सिक्किम की रानी होप कुक क्या सीआईए एजेंट थीं? - विवेचना

रेहान फ़ज़ल

बीबीसी संवाददाता

रानी होप कुक

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सन 1959 की गर्मी की एक शाम सिक्किम के युवराज थोंडुप की मर्सिडीज़ कार दार्जिलिंग के विंडामेयर होटल के बाहर आकर रुकी. होटल के लाउंज में जाकर उन्होंने अपनी पसंदीदा ड्रिंक ऑर्डर की.

उस शाम उनकी आँखें लाउंज के कोने में बैठी एक युवा लड़की पर आकर रुक गईं. मिनटों में ही उन्होंने अपने दोस्तों से पता लगा लिया कि वो एक अमेरिकन छात्र हैं, भारत में छुट्टियाँ मनाने आई हैं और वो विंडामेयर होटल में कुछ दिनों के लिए ठहरी हुई हैं.

उस लड़की का नाम था होप कुक. युवराज की होप कुक से मुलाक़ात हुई. मिलते ही दोनों एक दूसरे की तरफ़ आकृष्ट हो गए.

36 वर्षीय युवराज की पत्नी का देहाँत हो चुका था. उनके तीन बच्चे थे. वो एक शर्मीले शख़्स थे जो थोड़ा हकलाते थे. होप कुक की उम्र उस समय मात्र 19 साल थी. इस मुलाकात के बाद युवराज और होप अगले दो सालों तक नहीं मिले.

होप

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युवराज ने दिया शादी का प्रस्ताव

सन 1961 में होप कुक एक बार फिर भारत आईं और दार्जिलिंग के विंडामेयर होटल में फिर ठहरीं. बाद में उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘टाइम चेंज’ में याद किया, "मुझे नहीं पता कि युवराज को कैसे पता चल गया कि मैं विंडामेयर होटल में ठहरी हुई हूँ. इस बार मैं अकेले चाय पी रही थी कि उन्होंने पार्लर मे प्रवेश किया."

"वो गोरखा रेजिमेंट में ऑनरेरी अफ़सर थे और वो गंगटोक से एक सैनिक कार्यक्रम में भाग लेने आए हुए थे. शाम को उन्होंने मुझे जिमखाना क्लब में अपने साथ डाँस करने के लिए आमंत्रित किया. उस रात वो बहुत अच्छे मूड में थे. उन्होंने मुझसे फुसफुसा कर कहा एक दिन हम दोनों वियना में साथ साथ घूमेंगे."

उसी रात डाँस के दौरान ही युवराज ने होप से पूछा कि क्या वो उनके साथ शादी करने के बारे में सोचेंगी ?

युवा अमेरिकी होप कुक अभी 21 साल की भी नहीं हुई थीं. उन्होंने युवराज का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. कुछ ही दिनों के अंदर थोंडुप होप को गंगटोक ले गए. राजमहल को देखते ही होप सातवें आसमान पर पहुंच गईं.

सिक्किम के चोग्याल और होप कुक

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हॉलिवुड अभिनेत्री ग्रेस केली से तुलना

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सन 1963 में जब होप की सिक्किम के युवराज से शादी हुई तो अमेरिकी प्रेस ने उन्हें हाथों-हाथ लिया. उनकी तुलना हॉलिवुड की अभिनेत्री ग्रेस केली से की गई जिन्होंने मोनाको के राजकुमार रेनियर तृतीय से शादी की थी.

सन 1969 में टाइम पत्रिका ने ‘सिक्किम: अ क्वीन रिविज़िटेड’ शीर्षक से एक लेख छापा जिसमें बताया गया कि ‘होप सुबह 8 बजे सोकर उठती हैं. इसके बाद वो विदेश से मंगवाए गए अख़बार और पत्रिकाएं पढ़ती है. अगले चार घंटे वो लोगों को पत्र लिखने, खाने का मेन्यू तैयार करने और महल के 15 नौकरों को उनका काम सौंपने में बिताती हैं. उनका शाम का समय टेनिस का एक सेट खेलने और पार्टियों में जाने के लिए होता है. रात के भोजन से पहले वो स्कॉच और सोडा वॉटर लेती हैं. गंगटोक में तो वो हर जगह अपनी मर्सिडीज़ से जाती हैं लेकिन विदेश यात्रा इकॉनॉमी क्लास में ही करना पसंद करती हैं.’

चोग्याल और होप की शादी के बाद से ही पश्चिम ख़ासकर अमेरिका के सामाजिक और राजनीतिक हल्कों और प्रेस में उनके बारे में काफ़ी चर्चा होने लगी. होप भी इस तरह व्यवहार करने लगीं जैसे वो स्वाधीन सिक्किम की रानी बनने वाली हों.

मोनाको के राजकुमार रेनियर तृतीय और ग्रेस केली

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विदेशी मेहमानों से संपर्क बढ़ा

न्यूज़वीक के 2 जुलाई, 1973 के अंक में लिखा गया, "होप ने जैकलीन केनेडी की स्टाइल में फुसफुसा कर बात करना शुरू कर दिया है. वो ‘मैं’ की जगह ‘हम’ शब्द का इस्तेमाल करती हैं और उम्मीद करती हैं कि उनके साथ उसी तरह का व्यवहार किया जाए जैसे महारानियों के साथ किया जाता है."

होप कुक से मिलने वाले विदेशी मेहमानों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने लगी. भारत में अमेरिकी राजदूत कीनेथ कीटिंग और अमेरिकी कांग्रेस के सिनेटर चार्ल्स पर्सी उनसे ख़ासतौर से मिलने गंगटोक आए.

रॉ के विशेष सचिव रहे जीबीएस सिद्धू अपनी किताब ‘सिक्किम डॉन ऑफ़ डेमोक्रेसी’ में लिखते हैं, "विदेशी लोगों से होप की इन मुलाकातों का असर ये हुआ कि पश्चिम में भारत के ख़िलाफ़ इस तरह का प्रचार होने लगा जैसे वो सिक्किम की स्वाधीनता में रोड़े अटका रहा हो. यहाँ ये कहना ज़रूरी है कि भारत पर 1950 की संधि को बदलने का ज़ोर लगाने के पीछे चोग्याल का हाथ था, लेकिन इसको अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने में उनकी मदद कर रही थीं उनकी पत्नी होप कुक."

उस समय दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में काम करने वाले अमेरिकी विदेश सेवा के अधिकारी विलियम ब्राउन याद करते हैं, "60 के दशक में होप कुक हमारी उपस्थिति में भारत पर तंज़ करने का कोई मौका नहीं छोड़ती थीं."

किताब

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लेख में दार्जिलिंग पर सिक्किम का दावा

सन 1966 में होप कुक ने नाम्ग्याल इंस्टीट्यूट की पत्रिका में ‘सिक्किमीज़ थियोरी ऑफ़ लैंडहोल्डिंग एंड द दार्जीलिंग ग्राँट’ शीर्षक से एक लेख लिखा. इस लेख में उन्होंने 1835 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को दार्जिलिंग ज़िला दिए जाने की वैधता पर सवाल उठाए.

उनका तर्क था कि दार्जिलिंग को सिर्फ़ लीज़ पर ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंपा गया था. चूँकि सिक्किम पर राज परिवार का हक है, इसलिए दार्जिलिंग को सिक्किम को लौटाया जाना चाहिए. ये लेख एक राजनीतिक डायनामाइट साबित हुआ.

लेख पर सबकी नज़र इसलिए भी गई कि अप्रत्यक्ष रूप से इस इंस्टीट्यूट का संबंध सीआईए से रहा है. केन कॉनबॉए अपनी किताब ‘द सीआईए इन तिब्बत’ में लिखते हैं, "तिब्बत ऑपरेशन में शामिल होने वाले सीआईए के एजेंटों ने इसी इस्टीट्यूट में अंग्रेज़ी के पाठ सीखे थे." इस पृष्ठभूमि में होप कुक के लेख के छपने को हिमालय में सीआईए प्लांट के तौर पर देखा गया था.

होप कुक

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इंदिरा गाँधी ने होप कुक के लेख को गंभीरता से लिया

एंड्रू डफ़ अपनी किताब ‘सिक्किम रिक्वीम फॉर अ हिमालयन किंगडम’ में लिखते हैं, "होप कुक ने हालांकि बाद में अपनी आत्मकथा में सफ़ाई दी कि इस लेख का उद्देश्य सिर्फ़ एक अकादमिक बहस छेड़ना मात्र था, लेकिन इसका विपरीत असर हुआ. भारतीय प्रेस को ये लगा जैसे उन्होंने दार्जिलिंग के भारतीय स्वामित्व की वैधता पर सवाल उठा दिए हों. कुछ ही दिनों में भारतीय अख़बारों की सुर्ख़ियाँ थीं, ‘सीआईए एजेंट के पंख निकले’ या ‘ट्रोजन घोड़ी की गंगटोक में दस्तक."

कुछ ही दिनों में होप कुक का लिखा लेख इंदिरा गाँधी की मेज़ तक पहुंचा दिया गया. इंदिरा के लिए ये लेख ख़तरे की घंटी था. सुनंदा दत्ता रे अपनी किताब ‘स्मैश एंड ग्रैब’ में लिखते हैं, "भारत की संसद में जब इस मुद्दे पर सवाल उठाए गए तो इंदिरा गाँधी ने सांसदों को आश्वासन देते हुए कहा कि दार्जिलिंग पर सिक्किम के दावे की माँग किसी ज़िम्मेदार हल्के से नहीं आई है. ‘ज़िम्मेदार हल्के’ शब्द का प्रयोग कर इंदिरा गाँधी होप के नादानी भरे वक्तव्य के बारे में गंगटोक को साफ़ संदेश देना चाह रही थीं."

"गंगटोक में भी चोग्याल ने अपने आप को अपनी पत्नी के रुख़ से अलग करते हुए ऐलान किया, ‘मेरी सरकार मेरे देश और उसके लोगों के अधिकारों की रक्षा और उसकी भलाई से जुड़े किसी भी मुद्दे को बिना नाम्ग्याल इंस्टीट्यूट और उसकी पत्रिका की मदद लिए हैंडिल करने के लिए सक्षम है."

इंदिरा गांधी और चोग्याल

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सीआईए एजेंट के आरोपों पर मिली-जुली राय

भारत के कई हल्कों में कहा जाने लगा कि सीआईए के ऑपरेटर्स ये मौका कैसे हाथ से जाने दे सकते थे जब सामरिक रूप से महत्वपूर्ण देश का एकाकी राजा दार्जिलिंग के एक होटल में एक अमेरिकी युवती के प्रेम पाश में पड़ा हो लेकिन भारत के खुफ़िया सूत्र ये नहीं मानते कि होप कुक सीआईए एजेंट थीं जिसे एजेंसी ने अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए गंगटोक में रखा था.

रॉ के विशेष सचिव रहे जीबीएस सिद्धू लिखते हैं, "अगर सीआईए वाकई सिक्किम की आज़ादी के लिए काम करना चाहती तो वो इस ऑपरेशन को बेहतर ढंग से प्लान करती. अगर वास्तव में ऐसा होता तो होप दक्षिण और पश्चिम सिक्किम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती."

वो उपेक्षित नेपाली मूल के लोगों के लिए अस्पताल, स्कूल वगैरह खोलकर चोग्याल के लिए उनकी सहानुभूति जीतने की कोशिश करतीं.

दूसरे वो चोग्याल को सलाह देतीं कि वो प्रशासन पर अपनी मज़बूत पकड़ ढीली कर कुछ शक्तियाँ लोगों के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ बाँटें. इसके ठीक उल्टे उन्होंने चोग्याल को अपने लोगों ख़ास कर नेपाली मूल के लोगों से दूर कर दिया.

होप कुक

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चोग्याल सीआईए से पहले से ही संपर्क में थे

वो बिल्कुल तिब्बती रानी की तरह व्यवहार कर, उन जैसे सामाजिक शिष्टाचार अपनाकर उन जैसे कपड़े भी पहनने लगीं.

सिद्धू आगे लिखते हैं, "एक सेकेंड के लिए मान भी लिया जाए कि वो सीआईए एजेंट थी भी, उनके हैंडलर्स अनाड़ी थे जिन्हें ज़मीनी हालात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था. वैसे भी सीआईए के चोग्याल से अतिरिक्त जानकारी की ज़रूरत नहीं थी क्योंकि चोग्याल और उनके ख़ुफ़िया प्रमुख कर्मा तोपडेन के बारे में कलकत्ता के सीआईए अधिकारियों को जानकारी थी."

"पचास के दशक में चोग्याल ने युवराज के रूप मे दो बार तिब्बत की यात्रा की थी. दोनों बार वहाँ से वापसी के बाद कलकत्ता के काउंसलेट में तैनात सीआईए अधिकारियों ने उन्हें डिब्रीफ़ किया था. जब भी वो कलकत्ता जाते थे वो उसी इलाके में ठहरते थे जहाँ अमेरिकी काउंसलेट हुआ करता था."

"इन परिस्थितियों में सीआईए और एमआई 6 के जासूस उनसे नियमित रूप से संपर्क में रह सकते थे. सीआईए जैसी तकनीकी रूप से सक्षम एजेंसी के लिए एक पूरी तरह से दुनिया की नज़रों में आने वाली होप जैसी हाई प्रोफ़ाइल संपर्क से कहीं बेहतर दूसरे स्रोतों से जानकारी जुटाना आसान होता."

रॉ के विशेष सचिव रहे जीबीएस सिद्धू इंदिरा गांधी के साथ

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चोग्याल के पतन से पहले होप ने सिक्किम छोड़ा

लेकिन चोग्याल की तुलना में होप इस मामले में होशियार थीं कि उन्हें 8 मई, 1973 को भारत से किए गए समझौते के वास्तविक परिणामों की भनक लग गई थी इसलिए दो महीने बाद अगस्त में उन्होंने हमेशा के लिए सिक्किम छोड़ने की योजना बना ली थी. ऐसा कर वो अपने पति के अंतिम पतन की गवाह बनने के दुखद काम से बच गई थीं. होप ने 14 अगस्त, 1973 को हमेशा के लिए सिक्किम छोड़ दिया.

सिक्किम के मुख्य कार्यकारी रहे बीडी दास अपनी आत्मकथा ‘मेमॉएर्स ऑफ़ द इंडियन डिप्लोमैट’ में लिखते हैं, "चोग्याल ने होप से अनुरोध किया कि वो उन्हें छोड़ कर न जाएं क्योंकि इस मुश्किल समय में उन्हें उनकी ज़रूरत है. लेकिन उन्होंने चोग्याल का अनुरोध नहीं माना. मैं होप कुक को हैलिपैड छोड़ने गया. उनके आख़िरी शब्द थे, ‘मिस्टर दास, आप मेरे पति का ध्यान रखिए."

"'अब मेरी यहाँ कोई भूमिका नहीं है.’ होप कुक कई लोगों के लिए एक पहेली थीं. कुछ लोग उन्हें सीआईए का एजेंट कहते थे. लेकिन किसी को असली कहानी पता नहीं है. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने चोग्याल को भारत विरोधी रुख़ अख़्तियार करने के लिए उकसाया. उन्होंने स्कूलों का पाठ्यक्रम बदल कर भारत विरोधी कहानियों और कार्टूनों को जगह दी. भारतीय नेताओं और अधिकारियों के सामने वो रानी की तरह व्यवहार करतीं, लेकिन उनके पीठ पीछे गुस्से में वो भारत के लिए अपशब्द कहतीं."

बीएस दास

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सिक्किम छोड़ने का कारण चोग्याल की बेवफ़ाई भी

कुछ ही दिनों बाद उन्होंने चोग्याल से तलाक माँग लिया था और अपनी अमेरिकी नागरिकता दोबारा हासिल कर ली थी जिसे उन्होंने चोग्याल से विवाह के बाद छोड़ दिया था. लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि होप ने चोग्याल का साथ इसलिए छोड़ा क्योंकि उनके संबंध पहले जैसे नहीं रह गए थे.

होप कुक और चोग्याल के संबंधों में दरार आनी तब शुरू हुई जब चोग्याल ने बेल्जियम की एक शादीशुदा महिला से संबंध बनाने शुरू कर दिए. होप के पहले बच्चे के जन्म लेने से पहले वो उस महिला से मिलने बेल्जियम जा पहुंचे.

होप कुक अपनी आत्मकथा में लिखती हैं, "उनकी प्रेमिका उन्हें प्रेम पत्र लिखा करती थी."

"कई बार जब वो मुझे गले लगाते थे तो मैं महसूस कर पाती थी कि उनके ड्रेसिंग गाउन की जेब में कुछ कागज़ रखे हुए हैं. अक्सर वो प्रेम पत्र उनकी जेब से गिर जाते थे जिन्हें उठा कर मैं पढ़ लेती थी."

चोग्याल की अत्यधिक शराब पीने की आदत ने भी होप को उनसे दूर कर दिया था. शराब के नशे में एक बार चोग्याल ने उनका रिकॉर्ड प्लेयर खिड़की से नीचे फेंक दिया था.

चोग्याल

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भारतीय सैनिकों ने राजमहल घेरा

30 जून, 1974 को दिल्ली में इंदिरा गाँधी के साथ चोग्याल की बातचीत असफल हो जाने के बाद सिक्किम का भारत में विलय का रास्ता साफ़ हो गया था. 9 अप्रैल, 1975 को भारतीय सैनिकों ने सिक्किम के राजमहल को घेरना शुरू कर दिया था.

जीबीएस सिद्धू लिखते हैं, "गेट पर तैनात संतरी बसंत कुमार छेत्री ने अपनी राइफ़ल तान भारतीय सैनिकों से रुकने के लिए कहा. भारतीय सैनिकों ने उसे गोली से उड़ा दिया."

जीबीएस सिद्धू लिखते हैं, "चोग्याल ने घबरा कर अपने पर्सनल सिक्योरिटी ऑफ़िसर गुरबचन सिंह को ये जानने के लिए फ़ोन किया कि क्या हो रहा है, लेकिन रिसीवर जनरल खुल्लर की तरफ़ बढ़ा दिया गया जो गुरबचन के पास बैठे हुए थे. जनरल खुल्लर ने चोग्याल से कहा कि वो सिक्किम गार्ड्स को हथियार डालने का आदेश दें. सिक्किम गार्ड की 243 सैनिकों की टुकड़ी को भारतीय सैनिकों ने घेर लिया. उन्होंने अपने हथियार डालकर अपने हाथ ऊपर उठा दिए. पूरा आपरेशन 20 मिनट में समाप्त हो गया."

चोग्याल

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सिक्किम का भारत में विलय

उस दिन 12 बज कर 45 मिनट पर सिक्किम का आज़ाद देश का दर्जा ख़त्म हो गया. चोग्याल ने हैम रेडियो पर इसकी सूचना पूरी दुनिया को दी. इंग्लैंड के एक गाँव में एक रिटायर्ड डाक्टर और जापान और स्वीडन के दो अन्य लोगों ने उनका ये आपात संदेश सुना.

इसके बाद चोग्याल को उनके महल में नज़रबंद कर दिया गया. सिक्किम को भारत का 22 वाँ राज्य बनाने का संविधान संशोधन विधेयक 23 अप्रैल, 1975 को लोकसभा में पारित कर दिया गया.

तीन दिन बाद 26 अप्रैल को ये बिल राज्यसभा में पारित हुआ. 15 अप्रैल, 1975 को जैसे ही राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने बिल पर हस्ताक्षर किए सिक्किम में नाम्ग्याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया.

चोग्याल इंदिरा गांधी के सचिव पीएन धर के साथ

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होप कुक कभी सिक्किम वापस नहीं लौटीं

चोग्याल इस सदमे से कभी उबर नहीं पाए. उनको कैंसर हो गया. उनको इलाज के लिए अमेरिका ले जाया गया.

29 जनवरी, 1982 की सुबह चोग्याल पालडन थोंडुप नाम्ग्याल ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. चोग्याल की मृत्यु के बाद होप कुक अमेरिका में ही रहीं.

होप

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सन 1989 में उन्होंने औपरा विनफ़्रे के टॉक शो ‘औपरा’ में भाग लिया. सिक्किम से उन्होंने अपने संबंध बनाए रखे हैं लेकिन वो वहाँ कभी वापिस नहीं लौटीं.

उन्होंने इतिहासकार माइक वैलेस से 1983 में दूसरी शादी की लेकिन उनसे भी उनका तलाक हो गया. वो अभी भी न्यूयॉर्क में रहती हैं.

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