अरविंद केजरीवाल की घोषणा- दो दिन बाद सीएम पद से देंगे इस्तीफ़ा, बीजेपी और कांग्रेस ने दी प्रतिक्रिया

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि वो दो दिन बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.
दिल्ली शराब नीति में हुए कथित घोटाले के आरोप में जेल से बाहर निकलने के दो दिन बाद केजरीवाल ने रविवार को पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह घोषणा की है.
उन्होंने आम आदमी पार्टी के मुख्यालय में कहा, “मैं सीएम की कुर्सी से इस्तीफ़ा देने जा रहा हूं और मैं तब तक सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा जब तक जनता अपना फ़ैसला न सुना दे.”
अरविंद केजरीवाल दो दिनों के बाद अपना इस्तीफ़ा देंगे. उन्होंने कहा है कि जब तक जनता उनको इस पद पर बैठने के लिए नहीं कहेगी, तब तक वो फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे.

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केजरीवाल ने और क्या कहा?
उनका कहना है, “मैं जनता के बीच में जाऊंगा, गली गली में जाऊंगा, घर घर जाऊंगा और जब तक जनता अपना फ़ैसला न सुना दे कि केजरीवाल ईमानदार है तब तक मैं सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा.”
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार में उप-मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया भी तभी अपना पद संभालेंगे जब जनता अपना फ़ैसला सुना देगी.
केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा के लिए फरवरी की जगह नवंबर में चुनाव कराने की भी मांग की है.
उन्होंने कहा है कि जब तक दिल्ली में चुनाव नहीं होगे तब तक कोई अन्य नेता दिल्ली का मुख्यमंत्री होगा. इसके लिए दो दिन में आम आदमी पार्टी के विधायक दल की बैठक होगी उसमें नए मुख्यमंत्री का नाम तय होगा.
अरविंद केजरीवाल इससे पहले भी कई मौक़ों पर ज़रूरी फ़ैसला लेने से पहले जनता की राय लेने के बारे में बात करते रहे हैं. उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत में जनता से कथित तौर पर राय लेने की बात कई बार की है.
दिल्ली में पहली बार चुनाव लड़ने के बाद केजरीवाल ने कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनाई थी. इसके लिए भी वो कई इलाक़ों में दिल्ली की आम जनता के बीच गए थे.
केजरीवाल ने अपनी राजनीति मूल रूप से कांग्रेस के ख़िलाफ़ शुरू की थी, इसलिए कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के मुद्दे पर उस वक़्त काफ़ी सियासी बयानबाज़ी चल रही थी.
बीजेपी ने बताया 'स्टंट'
इससे पहले केजरीवाल जनता से पूछते थे कि क्या उन्हें कांग्रेस के समर्थन से उन्हें सरकार बनानी चाहिए या नहीं.
उस वक़्त भीड़ में मौजूद लोग आमतौर पर आम आदमी पार्टी के झंडे और बैनर के साथ खड़े नज़र आते थे और भीड़ से मिले जवाब के आधार पर ही केजरीवाल ने दिल्ली में पहली बार गठबंधन की सरकार बनाई थी.
अरविंद केजरीवाल पहली बार साल 2013 में कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे. उस साल दिल्ली विधानसभा चुनावों में 'आप' को 28 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस के पास भी 8 सीटें थीं.
हालाँकि उस वक़्त जनता की राय के बाद मुख्यमंत्री बने केजरीवाल ने 49 दिनों में ही अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
क्या इस बार भी केजरीवाल अपने फ़ैसले पर जनता से इसी तरीके से राय मांगेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दो दिन बाद इस्तीफ़े की घोषणा पर बीजेपी ने कहा है कि ये उनका ‘पीआर स्टंट’ है.
बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसा, "कौन सी ऐसी निजी चीज़ है जो आप 48 घंटे की मोहलत मांगने की कोशिश कर रहे हैं. सरकारी काम आप कर नहीं सकते तो फिर 48 घंटे किसके लिए चाहिए."
केजरीवाल के इस्तीफ़े की घोषणा पर उन्होंने कहा, "जब उन्होंने इस्तीफ़े की बात की तो हम ये कह सकते हैं कि ये जुर्म का इक़बालिया बयान हो गया, आपने मान लिया है कि आप पर जो आरोप हैं उसके साथ आप पद पर नहीं रह सकते. "
उन्होंने सवाल किया कि केजरीवाल किस मजबूरी में इस्तीफ़े की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "दिल्ली में उनकी सरकार है वो चाहें तो असेंबली भंग कर दें. पहले चुनाव करवाने की मांग क्यों कर रहे हैं."

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वहीं बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि ये अरविंद केजरीवाल का ‘पीआर स्टंट’ है.
वो कहते हैं, उनको ये समझ आ चुका है कि दिल्ली की जनता के बीच उनकी छवि कट्टर ईमानदार नेता की नहीं बल्कि कट्टर भ्रष्टाचारी नेता की हो चुकी है.
प्रदीप भंडारी ने कहा है, “आज आम आदमी पार्टी देशभर में कट्टर भ्रष्टाचारी पार्टी के रूप में जानी जाती है. अपनी इस पीआर स्टंट के तहत अपनी खोई हुई छवि को वापस पाना चाहते हैं. लेकिन आज दिल्ली की जनता के सामने तीन बात तय हो चुकी हैं. पहली अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि उनका ज़ीरो बैंक बैलेंस है तो उन्होंने इतना बड़ा शीश महल कैसे बना लिया.”
"आज उनको समझ आ गया है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली का चुनाव हार रही है और उनके नाम पर दिल्ली की जनता वोट नहीं कर सकती इसलिए किसी और को बलि का बकरा बनाना चाहते हैं."
इस्तीफ़े की घोषणा पर उठे सवालों पर पार्टी का जवाब
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी के लगाए आरोपों का जवाब दिल्ली सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता आतिशी ने दिए हैं.
रविवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा को भंग करने की ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा, "किसी भी विधानसभा का अगर छह महीने से कम का कार्यकाल रह जाता है तो केंद्र सरकार और चुनाव आयोग कभी भी चुनाव करवा सकता है. इसके लिए विधानसभा भंग करने की ज़रूरत नहीं है."
इस्तीफ़े के लिए दो दिन की मोहलत मांगने के सवाल पर आतिशी ने कहा, "इसका सीधा सा कारण है. आज रविवार है और कल सोमवार को ईद की छुट्टी है. इसलिए अगले वर्किंग डे यानी मंगलवार को केजरीवाल इस्तीफ़ा देंगे."
उन्होंने कहा कि, दिल्ली की सरकार कितने दिन चलेगी इसके बारे में चुनाव आयोग ही तय करेगी, लेकिन तब तक सरकार की सभी योजनाएं चलती रहेंगी.
वहीं आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी के बयान के ख़िलाफ़ एतराज़ जताया.
उन्होंने कहा, "तमाम आरोपों के बावजूद अब तक अदालत में कोई आरोप साबित नहीं हुआ है. सुधांशु त्रिवेदी जी ने केजरीवाल के लिए सज़ायाफ्ता शब्द का इस्तेमाल किया है. वो पढ़े लिखे व्यक्ति हैं, सासंद हैं. उन्हें क़ानून की समझ होनी चाहिए. केजरीवाल मामले में तो अब तक ट्रायल भी शुरू नहीं हुई है. मैं इसका पुरज़ार विरोध करता हूं, गंभीरता से ऐतराज़ दर्ज कराता हूं."
'मजबूरी में लिया गया फ़ैसला'

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कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा है कि वो ‘नाटक’ कर रहे हैं और उन्हें बहुत पहले सीएम पद को छोड़ देना चाहिए था.
उन्होंने कहा, "जब उन्हें जेल हो गई थी तभी उन्हें सीएम पद छोड़ देना चाहिए था, लेकिन उसक वक्त उन्होंने ऐसा नहीं किया. अब बचा क्या है, अब ये घोषणा करने का क्या मतलब है."
"सुप्रीम कोर्ट ने उन पर सरकारी फाइल साइन करने को लेकर पाबंदी लगाई है. हेमंत सोरेन भी जेल से रिहा हुए हैं, उन पर कोई शर्त नहीं लगाई गई थी."
केजरीवाल के इस्तीफ़े की घोषणा के बाद जेडीयू की भी प्रतिक्रिया आई है.
जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने बयान जारी कर कहा है,
"सर्वोच्च न्यायालय ने आपको मजबूर कर दिया है. आपको मुख्यमंत्री कार्यालय जाने से मना कर दिया है. यह मजबूरी में लिया गया फ़ैसला है. यह आपके मन से लिया गया फ़ैसला नहीं है."

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उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “सीएम बनने या न बनने का मतलब नहीं है क्योंकि हम तो बहुत पहले से कह रहे थे कि उन्हें ये पद छोड़ देना चाहिए. भले ही किसी कारण से आपको जेल हुए हो आपको बहुत पहले ये पद छोड़ देना चाहिए था लेकिन अब ये केवल नाटक है.”
“इतिहास में शायद पहली बार हुआ है कि कोई पद पर बैठा आदमी जेल जाए और उसे ज़मानत मिलने पर कोर्ट कहे कि ख़बरदार तुमने कोई फ़ाइल छुई या तुम कुर्सी पर बैठे. हेमंत सोरेन साब जेल से छूटे तो उन पर कोई रोक कोर्ट ने नहीं लगाई.
“सुप्रीम कोर्ट को भी डर है कि ये आदमी सुबूत मिटा देगा, गवाहों को डराएगा-धमकाएगा. सुप्रीम कोर्ट एक क्रिमिनल की तरह उन्हें ट्रीट कर रहा है इसलिए पद पर रहने के लिए कोई नैतिकता नहीं बच जाती है.”
इस साल मार्च में ईडी ने केजरीवाल को दिल्ली के कथित शराब नीति घोटाले के मामले में गिरफ़्तार किया था.
ईडी के मामले में केजरीवाल को जून में ही ज़मानत मिल गई थी लेकिन फिर सीबीआई ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था.
केजरीवाल ने इन गिरफ्तारियों के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी और उन्हें शुक्रवार को ज़मानत मिल गई थी.
क़रीब एक महीने पहले दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी 9 अगस्त को जेल से बाहर आए थे. सिसोदिया पिछले साल फ़रवरी से ही जेल में बंद थे. उनपर भी दिल्ली में हुए कथित शराब नीति घोटाले का आरोप है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















