बीबीसी के चार पत्रकारों को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड से सम्मानित किया गया

बीबीसी के चार पत्रकारों को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार दिया गया है.
पुरस्कार पाने वालों में कीर्ति दुबे, विकास त्रिवेदी, तेजस वैद्य और जुगल पुरोहित शामिल हैं.
समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सभी विजेताओं को पुरस्कार दिए.

हिंदी जर्नलिज़्म कैटेगरी में बीबीसी हिंदी की कीर्ति दुबे और ब्रॉडकास्ट के लिए जुगल पुरोहित को ये पुरस्कार दिया गया है.
वहीं, रीजनल कैटेगरी में बीबीसी गुजराती के तेजस वैद्य को ये पुरस्कार दिया गया है.

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अनकविरंग इंडिया इनविज़िबल कैटेगरी में ब्रॉडकास्ट के लिए बीबीसी हिंदी के विकास त्रिवेदी को ये पुरस्कार दिया गया है.
उनकी पुरस्कृत कहानी को आप नीचे देख सकते हैं. इसके शूट एडिट देबलिन रॉय थे.
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रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड्स (आरएनजी अवॉर्ड्स) देश में पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है. रामनाथ गोयनका द इंडियन एक्सप्रेस के संस्थापक थे. उन्हीं के नाम पर 2006 से हर साल यह पुरस्कार दिया जाता है.
इस साल ये पुरस्कार साल 2021 और 2022 के लिए दिया गया है. कुल 43 लोगों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
पुरस्कार देने वाली जूरी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बीएन श्रीकृष्णण, ओपी जिंदल ग्लोबल के कुलपति प्रोफ़ेसर सी राज कुमार, माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के कुलपति केजी सुरेश और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी शामिल थे.
इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर इन चीफ़ राजकमल झा ने क्या कहा

इमेज स्रोत, Indian Express YT
इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर इन चीफ़ राजकमल झा ने इस मौके पर बताया कि इस साल रामनाथ गोयनका पुरस्कार के लिए कुल 1313 आवेदन मिले थे, जो 18 साल पहले रामनाथ गोयनका अवॉर्ड की शुरुआत के बाद से एक रिकॉर्ड संख्या है.
उन्होंने कहा कि 1000 से अधिक पत्रकारों और दो दर्जन से अधिक लेखकों की ओर से मिले ये आवेदन हमें ऐसे समय में उम्मीद देते हैं जब हर दिन पत्रकारिता को दबाने से जुड़ी ख़बरों को हम सुनते हैं. आज के दौर में बहुत से लोग हमारी परवाह नहीं करते, सिवाय हमारे माता-पिता और कुछ करीबी दोस्तों के. मैं देख रहा हूं कि कई विजेता आज अपने माता-पिता के साथ यहां आए हैं. उनका शुक्रिया यहां आने के लिए.
पिछले महीने के पाँच उदाहरण मैं दूंगा. एक हाई कोर्ट के जज ने अदालत परिसर में एक रिपोर्टर को कहा कि वो उसे यहां की ख़बरें रिपोर्ट करते नहीं देखना चाहते. कुछ दिन बाद यही जज इस्तीफ़ा देकर एक राजनीतिक दल में शामिल होते हैं और हर तरफ़ उनके बारे में अच्छा-अच्छा बताया जाता है.
एक पत्रकार ने भी राजनीतिक पार्टी का दामन थामा और उन्हें टिकट भी मिल गया. एक पत्रकार वो भी हैं जिन्हें इस शहर में दो दशक रहने के बाद इस जगह को छोड़ना पड़ा क्योंकि उन्होंने कुछ बदनाम करने वाली कहानियां लिखीं. एक नेता हैं, जो एक पत्रकार के सवाल पूछने पर उनसे कहते हैं, "आपके मालिक का क्या नाम है." और जब उन नेता के समर्थकों ने रिपोर्टर के साथ धक्का-मुक्की की तो उन्होंने कहा- उसको मत मारो यार, उसको मत मारो.
और ऐसे कुछ भी मालिक हैं जो इस कदर घुटनों के बल गिर गए हैं और उस स्थिति में इतने सहज हैं कि अब यदि उठे तो तकलीफ़ होगी. राजकमल झा ने कहा, "यहां ईज़ ऑफ़ डुइंग बिज़नेस है और अनईज़ ऑफ़ डुइंग जर्नलिज़म भी और इसलिए मैं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यहां आने के लिए शुक्रगुज़ार हूं."
उन्होंने कहा, "पत्रकारिता के लाभार्थियों को खोजना मुश्किल हो सकता है लेकिन आज जिन कहानियों को हमने सम्मानित किया है वो पत्रकारिता के लाभ को दिखाते हैं."
बीबीसी के चारों पत्रकारों को जिन कहानियों के लिए पुरस्कार दिए गए हैं वे आप नीचे दिए गए लिंक पर जाकर देख और पढ़ सकते हैं.
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