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क्या गप हाँकने से कुछ फ़ायदा भी होता है
- Author, क्रिस्टीन रो
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
यूलिसिस कबाबन के दिमाग़ में कीड़ा कुलबुला रहा था. फिलीपींस के सेबू शहर के रहने वाले यूलिसिस के एक पड़ोसी ने उसे चेतावनी दी थी.
पड़ोसी ने यूलिसिस को आगाह किया था कि पास ही खाने-पीने के सामान का जो ठेला लगता है, वो नल का पानी इस्तेमाल करता है.
फिलीपींस में नल के पानी को ख़तरनाक माना जाता है. ऐसे में उस ठेले वाले या कैरेंडेरिया का खाना यूलिसिस के लिए नुक़सानदेह हो सकता है.
चिका-चका यानी गपशप फिलीपींस के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा है.
लेकिन, एक वीज़ा कंपनी में काम करने वाले यूलिसिस ने ठाना कि वो ख़ुद इस अफ़वाह के बारे में पता लगाएगा.
सो, एक दिन वो हाथ धोने के बहाने उस ठेले वाले के किचन में घुस गया.
उसने देखा कि नल से भरा गया पानी बाल्टियों में रखा है.
जबकि होना ये चाहिए था कि उस ठेले वाले के किचन में मिनरल वाटर स्टेशन से भरे हुए जग रखे होने चाहिए थे.
यूलिसिस ने ये मंज़र देखने के बाद अपनी पत्नी को भी उस ठेले वाले के खाने से होने वाली बीमारियों के ख़तरे के प्रति आगाह किया.
अब यूलिसिस कबाबन का मानना है कि, 'गप की वजह से ही सच्चाई उस तक जल्दी से पहुंच गई.'
अक्सर गप लड़ाने को बुरा माना जाता है. लोग गपबाज़ों को हिकारत भरी नज़रों से देखते हैं. लेकिन छोटे-छोटे समूहों में गप लड़ाना फ़ायदेमंद होता है.
वैसे गपबाज़ी को दो वर्गों में बांटा जाता है. एक तो वो जो हम किसी की ग़ैरमौजूदगी में उसके बारे में अनाप-शनाप बातें करते हैं.
दूसरी गपशप वो होती है, जो सामाजिक विज्ञान की परिभाषा के दायरे में आती है.
गप की परिभाषा क्या है?
सामाजिक विज्ञान के मुताबिक़, गॉसिप किसी ऐसे इंसान के बारे में संवाद है, जो उस बातचीत का हिस्सा नहीं है. जिस शख़्स के बारे में बात हो रही है, उसकी ग़ैरमौजूदगी में कुछ लोग उसके किरदार और बर्ताव के बारे में बातें करते हैं. ये बात अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी.
ये संवाद या बातचीत कई बार अहम जानकारियां साझा करने का ज़रिया होता है.
सामाजिक सहयोग के लिए गप-शप ज़रूरी है. जो लोग आपस में गप्पें लड़ाते हैं, उनके बीच मज़बूत सामाजिक बंधन होता है.
भले ही गप लड़ाने को हिकारत से देखा जाता हो. लेकिन, ज़्यादातर गपबाज़ी नेगेटिव नहीं होती. ये या तो किसी के बारे में अच्छी बात होती है या फिर निरपेक्ष रहती है.
ब्रिटिश सामाजिक जीवन के संवाद पर हुई रिसर्च के मुताबिक़ कुल गप-शप में केवल 3-4 फ़ीसद बातों को बहुत ख़राब पाया गया.
गप लड़ाने पर किया गया शोध
हमें गप-शप और अफ़वाह में भी फ़र्क़ मालूम होना चाहिए. गप अक्सर क़रीबी लोग ही लड़ाया करते हैं.
मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी की जेनिफर कोल कहती हैं कि, 'गॉसिप किसी घटना के बारे में नहीं होती. ये लोगों के बारे में बातें होती हैं.'
अमरीका की बाल्टीमोर यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफ़ेसर सैली फार्ले कहती हैं, 'गप अक्सर सच होती है. तो, अगर कोई जानकारी ग़लत है, तो इसे अफ़वाह माना जाना चाहिए.'
सैली फार्ले मानती हैं कि गप्पें लड़ाने के बहुत से फ़ायदे होते हैं. जैसे कि वो #MeToo आंदोलन का हवाला देती हैं. वो कहती हैं कि महिलाओं ने इसके ज़रिए यौन शोषण पर पलटवार किया और अपनी ताक़त दिखाई.
सैली फार्ले का कहना है कि, 'हम सब को जानकारियों की दरकार होती है. जब हमें ये आधिकारिक माध्यम से नहीं मिलती, तो, हम अनधिकारिक ज़रियों से जानकारी हासिल करते हैं. गपबाज़ी ऐसा ही एक माध्यम है. ये किसी दफ़्तर या समाज के निचले तबक़े के लोगों के बीच संवाद स्थापित करने और जानकारियां साझा करने का अहम ज़रिया होता है.'
अक्सर ये सोचा जाता है कि महिलाएं ज़्यादा गप्पें लड़ाती हैं. लेकिन, किसी भी रिसर्च में ये बात सही नहीं साबित हुई.
हां, महिलाओं और पुरुषों के गप लड़ाने के तरीक़े अलहदा होते हैं. मर्दों के बीच की गप अक्सर अपनी ख़ूबियों का प्रचार करने के लिए होती है. वो इसके लिए एक-दूसरे से जानकारियां साझा करते हैं. एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं.
वहीं, महिलाओं के बीच की गप-शप मनोरंजन के लिए ज़्यादा होती है. किसी के बारे में चर्चा होती है तो बहुत विस्तार से. यानी, ऊपरी तौर पर मर्दों के बीच जानकारियों का लेन-देन कई बार आपको ये झांसा दे सकता है कि वो गप नहीं लड़ा रहे. हालांकि अक्सर वो गप ही हांकते होते हैं.
सेलेब्रिटी के बारे में गॉसिप लड़ाना
सेलेब्रिटी के बारे में गप्पें लड़ाने का अलग ही लुत्फ़ है. असल में उन्हें जो मीडिया कवरेज मिलता है, उससे लोग उनके बारे में गप्पें हांकने में ज़्यादा दिलचस्पी लेते हैं.
इसके अलावा सेलेब्रिटी के बर्ताव के हवाले से लोग अपने किरदार भी उजागर करते हैं.
जैसे कि ताईवान में किन्नर लोग सेलेब्रिटी लोगों की सेक्स लाइफ़ का हवाला देकर अपनी यौन इच्छाओं का इज़हार करते हैं. उसे जायज़ ठहराने की कोशिश करते हैं.
बोस्टन के इमैन्युअल कॉलेज की मीडिया और संचार विभाग की प्रोफ़ेसर एंड्रिया मैक्डॉनेल कहती हैं कि, 'मेरा मानना है कि सेलेब्रिटी गॉसिप के ज़रिए लोग अपने बारे में मुश्किल संवाद कर पाते हैं.
क्योंकि सेलेब्रिटी का हवाला देकर वो अपनी ऐसी जानकारियों को साझा करते हैं, जिन्हें समाज में अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता.'
एंड्रिया कहती हैं कि सेलेब्रिटी गप-शप के बारे में ज़्यादातर लोगों को ये यक़ीन होता है कि मीडिया बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है. कई बार ग़लत ख़बरें भी देता है. फिर भी उन्हें वो गॉसिप पसंद आता है.
हालांकि एंड्रिया का कहना ये है कि जब गप-शप पत्रकारिता का अहम हिस्सा बन जाए, तो ये ग़लत ही नहीं, ख़तरनाक भी हो जाता है. मीडिया के सामने भरोसे का संकट खड़ा हो जाता है.
खुसर-फुसर वाला अभियान
जो लोग समाज के निचले तबक़े से ताल्लुक़ रखते हैं. जिनके पास ताक़त नहीं होती, वो अक्सर गप-शप से जानकारियां साझा करते हैं. ख़ुद को सशक्त महसूस करते हैं.
इसके फ़ायदे भी हो सकते हैं. किसी दफ़्तर में महिलाएं गप-शप के ज़रिए किसी यौन शोषण के प्रति एक-दूसरे को आगाह कर सकती हैं. लेकिन, कई बार कोरी गप करके किसी के किरदार पर कीचड़ उछालने का काम भी होता है.
लेकिन, इसमें कई बार दिक़्क़त ये आती है कि लोग आंखों-देखी से ज़्यादा सुनी-सुनाई बातों पर यक़ीन करते हैं.
जैसे कि, फ़ेसबुक पर अगर आप के जानने वाले लोगों ने कोई पोस्ट शेयर की है, तो आप उस पर भरोसा करते हैं. वजह ये कि जिस ने ये पोस्ट शेयर की है, वो आप के भरोसे का इंसान होता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर अफ़वाहें तेज़ी से फैलती हैं.
हालांकि झूठी गप-शप अक्सर ज़्यादा दिनों तक नहीं चल पाती है. इसका सफ़र बहुत छोटा होता है. गप्पें लड़ाने वालों की नीयत में खोट अक्सर पकड़ में आ जाता है. स्वार्थी लोग जो गप्पें फैलाते हैं, उस पर लोग कम ही भरोसा करते हैं.
सैली फार्ले कहती हैं कि, 'समझदार लोग उन लोगों की नीयत का खोट पकड़ लेते हैं, जो अक्सर दूसरों के बारे में बुरी बातें ही करते रहते हैं. और एक बार उनका भरोसा टूटा, तो फिर गप्पबाज़ उसे दोबारा नहीं जीत पाते. और चूंकि वो जो जानकारी देते हैं, वो नकारात्मक होती हैं, सो ऐसी कचरा गप-शप पर लोग ध्यान नहीं देते. जो लोग कम गप्पें लड़ाते हैं, उन पर साथी ज़्यादा भरोसा करते हैं.'
हालांकि बुरे गॉसिप को फैलने से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता. बच्चा चोरी गैंग की अफ़वाह, मंकी मैन की अफ़वाह और कच्छा-बनियान गिरोह को लेकर होने वाले गॉसिप इस बात की मिसाल हैं. कई बार तो लोग ऐसी गप्पबाज़ी के चलते मार दिए जाते हैं. अफ्रीकी देशों से लेकर हमारे यहां झारखंड तक महिलाओं को चुड़ैल बताकर मार दिए जाने की घटनाएं हुई हैं. ये नकारात्मक गॉसिप का ही नतीजा था.
इन बातों के इतर, गप-शप अक्सर जानकारियां साझा करने का ज़रिया होती है. समाज में बराबरी लाने में मददगार होती है. अचानक अमीर या ताक़तवर बने लोग अक्सर गप्पों का केंद्र बन जाते हैं. ऐसे लोग अपने से जुड़ी सही जानकारी देकर, ख़ुद को अटकलों की मार से बचा सकते हैं.
गॉसिप कई बार आप को सामाजिक लांछन से भी बचाता है. कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी की बियांका डाह्ल बोत्सवाना के लोगों की मिसाल देती हैं. वो कहती हैं कि एचआईवी पीड़ित लोगों के बारे में अगर नेगेटिव बातें नहीं होतीं, तो उनसे जुड़े गॉसिप, बाक़ी लोगों को इस मर्ज़ से दूर रखने में मददगार होता है.
गपशप का फायदा
जेनिफर कोल गप-शप के फ़ायदे लेने के लिए चार सिद्धांत बताती हैं. गॉसिप को सीक्रेट रखा जाए. इसका सही इस्तेमाल किया जाए. झूठ न बोला जाए. सुनने वालों से संपर्क साधा जाए. आप गुमनाम रहने के बजाय खुल कर बातें करें, तो और भी अच्छा.
गप-शप ख़तरनाक भी हो सकती है और आप को अलग-थलग भी कर सकती है. मगर, आप इससे बच नहीं सकते. हां, समझदारी से इसका सही इस्तेमाल कर सकते हैं. गॉसिप कर के लोगों को क्या हासिल होता है. इस सवाल का जवाब तलाश लें, तो इसके ख़तरों से बचा जा सकता है.
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