एयरपोर्ट डिज़ाइन करना कितना मुश्किल

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1995 में फ्रांसीसी मानवविज्ञानी मार्क ऑग्रे ने हवाई अड्डों को 'नॉन प्लेस (non place)' कहा था. मार्क के मुताबिक़, दुनिया भर में बने हवाई अड्डों की कोई अलग पहचान नहीं.
वो हर जगह एक जैसे होते हैं. ठीक वैसे ही जैसे स्टारबक्स कॉफ़ी शॉप या मैक्डोनाल्ड्स के रेस्टोरेंट. दुनिया में कहीं भी जाएं, आप को ये रेस्टोरेंट या हवाई अड्डे एक जैसे ही मिलेंगे.
मार्क ऑग्रे का कहना था कि हवाई अड्डे मशीनों जैसे हैं. इनका मक़सद एक ही है कि लोगों को एक जगह से दूसरी जगह सलीक़े से पहुंचाना.
इसीलिए हर हवाई अड्डा एक ख़ास रणनीति के तहत डिज़ाइन किया जाता है. इसके पीछे पूरा मनोविज्ञान होता है.
जब आप किसी हवाई अड्डे में घुसते हैं, तो आप अपनी अलग निजी पहचान को गंवा देते हैं. फिर आप की पहचान केवल सरकारी पहचान पत्र और दूसरे दस्तावेज़ रह जाते हैं.
आप हर तरह की सुरक्षा जांच के लिए सहमति देते हैं. वैसे, कहने को तो आप ये कह सकते हैं कि अनजान माहौल में आप अपनी ख़ुशी से ऐसा करते हैं, ताकि विमान में सवार होने से पहले आप अपनी सुरक्षा की तसल्ली कर लें.
हवाई अड्डे पर जाना और सुरक्षा जांच से गुज़रना बहुत तनावपूर्ण होता है. इस दौरान फ्लाइट में देरी हुई तो तनाव बढ़ जाता है. कभी सामान गुम होने से और कभी किसी और वजह से भी हवाई अड्डे पर होना बेहद तनाव का मसला बन जाता है.

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एयरपोर्ट का डिज़ाइन
इसीलिए, जब एयरपोर्ट का डिज़ाइन बनता है, तो उसके पीछे एक मनोवैज्ञानिक सोच काम करती है. जो आप को छोटे-छोटे मनोवैज्ञानिक धक्के देकर सुरक्षा जांच से गुज़रने से लेकर ख़रीदारी तक को प्रेरित करती है.
किसी भी हवाई अड्डे पर घुसने के बाद रास्ता तलाशने के लिए छोटे-छोटे इशारे छुपे होते हैं. भीड़ चाहे जितनी भी हो, लोग ये रास्ते तलाश लेते हैं. आस-पास के माहौल से ही पता चल जाता है कि आप को किधर की तरफ़ आगे बढ़ना है.
सिविल इंजीनियरिंग कंपनी जैकब्स के एयरपोर्ट प्लानर अलेज़ांद्रो प्यूब्ला कहते हैं, 'हवाई अड्डों पर आप को तस्वीरों से इशारा कर के बताया जाता है कि किधर जाना है. कभी रंगों का चुनाव ऐसा होता है, तो कभी क़ालीन के ज़रिए चुपके से बता दिया जाता है कि इधर जाएं. आप ग़लत दिशा में जाते हैं, तो आप को फ़ौरन एहसास हो जाता है. इसके पीछे एयरपोर्ट का डिज़ाइन होता है.'
इन दिनों हवाई अड्डों पर सबसे मुश्किल काम है सुरक्षा जांच से गुज़रना. अमरीका पर 9/11 के हमले के बाद दुनिया भर में हवाई अड्डों पर सुरक्षा के बेहद सख़्त इंतज़ाम किए गए हैं. उससे पहले तो आप आराम से हवाई अड्डे से गुज़र सकते थे. सुरक्षा तब भी थी, पर इतनी सख़्ती नहीं थी. लोग एयरपोर्ट के गेट तक अपने ईष्ट-मित्रों को छोड़ने जा सकते थे.
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पर, आज तो हवाई अड्डे सुरक्षा के भारी-भरकम इंतज़ामों के चलते, क़िले सरीखे मालूम होते हैं. केवल प्रमाणित मुसाफ़िर ही हवाई अड्डे पर जा सकते हैं. फिर उनकी सिर से पैर तक जांच होती है. स्कैनर से गुज़रना पड़ता है, जो आप के अंदरूनी अंगों तक की जांच करते हैं.
कुल मिलाकर सुरक्षा जांच से गुज़रते हुए हर यात्री अपने आप में सुरक्षाकर्मी बन जाता है. हवाई अड्डे की सुरक्षा पर किताब लिखने वाली रैशेल हाल कहती हैं कि, 'हर मुसाफ़िर उस नागरिक सुरक्षा टीम का हिस्सा बन जाता है, जो सुरक्षा जांच की प्रक्रिया से भली-भांति परिचित होता है.'
हर हवाई अड्डे पर लगे बड़े-बड़े बोर्ड आप को सुरक्षा की ज़िम्मेदारी का एहसास कराते हैं. वो बताते हैं कि आप सुरक्षा के आख़िरी मोर्चे हैं. आप कुछ भी गड़बड़ देखें, तो फ़ौरन बताएं. वग़ैरह...
मज़े की बात ये है कि ये भारी-भरकम सुरक्षा इंतज़ाम नाकाफ़ी हैं. 2017 में अमरीका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने पाया कि उनके अधिकारी नक़ली बंदूक, चाकू और विस्फ़ोटक लेकर 70 फ़ीसद सुरक्षा जांच से आसानी से गुज़र गए. हालांकि ये 2015 में 95 फ़ीसद से काफ़ी कम था, पर इससे साफ़ है कि हवाई अड्डों पर सुरक्षा की व्यवस्था किस क़दर नाकाम है.

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हवाई अड्डों के पुख़्ता इंतज़ाम डराने के लिए नहीं
सुरक्षा मामलों के जानकार ब्रूस श्नायर कहते हैं, "आतंकवाद की घटनाएं बहुत कम होती हैं. लोगों की सोच से बहुत ही कम. इससे मुक़ाबले के लिए सही जांच, ख़ुफ़िया जानकारी और आपातकालीन व्यवस्था ही कारगर है."
बदक़िस्मती से आतंकवाद से लड़ने के ये इंतज़ाम आम जनता को नहीं दिखते. न तो इन इंतज़ामों से जनता सुरक्षित महसूस करती है. इसीलिए, हवाई अड्डों पर सुरक्षा का भारी-भरकम इंतज़ाम होता है. और हर नई घटना के साथ सुरक्षा की नई परत जुड़ती जाती है.
2001 में जूते के ज़रिए विस्फोटक ले जाने की कोशिश नाकाम की गई, तो जूते खोलकर जाना ज़रूरी बना दिया गया.
2006 में तरल विस्फोटक ले जाने की कोशिश देखी गई, तो किसी भी तरल पदार्थ को हवाई अड्डे पर ज़ब्त कर लिया जाता है.
ये इंतज़ाम लोगों को सुरक्षा का एहसास कराने के लिए भले काफ़ी लगें, पर, हक़ीक़त ये है कि ये बिल्कुल बेअसर हैं. किसी को नहीं पता कि आतंकवादी किस नए तरीक़े से अपने इरादों को अंजाम देंगे.
कुल मिलाकर कहें तो, हवाई अड्डों के पुख़्ता इंतज़ाम आप को डराने के लिए नहीं, बल्कि आप को बार-बार हवाई अड्डे की तरफ़ लाने के लिए होते हैं.
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हर मुसाफ़िर है ग्राहक-
असल में हवाई अड्डे पर आने और सुरक्षा जांच से गुज़रने के बाद हर इंसान एक ग्राहक बन जाता है. आप सुरक्षित महसूस करते हैं, तो आप का तनाव कम होता है.
अपना सामान दोबारा लेने के बाद आप एयरपोर्ट के उस हिस्से में प्रवेश करते हैं, जहां दुकानें होती हैं. किसी भी हवाई अड्डे के लिए ये जगह बहुत अहम होती है. यहां आप बैठकर सुस्ता सकते हैं. कॉफ़ी लेकर मन को शांत कर सकते हैं. इसी हिस्से में रेस्टोरेंट से लेकर दुकानें तक होती हैं. मतलब, छोटे-छोटे इशारों में आप के ज़हन को बताया जाता है कि अब हो गई जांच, अब शॉपिंग का वक़्त है. यहां पर हर यात्री मूल्यवान ग्राहक में तब्दील हो जाता है.
हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच के घेरे और गेट के ठीक बीच में शॉपिंग एरिया होता है. यानी हर मुसाफ़िर को इससे गुज़रना ही पड़ता है.
कई हवाई अड्डों पर दुकानों का रास्ता दाहिनी ओर से होकर जाता है, क्योंकि दुनिया में ज़्यादातर इंसान दाहिने हाथ का ज़्यादा इस्तेमाल करने वाले होते हैं.
हवाई अड्डों में ख़रीदारी पर ज़ोर देने की वजह भी है. आप हवाई सफ़र कर सकते हैं, यानी आप की जेब में पैसे हैं. आप के पास इंतज़ार के लिए वक़्त है. आप कहीं जा नहीं सकते. यानी आप बंधक ग्राहक हैं. तो क्यों न आप की जेब से कुछ पैसे निकलवा लिए जाएं?
सुरक्षा जांच से गुज़रने के बाद विमान में सवार होने के बीच का एक घंटा, आपके अच्छे मूड का होता है. तमाम कंपनियां इसका भरपूर फ़ायदा उठाना चाहती हैं.
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प्यूब्ला कहते हैं कि लंदन के गैटविक और हीथ्रो हवाई अड्डों पर तो ये भी बताया जाता है कि अभी आप के पास 25 मिनट या आधे घंटे हैं, सो शॉपिंग कर डालिए.
हाल के दिनों में तो हवाई अड्डों पर ग्राहकों को लुभाने का सिलसिला इतना कामयाब रहा है कि कई एयरपोर्ट तो नई-नई सुविधाएं देने लगे हैं. सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट और दक्षिण कोरिया के इंचियोन हवाई अड्डे पर सिनेमा हॉल हैं. अमरीका के डेनवर हवाई अड्डे पर स्केटिंग रिंक है. स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम के अरलैंडा हवाई अड्डे पर तो शादी के लिए चर्च भी बना दिया गया है.
भविष्य के हवाई अड्डे छोटे-मोटे शहरों जैसे होंगे. जहां आप कुछ घंटों से लेकर कुछ दिन तक बिता सकेंगे.
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