महज़ मुस्कान से लोग यहां करते हैं स्वागत

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- Author, क़जाक़ एल्सवर्थ और एना ब्रेसानन
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
दुनिया में ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां पर रहना, मौत से रोज़ मुक़ाबला करने जैसा है. उत्तरी ध्रुव के आस-पास के इलाक़े ऐसे ही हैं. कनाडा, रूस, और अमरीका के अलास्का सूबे के साथ ग्रीनलैंड का कुछ हिस्सा उत्तरी ध्रुव के बेहद क़रीब पड़ता है. इन इलाक़ों को इनुइट कहा जाता है. यहां सदियों से लोग रहते आए हैं.
ये बेहद बर्फ़ीला और सर्द इलाक़ा है. यहां रहना अपने-आप में बड़ी चुनौती है. बर्फ़ीले आर्कटिक इलाक़े की अपनी जीवनशैली है. कुछ ख़ास क़ायदे हैं.
कनाडा का किकिताजुआचे नाम का गांव, आर्कटिक के बेहद क़रीब पड़ता है. ये कनाडा का सबसे उत्तरी इलाक़ा है जहां लोग रहते हैं. ये जगह आइसबर्ग कैपिटल यानी आइसबर्ग की राजधानी कही जाती है. आर्कटिक से पिघलकर बर्फ़ के बड़े-बड़े टुकड़े गर्मियों में यहीं से होकर गुज़रते हैं.

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वालरस की चर्बी से गर्मी
इस इलाक़े में लोग सैकड़ों बरस से रहते आए हैं. पहले लोग यहां इग्लू यानी बर्फ़ से बने छोटे-छोटे मकानों में रहा करते थे. वहां ख़ुद को सील और वालरस की चर्बी जलाकर गर्म रखा करते थे. अब तकनीक ने तरक़्क़ी कर ली है. ईंधन पहुंच जाता है. तो लोग ख़ुद को माइक्रोवेव ओवेन की मदद से गर्म रखते हैं. हीटर रखते हैं.
सर्दियां आते ही इनुइट लोग गर्म ठिकानों में कैंपिंग के लिए चले जाते हैं. साल के एक बड़े हिस्से में ये लोग अपने घरों से दूर रहते हैं. क़रीब पांच सौ लोगों की आबादी वाले किकिताजुआचे गांव में सब लोग एक-दूसरे को जानते हैं. ये लोग इनुक्टितुत नाम की भाषा बोलते हैं. इसकी 26 से ज़्यादा बोलियां हैं. ये ज़बान उस दौर में विकसित हुई जब यहां के लोग बहुत दूर-दूर रहते थे.
मगर पिछले पचास सालों में इनुक्टितुत एक बोली वाली ज़बान के तौर पर विकसित हो रही है. इस भाषा के बहुत से ऐसे शब्द हैं जिनका अंग्रेज़ी या किसी और भाषा में सीधा अनुवाद नहीं हो सकता. जैसे यहां हैलो के लिए कोई शब्द ही नहीं है क्योंकि यहां लोग एक दूसरे का स्वागत महज़ मुस्कान से करते हैं.

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दुनिया का सबसे शुद्ध पानी
किकिताजुआचे की सबसे ख़ास बात है यहां मिलने वाला पानी. इसे दुनिया का सबसे शुद्ध पानी कहा जाता है.
असल में यहां के लोग उत्तरी ध्रुव से टूटकर आने वाले आइसबर्ग की बर्फ़ से पानी निकालते हैं. बर्फ़ के टुकड़ों को ये लोग तोड़कर घर ले आते हैं. घर के गर्म माहौल में बर्फ़ पिघलकर पानी में तब्दील होती है. ये वो बर्फ़ है जो सदियों से ध्रुवों पर जमी हुई थी. जिसमें माहौल की कोई मिलावट नहीं. ये एकदम शुद्ध है.
स्थानीय लोग कहते हैं कि इस पानी का स्वाद ही एकदम अलग, जन्नती होता है. हालांकि इनमें कुछ मिनरल की कमी होती है, जो आम तौर पर पानी में मिलते हैं.
आज आधुनिकीकरण के दौर में किकिताजुआचे के स्थानीय लोगों को अपनी ज़बान, अपनी संस्कृति और अपनी सभ्यता के गुम हो जाने का डर सता रहा है. कनाडा की सरकार ने उनकी पढ़ाई-लिखाई के तो इंतज़ाम किए हैं. मगर उन्हें स्कूल में अपनी ज़बान बोलने से मना किया जाता है. ये लोग घर में अपनी भाषा में ही बात करते हैं, ताकि सदियों पुरानी इस भाषा को बचाकर नई पीढ़ी को सौंप सकें.
ये कहानी एलेन कूनीलुसी ने तैयार की थी. उन्होंने ही किकिताजुआचे जाकर वहां की तस्वीरें शूट कीं. लोगों से बात की. मगर स्टोरी पूरी करने के बाद उनकी मौत हो गई थी. एलेन के परिवार ने बीबीसी को ये स्टोरी अपने पाठकों से साझा करने की इजाज़त दी.
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