शार्क मछलियां इंसानों का शिकार क्यों करती हैं?

    • Author, रिचर्ड ग्रे
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

शार्क समंदर में सबसे तेज़ शिकारी जीव है. ये अपने तेज़ धार वाले नुकीले दांतों से नावों तक को काट सकती है.

आम-तौर पर शार्क समंदर में रहने वाली मछलियों और अन्य जीवों का ही शिकार करती है.

लेकिन, कई बार इंसान का शिकार भी कर लेती है.

हालांकि, साइंस कहती है कि शार्क इंसान से डरती है. पर, गुज़रे कुछ वर्षों में शार्क ने इंसान का ख़ूब शिकार किया है. आख़िर इसकी वजह क्या है?

आंकड़े बताते हैं कि साल 2009 में बिना भड़काए हुए भी शार्क ने दुनिया भर में क़रीब 83 इंसानों पर हमला किया. 2013 से 2017 में ये आंकड़ा औसतन ऐसा ही रहा.

लेकिन ताज़ा रिसर्च बताती है कि दुनिया के बहुत से हिस्सों में ये आंकड़ा बढ़ा है.

इंसान पर शार्क के हमलों की संख्या के मामलों में पूर्वी अमरीका और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में बीते 20 वर्षों में दोगुना इज़ाफ़ा हुआ है.

हवाई द्वीप के आस-पास भी इस तरह के मामले बढ़े है.

इंटरनेशनल शार्क अटैक फ़ाइल का लेखा-जोखा रखने वाले रिसर्चर गैविन नेलर के मुताबिक़, "अजीब इत्तिफ़ाक़ है कि शार्क ने जिस इलाक़े में इंसानों पर हमला किया है, उस वक़्त समंदर के उस हिस्से में मौजूद इंसानों और शार्क की संख्या बराबर थी."

लेकिन यहां ये जानना ज़रूरी है कि किन इलाक़े में शार्क इंसान पर हमले ज़्यादा कर रही है. ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी अमरीका में बड़ी संख्या में लोग समुद्री लहरों का मज़ा लेते हैं.

ज़ाहिर सी बात है, यहीं पर शार्क के हमलों के मामले भी ज़्यादा हैं.

वहीं दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के समंदर में सील मछली की तादाद ज़्यादा है, जो कि शार्क का पसंदीदा शिकार है. लिहाज़ा यहां ऐसे मामलों के आंकड़े कम हैं.

शिकार के मामले

समुद्री जीवों के संरक्षण के लिए अमरीका में 1972 में मरीन मैमल एक्ट लागू किया गया. जिसके बाद यहां सील की तादाद काफ़ी बढ़ गई है. इसके बाद ही समंदर में व्हाइट शार्क की संख्या भी काफ़ी बढ़ी है.

लेकिन अफ़सोसजनक बात ये है मैसाचुसेट्स में इनके हमलों के मामले बढ़ गए हैं.

गुज़रे साल ही मैसाचुसेट्स में 82 साल में पहली बार शार्क के हमले से किसी की जान चली गई.

लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात के पुख़्ता सबूत नहीं हैं कि शार्क बहुत सक्रिय रूप से इंसानों पर हमला कर हैं.

मिसाल के लिए उत्तरी अटलांटिक में मौसम के मुताबिक़ ही शार्क यहां पहुंचती है. सर्द मौसम में शार्क यहां गर्म पानी में रहने आती हैं.

केवल बड़ी शार्क ही खुले समंदर में ऊपर की ओर रहती हैं, बाक़ी सब पानी की गहराई में ही रहना पसंद करती हैं. समंदर की गहराई में ही इन्हें अपना शिकार मिल जाता है.

रिसर्चर नेलर के मुताबिक़ शार्क इंसान के शिकार में दिलचस्पी नहीं रखती. समुद्र की सतह पर लहरों का मज़ा लेते इंसान को तो बहुत बार ये भी पता नहीं होता कि शार्क उसके साथ-साथ चल रही है.

आपको याद होगा कि कुछ साल पहले हवाई में ओशन रैमसे ने 20 फुट लंबी व्हाइट शार्क के साथ तैर कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था. लेकिन जिस तरह शार्क के हमलों के मामले सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि वजह कुछ और है.

पिछले साल इंसान पर शार्क के हमलों के 66 केस सामने आए जो कि एक साल पहले के मुक़ाबले क़रीब 20 फ़ीसद कम थे. इनमें भी सिर्फ़ 4 ही ऐसे केस थे, जिनमें हमला काफ़ी घातक था. इन में से सात मामलों में इंसान की मौत हो गई थी. इस साल भी अभी तक शार्क के घातक हमले के महज़ चार मामले ही सामने आए हैं.

अब इसकी वजह क्या है?

दरअसल समंदर का बढ़ता तापमान और कम होते शिकार की वजह से ब्लैक टिप्ड शार्क ने दक्षिणी-पूर्वी अमरीका से फ़्लोरिडा की ओर कूच करना शुरू कर दिया.

दक्षिणी-पूर्वी अमरीका में यही शार्क इंसान पर सबसे ज़्यादा अटैक करती थी.

द ग्रेट व्हाइट, टाइगर और बुल शार्क ऐसी प्रजातियां हैं, जो बिना उकसाए भी इंसान पर हमला करती हैं. हॉलीवुड की फ़िल्म जॉस हो या फ़िर शार्क पर आधारित कोई अन्य फ़िल्म, सभी में व्हाइट शार्क को ही दिखाया गया है.

क्योंकि ये शार्क की सबसे ख़तरनाक प्रजाति है. लेकिन अभी भी हमें इस ख़तरनाक शार्क की जीवन शैली और बर्ताव के बारे में बहुत कम जानकारी है.

बायोलॉजिस्ट ब्लेक चैपमैन का कहना है कि शार्क की क़रीब 530 प्रजातियां हैं, और उन सब में भी कई तरह के उपजातिया हैं. सभी का बर्ताव, चीज़ों को महसूस करने और शिकार करने का तरीक़ा भी अलग है.

मिसाल के लिए बुल शार्क उथले पानी में, तो व्हाइट शार्क बिल्कुल साफ़ पानी में शिकार करती है.

अन्य प्रजातियों के मुक़ाबले इसकी नज़र भी काफ़ी तेज़ होती है. यही नहीं इसके दांत भी सेंसर का काम करते हैं.

वजह साफ़ नहीं है कि आख़िर शार्क इंसान पर हमला क्यों कर रही है. हो सकता है साहिली इलाक़ों में इंसान की बढ़ती आबादी, समंदर के पानी में गंदगी, जलवायु परिवर्तन और समंदर में कम होते शिकार इसकी वजह हैं.

इसके अलावा समुद्री इलाक़ों में बड़ी संख्या में बंदरगाह बन रहे हैं, जिसकी वजह से रीफ़ का बड़ा इलाक़ा साफ़ हो रहा है, और समंदर में रहने वाले जीवों का घर तबाह हो रहा है. शार्क भी उसमें शामिल है.

इसीलिए ये शिकार की तलाश में नए स्थान पर जा रही हैं. और जब शिकार नहीं मिलता तो इंसान पर ही हमला बोल देती हैं.

व्हाइट शार्क की जीवन शैली

हिंद महासागर का रियूनियन आईलैंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

हाल के वर्षों में यहां सैलानियों की संख्या में भी इज़ाफ़ा हुआ है. यहां भी शार्क के हमले के कई केस अब तक सामने आ चुके हैं और इनमें इज़ाफ़ा होता ही जा रहा है.

बुल शार्क यहां सबसे ज़्यादा हमला करती है. शार्क चूंकि एक बड़ी मछली है, लिहाज़ा जब ये हमला करती है तो नुक़सान भी ज़्यादा होता है.

कई बार इंसान की मौत तक हो जाती है. जो बच जाते हैं उन्हें वो अंग ही खोना पड़ जाता है, जिस पर शार्क ने हमला किया होता है.

व्हाइट शार्क की जीवन शैली और बर्ताव समझने के लिए बड़े पैमाने पर रिसर्च की जा रही है. ग्रेग स्कोमल नाम के रिसर्चर व्हाइट शार्क पर टैग लगाकर उन्हें ट्रैक करते हैं. साथ ही पानी में कैमरा भी उतारते हैं जिससे उन्हें पल-पल की जानकारी मिलती रहती है.

साथ ही शार्क के हमलावर होने की वजहों पर रिसर्च की जा रही है. इसके लिए बहुत से रिसर्चर फोरेंसिक तरीक़े भी अपना रहे हैं. जबकि कुछ रिसर्चर हमले की वीडियो फुटेज और ज़ख़्मों की तुलना करके हमला करने वाली प्रजाति के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं.

दक्षिणी अफ़्रीका से जमा आंकड़ों से पता चलता है कि व्हाइट शार्क समुद्री सतह पर ज़्यादा सक्रिय होती है.

जब समुद्र का तापमान 14 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा होता है, तब भी ये शिकार के लिए सक्रिय हो जाती है.

जबकि अन्य रिसर्च बताती हैं कि रात के समय पूरे चांद की रोशनी में शार्क अपना शिकार करती है.

कुछ का ये भी कहना है कि जब छोटी शार्क शिकार करना सीखती है, तो इंसान पर हमला कर देती है. ठीक उसी तरह जैसे शेर का छोटा बच्चा जब शिकार करना सीखता है तो किसी पर भी हमला बोल देता है.

बचने के तरीके

शार्क के हमलों को लेकर लोगों में डर भी कुछ ज़्यादा है. किसी एक हमले की कहानी सुनकर वो लोग भी शार्क से ख़ौफ़ज़दा हो जाते हैं जिन्होंने कभी इसे देखा तक नहीं या कभी समंदर में गए तक नहीं.

समंदर में बढ़ते शिकार और इंसान की फैलाई गंदगी की वजह से शार्क की संख्या कम हो रही है.

ऑस्ट्रेलिया के आस-पास के समंदर में शार्क की आबादी 75 से 92 फ़ीसद तक घट गई है.

बहरहाल, शार्क के हमले से बचने के कई तरीक़े हैं. कुछ का कहना है कि अगर शार्क हमला करे तो आप भी उसके गिल या आंख में वार कीजिए. तैराकी कीजिए तो कई लोगों के साथ, अकेले नहीं.

और तैरते वक़्त गहरे रंग के कपड़े पहन कर ही समंदर में उतरिए. किसी तरह के गहने आदि पहनकर पानी में मत जाइए, क्योंकि इनकी चमक शार्क को आक्रमक बना सकती है.

बहुत सी जगहों पर तैराकों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने समंदर में शार्क नेट बिछाए हैं. लेकिन इससे अन्य जीवों के लिए मुश्किल पैदा हो जाती है. दक्षिणी अफ्रीका में केप टाउन के आस-पास शार्क को रोकने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक केबल बिछाई जा रही हैं.

इसके अलावा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैरियर लगाने पर भी विचार किया जा रहा है. कुछ समुद्री इलाक़ों में खास मौसम में तैराकी पर पाबंदी लगा दी जाती है. इससे अटैक के मामले में तो कमी हुई है, लेकिन टूरिज़्म को काफ़ी नुक़सान पहुंचा है.

शार्क जब हमला करती है तो वो ना सिर्फ़ शरीर को ज़ख़्मी करती है बल्कि मानसिक रूप से भी घायल कर देती है. अगर इंसान शार्क की दुनिया में तहलका मचाना छोड़ दे, तो शार्क को इंसान से कोई बैर नहीं है.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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