमने क्लीनिक खोलने के लिए पैसे उधार लिए थे. जब महदी हमारे घर आए थे, तब वो अच्छे व्यक्ति थे. उनकी पत्नी थी और बच्चे भी थे."
2017 में, निमिषा पर महदी को बेहोश करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा की ज़्यादा ख़ुराक देने और कथित तौर पर महदी के शरीर के टुकड़े करने का आरोप लगा. और निमिषा को जेल भेज दिया गया.
पिता की चिंता

इमेज स्रोत, Getty Images
निमिषा के पति टॉमी थॉमस कोच्चि में ऑटो रिक्शा चलाते हैं.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमारी बेटी 27 दिसंबर को 13 साल की हो गई. और वह पूछती है कि क्या उसकी मां से कोई बात हुई थी. बेटी जब दो साल की थी, तब से उसने अपनी मां को नहीं देखा है."
"जब वह छोटी थी, तब हमने उसको बताया था कि उसकी मां जेल में है. क्योंकि, उसकी मां पर एक ऐसे अपराध का आरोप है, जो उसने नहीं किया है. हमने उसको एक हॉस्टल में रखा है, क्योंकि जब मैं ऑटो चलाता हूं, तब वह अकेले नहीं रह सकती है.''
थॉमस ने कहा, "हर मंगलवार, वह अपनी मां से बात करती है. और उसका पहला सवाल यही होता है कि मां कब वापस आओगी?"
"अगर मैं उसकी मां को फोन करना भूल जाता हूं तो मेरी बेटी बहुत गुस्सा हो जाती है. उसको उसकी मां का प्यार नहीं मिला है. उसको मां की ज़रूरत है."
थॉमस ने कहा, "कल, दोपहर मैंने अपनी पत्नी से बात की थी. बाद में शाम को हमने यमन के राष्ट्रपति की घोषणा के बारे में सुना."
"जब कभी भी निमिषा मुझे कॉल करती हैं, तो पहली बात यही पूछती है कि हमारी बेटी क्या कर रही है. वह तो जेल में है. उसको नहीं मालूम कि बाहर क्या हो रहा है."
उन्होंने बताया कि महदी के परिवार को वकील ने समझौते के तौर पर जो 'ब्लड मनी' दी है, उसे सेव निमिषा इंटरनेशनल काउंसिल के ज़रिए जुटाया गया था.
ना तो थॉमस और ना सेव निमिषा इंटरनेशनल काउंसिल महदी के परिवार से सीधा संपर्क कर सकते हैं. इसकी वजह यमन के सख़्त क़ानून हैं.
थॉमस ने कहा, "जंग के कारण, हम पीड़ित के परिवार से नहीं मिल सकते थे. वहां का क़ानून ऐसा है कि यदि जान गई है तो उसकी सज़ा केवल मौत है."
"यही वहां की व्यवस्था है. यही कारण है कि हम यमन के स्थानीय नेताओं और शेखों से बात कर रहे हैं कि वो हमारी ओर से बात करें."
मगर, थॉमस को अभी भी उम्मीद है. उन्होंने कहा, "मेरा दिल कहता है कि हम निमिषा को बचा सकते हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















