पाकिस्तान: रातों-रात क्या हुआ, कैसे 'फ़ेल' हुआ चुनाव आयोग का मैनेजमेंट सिस्टम?

- Author, आज़म खान और सहर बलोच
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद
पाकिस्तान के चुनाव आयोग के मुख्यालय के कर्मचारी चुनाव प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) का उपयोग करने के बजाय चुनाव परिणामों को मैनुअल रूप से (यानी कागज़ पर) इकट्ठा करने की कोशिश में व्यस्त हैं.
बीबीसी संवाददाता इस वक़्त चुनाव आयोग के मुख्यालय में हैं.
उनका कहना है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया है कि मोबाइल सेवा बंद होने के कारण चुनाव प्रबंधन प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है, जिसके बाद चुनावी नतीजे इकट्ठा करने का काम मैनुअल रूप से किया जा रहा है.
मुख्यालय के चुनाव कक्ष में ईसीपी (पाकिस्तान चुनाव आयोग) के कर्मचारी एक पंक्ति में बैठे हैं जबकि उनके सामने बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि मौजूद हैं.
शायद यही वजह है कि मतदान खत्म होने के करीब 18 घंटे बाद भी चुनाव आयोग अब तक शाम पांच बजे तक नेशनल असेंबली की सिर्फ 181 सीटों के लिए नतीजे सामने आए हैं.
लगभग इस गति से प्रांतों के नतीजे भी आ रहे हैं.
नतीजों में देरी

आम चुनाव के नतीजों में देरी की खबर के बाद जब बीबीसी प्रतिनिधि बीती रात दो बजे चुनाव आयोग पहुंचे तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में कैमरे और पत्रकार मौजूद थे.
ये रात चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों पर बहुत भारी साबित हो रही थी और यह उनके चेहरे से जाहिर हो रहा था.
मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा कई बार अपने कार्यालय से निकले, लेकिन रास्ते में पत्रकारों और नतीजों में देरी को लेकर उनके सवालों से बचना उनके लिए एक चुनौती थी.
मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ चुनाव प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) और चुनाव आयोग की परियोजना प्रबंधन इकाई के प्रमुख कर्नल (सेवानिवृत्त) साद अली भी थे.
जब मैंने उनसे नतीजों में देरी के कारणों के बारे में पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने मोबाइल नेटवर्क आउटेज को जिम्मेदार ठहराया. हालांकि, इस संबंध में किसी भी अन्य सवाल का जवाब देने से पहले वह मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय पहुंचे.
नतीजे आने में देरी लेकिन चाय-बिस्कुट का पूरा इंतज़ाम

हालांकि चुनाव आयोग के अंदर नतीजों की जानकारी नहीं थी, लेकिन चाय और बिस्किट का भरपूर इंतजाम था.
उधर, चुनाव आयोग के अधिकारी बार-बार पत्रकारों को आश्वस्त कर रहे थे कि नतीजे आते ही मुख्य चुनाव आयुक्त आएंगे और परंपरा के मुताबिक कैमरे के सामने प्रारंभिक नतीजों की घोषणा करेंगे और पत्रकारों के सवालों के जवाब देंगे.
इस समस्या को देखते हुए रात करीब डेढ़ बजे (मतदान खत्म होने के साढ़े आठ घंटे बाद) चुनाव आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने नतीजे जारी करने की प्रक्रिया में हो रही देरी पर कड़ा संज्ञान लिया है और उन्होंने आरओ को 30 मिनट में परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है.
यह महज संयोग था या कुछ और कि उन निर्देशों का पालन बहुत कम होता दिख रहा था. लेकिन उसके बाद भी नतीजे आने की प्रक्रिया बहुत धीमी गति से आगे बढ़ी और 9 फरवरी की सुबह 8 बजे तक राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबली के केवल 19 नतीजों की घोषणा ही हो सकी.
चुनाव आयोग को नई चुनाव प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के माध्यम से 2024 के आम चुनावों के परिणामों की घोषणा करनी थी, लेकिन चुनाव अधिकारियों के अनुसार, चुनाव के दिन सुबह आठ बजे सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ था.
मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान

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मोबाइल नेटवर्क बंद होने के कारण परिणाम संकलित करने की प्रणाली शून्य से आगे नहीं बढ़ सकी और चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के नौ घंटे बाद तक कोई परिणाम घोषित नहीं किया जा सका.
याद रहे कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने गुरुवार को मतदान के दिन शाम चार बजे दावा किया था कि मोबाइल सेवा बंद होने से चुनाव के नतीजे या उसकी प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और चुनाव आयोग इसकी कोशिश करेगा. इसलिए जितनी जल्दी हो सके परिणाम जनता को सूचित किया जाना चाहिए.
हालांकि, जब चुनाव आयोग की प्रवक्ता निगहत सिद्दिक़ी से पिछले दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त के दावे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बीबीसी से कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का यह बयान सही है कि मोबाइल नेटवर्क बंद होने से कोई नतीजा नहीं निकलेगा.
चुनाव आयोग के अधिकारी अब दावा करते हैं कि ईएमएस विफल नहीं हुआ बल्कि एक प्रशासनिक निर्णय इस सिस्टम के रास्ते में आ गया.
चुनाव आयोग के विशेष सचिव ज़फ़र इक़बाल हुसैन ने गुरुवार रात पहले नतीजे की घोषणा के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'इंटरनेट की वजह से ईएमएस काम नहीं कर पाया.'
आम चुनाव के पहले परिणाम की घोषणा

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आयोग की प्रवक्ता निगहत सिद्दिक़ी ने बीबीसी को बताया कि पीठासीन अधिकारी तुरंत रेटिंग अधिकारियों को नतीजे नहीं भेज सके क्योंकि उनकी मोबाइल सेवाएँ बंद थीं.
अधिकारियों के मुताबिक, पीठासीन अधिकारियों ने रेटिंग अधिकारियों को नतीजे बताने में भी अनुचित देरी की, जिसकी जांच की जाएगी.
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा ने इस मुद्दे पर मीडिया को कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और अपने अधीनस्थ अधिकारी के माध्यम से आम चुनाव के पहले परिणाम की घोषणा की.
उक्त अधिकारी ने पत्रकारों द्वारा पूछे गए कई सवालों का भी जवाब नहीं दिया और इंटरनेट पर बकवास पोस्ट करके प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त कर दी.
'इलेक्शन सिटी' नामक सम्मेलन कक्ष, जिसमें वाई-फाई सुविधा है, में अब परिणामों को प्रदर्शित करने वाली एक बड़ी स्क्रीन भी है. इस स्क्रीन के सामने चुनाव आयोग की नतीजे संकलित करने वाली टीम शिफ्ट में काम कर रही है.
संवैधानिक शक्तियां

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जब मैंने अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की कि रिपोर्टिंग अधिकारियों और चुनाव आयोग के बीच जो हॉट लाइन स्थापित की गई है, वो पीठासीन अधिकारियों और रिपोर्टिंग अधिकारियों के बीच काम क्यों नहीं कर रही है, तो उन्होंने इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि अगर मोबाइल सेवा बंद नहीं की गई होती तो नतीजे जारी करने में देरी नहीं होती.
कुछ अधिकारियों ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के चुनाव कर्मचारियों को एक दिन पहले ही बता दिया गया था कि चुनाव के दिन मोबाइल सेवा बंद रहेगी, लेकिन इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया.
मतदान के दिन जब मुख्य चुनाव आयुक्त से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मोबाइल सेवा को निलंबित करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और वह इस सेवा को बहाल करने के लिए संघीय सरकार से कोई अनुरोध नहीं करेंगे.
जब आयोग के अधिकारियों से पूछा गया कि चुनाव आयोग ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करके कार्यवाहक सरकार को सेवा बंद न करने के लिए बाध्य क्यों नहीं किया, तो उन्होंने कहा कि देश में गंभीर सुरक्षा समस्याएं हैं और आयोग संस्थानों को बाध्य नहीं कर सकता क्योंकि सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा है.

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हालांकि, बता दें कि मतदान के दिन बिजली की निर्बाध आपूर्ति को लेकर चुनाव आयोग ने संस्थाओं को निर्देश दिये थे.
अधिकारियों से विस्तृत चर्चा के बाद जब मुझे प्यास लगी तो मैं मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय गया, लेकिन उन्होंने मुझे मिलने का समय नहीं दिया और फिर चुनाव आयोग के सचिव डॉ. सैयद आसिफ हुसैन ने मुझसे कहा कि अब नतीजे आ जाएंगे.
वहां मौजूद एक पत्रकार ने कहा कि इतनी देर तो नहीं लगनी चाहिए. इस पर चुनाव आयोग के सचिव ने नतीजों का संकलन करने वाली टीम को ऊंची आवाज में निर्देश देना शुरू कर दिया, 'जल्दी करो भाई, क्या दिक्कत है.'
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