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अनंत सिंह गोलीबारी से जुड़े मामले में फिर जेल गए, क्या चुनाव जीतने का सपना पूरा हो पाएगा?
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह ने शुक्रवार दोपहर पटना के बाढ़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया. उन्हें न्यायिक हिरासत में पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया.
ये मामला सोनू-मोनू गिरोह से जुड़ा हुआ है. बीती 22 जनवरी की शाम राजधानी पटना से 110 किलोमीटर दूर नौरंगा जलालपुर गांव में गोलीबारी हुई थी.
बाढ़ कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए अनंत सिंह ने मीडिया से कहा, "नियम सरकार का होता है, नियम पालन करना होता है. हमारे ख़िलाफ़ एफ़आईआर किया गया तो हम सरेंडर किए और जेल जा रहे हैं."
अनंत सिंह अगस्त 2024 में ही आर्म्स एक्ट में बरी होकर जेल से बाहर आए थे. वह इस साल होने वाले बिहार विधानसभा में मोकामा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं. फिलहाल उनकी पत्नी नीलम देवी इस सीट से विधायक हैं.
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क्या है पूरा मामला?
बीती 22 जनवरी को पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह के गुट और सोनू-मोनू गिरोह के बीच गोलीबारी हुई थी.
ये गोलीबारी पटना के मोकामा प्रखंड के पचमहला थाना के अंतर्गत पड़ने वाली नौरंगा-जलालपुर गांव में शाम तकरीबन साढ़े चार बजे हुई. इस गांव में बाहुबली अनंत सिंह, सोनू-मोनू नाम के दो भाइयों से मिलने गए थे.
दरअसल सोनू-मोनू का ईंट भट्ठा है जिसमें मुकेश कुमार सिंह नाम के व्यक्ति मुंशी का काम करते हैं. मुकेश सिंह हेमजा गांव के रहने वाले हैं. नौरंगा गांव से हेमजा गांव की दूरी तकरीबन एक किलोमीटर है. सोनू-मोनू का मुकेश कुमार सिंह से पैसों को लेकर विवाद है.
मुकेश कुमार सिंह बीबीसी से बताते है, "सोनू मोनू हम पर 60 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाते हैं, लेकिन हम तो गरीब आदमी है. उन लोगों ने मेरे घर पर ताला लगा दिया था तो हम लोग थाने गए. लेकिन वहां किसी ने नहीं सुनी तो हम लोग अपनी फरियाद लेकर विधायक जी (अनंत सिंह) के पास गए. विधायक जी पहले हमारे घर(हेमजा गांव) आए और ताला खोले. बाद में वो सोनू मोनू से मिलने नौरंगा गए तो उन्होनें अपने आदमी उदय यादव को सोनू मोनू को बुलाने भेजा. लेकिन सोनू मोनू ने उदय यादव पर ही गोली चलाकर घायल कर दिया."
बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने भी मीडिया को यही बातें बताईं हैं.
वहीं सोनू-मोनू के पिता प्रमोद सिंह ने स्थानीय मीडिया को बताया, "अनंत सिह के लोगों ने पहले गोली चलवाई. चूंकि हम लोगों ने नीलम देवी (अनंत सिंह की पत्नी) को चुनाव में मदद नहीं की थी इसलिए हम लोगों को ये निशाना बना रहे हैं."
बाढ़ एएसपी राकेश कुमार ने इस घटना के बाद मीडिया को बताया था कि इस गोलीबारी में 15 से 20 राउंड गोलियां चली थी. हालांकि स्थानीय स्तर पर ये दावा कम से कम 70 राउंड गोलियां चलने का है.
शुक्रवार सुबह फिर चली गोलियां
22 जनवरी को घटी इस घटना के बाद 24 जनवरी की सुबह पांच बजे भी गोली चलने का दावा मुंशी मुकेश कुमार सिंह की तरफ से किया जा रहा है.
मुकेश कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया, " सुबह पांच बजे सोनू और उसके समर्थकों ने हमारे घर में अंधाधुंध गोलियां चलाई. वो लोग गोली चलाते थे और खोखा बटोरते जाते थे. हम लोग बहुत डरे हुए हैं."
पटना के ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग ने हालांकि शुक्रवार को गोलीबारी के दावे को 'संदेहास्पद' बताया है.
उन्होने बीबीसी से कहा, "पुलिस की तैनाती में इस तरह की घटना होना संदेह पैदा करता है. बाकी 22 जनवरी को गोलीबारी के मामले में चार एफ़आईआर दर्ज हुई हैं. एक अनंत सिंह की तरफ से, दूसरी मुकेश सिंह की तरफ से, तीसरी पचमहला थाना और चौथी सोनू मोनू की मां उर्मिला ने दर्ज की है. इस मामले में सोनू के साथ-साथ अनंत सिंह गुट की तरफ से रौशन की गिरफ्तारी हुई है."
कौन है सोनू मोनू?
सोनू-मोनू दो भाई हैं जो नौरंगा गांव में रहते हैं. सोनू छोटा और मोनू बड़ा भाई है. इन भाईयों का ईंट भट्टा और मिट्टी का कारोबार है. इनके पिता प्रमोद कुमार बाढ़ कोर्ट में वकील हैं और मां उर्मिला सिन्हा इलाके की मुखिया हैं.
सोनू मोनू का आपराधिक इतिहास रहा है. बाढ़ के एएसपी राकेश कुमार के मुताबिक, सोनू-मोनू पर 12 मामले दर्ज हैं. स्थानीय पत्रकार अनुभव कुमार बताते हैं, "सोनू-मोनू और अनंत सिंह के गिरोह में दुश्मनी पुरानी रही है. लेकिन इधर हाल के सालों में दोनों के रिश्ते सुधरे थे. साल 2024 में ये दोनों अनंत सिंह से जेल से लौटने के बाद अनंत सिंह मिले थे."
अनंत सिंह को इस इलाके में 'छोटे सरकार' भी कहा जाता है.
बिहार की मोकामा विधानसभा सीट पर उनके परिवार का दबदबा रहा है. 1990 और 1995 में उनके बड़े भाई दिलीप सिंह इस सीट से जीते और साल 2005 के बाद इस सीट पर अनंत सिंह बने रहे. हालांकि उनका पैतृक घर यानी लदमा गांव बाढ़ विधानसभा में पड़ता है.
अनंत सिंह के कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. एडीआर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह द्वारा दाखिल एफिडेविट के अनुसार उन पर 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं.
उनकी हैसियत का अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि हाल ही में नीतीश कुमार अपने बाढ़ दौरे के दौरान अनंत सिंह से मिलने के लिए उनके पैतृक गांव लदमा पहुंच गए थे.
पूर्व आईपीएस अमिताभ दास गोलीबारी की घटना और अनंत सिंह पर कहते हैं, "ऐसा लग रहा है कि अनंत सिंह के ख़िलाफ़ माफियाओं का महागठबंधन बन रहा है. सोनू मोनू बहुत छोटे अपराधी हैं. उसको सूरजभान सिंह, नलिनी रंजन शर्मा उर्फ ललन सिंह (मोकामा विधानसभा में बीजेपी का संयोजक), जेल ब्रेक वाले अशोक महतो की ताकत हासिल है."
1997 से निकल रही पत्रिका तापमान के संपादक अविनाश चन्द्र मिश्र बीबीसी से कहते हैं, "इस घटना से उनके चुनाव लड़ने और उनके पक्ष की वोटिंग पर असर पड़ेगा. उनका आधार वोट ही आतंक पर कायम है और सोनू मोनू जैसे उभरते अपराधियों ने उनको चैलेंज करके इस आतंक को भी चैलेंज किया है. ये भी जरूरी सवाल है कि आखिर सोनू मोनू के पास अनंत सिंह या उनके समर्थकों पर गोली चलाने की ताकत कहां से आई?"
पत्रकार अविनाश चन्द्र मिश्र भी कहते हैं, " ऐसा लगता है कि अनंत सिंह किसी बिछाए हुए जाल में फंस गए हैं."
मोकामा: कभी दाल का इलाका, अब बंदूक का
पटना के फतुहा से लेकर लखीसराय विधानसभा क्षेत्र का इलाका 'टाल' कहलाता है. टाल का इलाका दलहन फसलों के लिए उपजाऊ माना जाता है.
मोकामा विधानसभा का क्षेत्र उनमें से एक है. ये सभी इलाके अतीत से ही दाल के लिए मशहूर रहे हैं. यहां उगाई गई दाल पहले बांग्लादेश तक भेजी जाती थी.
लेकिन बाद में ये इलाका अनंत सिंह और बाहुबल के लिए चर्चा में रहा है. इस इलाके में दिलीप सिंह, अनंत सिंह, सूरजभान सिंह, नलिनी रंजन शर्मा (ललन सिंह) जैसे दर्जनों बाहुबली रहे हैं.
मोकामा विधानसभा क्षेत्र, मुंगेर लोकसभा क्षेत्र का भी हिस्सा है जिसके वर्तमान सांसद जेडीयू के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह हैं.
22 जनवरी को घटी गोलीबारी की घटना के बाद 23 जनवरी को अनंत सिंह और सोनू यानी दो अभियुक्त दिन भर मीडिया इंटरव्यू के जरिए एक दूसरे को ललकारते रहे.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "अपराधी इंटरव्यू दे रहे हैं. आप इससे कानून व्यवस्था की स्थिति समझ सकते हैं? लॉ एंड आर्डर को तो क्रिमिनल डिसऑर्डर हो चुका हैं."
वहीं मुंगेर के सांसद ललन सिंह ने कहा, "जवाब तेजस्वी यादव को देना चाहिए कि आखिर उन्होंने अनंत सिंह को टिकट क्यों दिया. उनकी पत्नी को क्यों टिकट दिया?"
इन बयानों से इतर मोकामा की राजनीति को नजदीक से देखने वाले एक पत्रकार बीबीसी से कहते हैं, "यहां पर एक सुपर बॉस है जो चाहता है कि सारे क्रिमिनल उसके मातहत रहें. वो वक्त वक्त पर सबको उनकी औकात बताता रहता है, ये घटना भी उसी बैकग्राउंड में घटी है."
साफ तौर पर इस घटना ने बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल तो उठाए ही हैं, लेकिन साथ ही अनंत सिंह के चुनावी भविष्य और बिहार विधानसभा में बिछने वाले चुनावी बिसात के मिज़ाज का संकेत दे दिया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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