क्या अधिक पैसा होने पर ज़्यादा जीते हैं लोग

बुज़ुर्ग आदमी
    • Author, अमांडा रगेरी
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

पिछले कुछ दशकों में पूरी दुनिया में लोगों की औसत उम्र बड़ी तेज़ी से बढ़ी है. 1960 के दशक में पैदा होने वाले लोग औसतन 52.5 साल जीते थे. आज ये औसत 72 साल है.

ब्रिटेन में काफ़ी पहले से आबादी के जन्म और मौत के रिकॉर्ड रखे जाते रहे हैं. 1841 में पैदा हुई किसी बच्ची के केवल 42 साल की उम्र तक जीने की उम्मीद की जाती थी. वहीं किसी लड़के की औसत उम्र उससे भी कम यानी 40 बरस हुआ करती थी.

2016 में पैदा हुई किसी बच्ची के औसतन 83 साल और लड़के के औसतन 79 साल जीने की उम्मीद की जाती है.

माना जाता है कि मेडिकल साइंस की तरक़्क़ी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने इंसान की औसत आयु बढ़ाई है.

पर, शायद हम तरक़्क़ी के उस पायदान पर पहुंच गए हैं, जहां साइंस और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करके भी इंसान की उम्र नहीं बढ़ाई जा सकती. सितंबर 2018 में जारी हुए ब्रिटेन के आंकड़े तो यही कहानी कहते हैं.

इनके मुताबिक़, ब्रिटेन में लोगों की औसत उम्र बढ़ने का सिलसिला थम गया है. वहीं, बाक़ी दुनिया में औसत आयु बढ़ने की रफ़्तार धीमी हो गई है.

रोमन सम्राट ऑगस्टस

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इमेज कैप्शन, रोमन सम्राट ऑगस्टस की 75 साल की उम्र में मौत हुई थी

मेडिकल सुविधाओं से नहीं बढ़ी उम्र

माना जाने लगा है कि इंसान अपनी उम्र के मामले में सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है. इस सोच से कुछ ग़लतफ़हमियों को भी बल मिलता है. माना जाता है कि अगर प्राचीन काल के यूनानी या रोमन लोग इंसान को 50-60 साल से ज़्यादा बरस तक जीते देखते, तो अचरज में पड़ जाते.

हमारा ये सोचना कि मेडिकल सुविधाओं की वजह से इंसान की उम्र बढ़ गई है, ग़लत है. आज औसत आयु इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इंसान विकास की धारा में बहता हुआ यहां तक आ पहुंचा है.

स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के इतिहासकार वॉल्टर शीडेल कहते हैं, "औसत आयु बढ़ने और उम्र बढ़ने में बहुत फ़र्क़ है. लोगों की उम्र की बात करें, तो उस में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं आया है."

औसत आयु एक औसत है. अगर किसी के दो बच्चे हैं. उनमें से एक की मौत हो जाती है और दूसरा बच्चा 70 साल तक जीता है, तो औसत उम्र 35 बरस होती है.

गणित के लिहाज़ से ये सही है. ये किसी बच्चे की परवरिश के तौर-तरीक़े के बारे में भी बताता है. मगर ये पूरी तस्वीर नहीं बताता.

हमें याद रखना होगा कि इंसान के इतिहास के ज़्यादातर हिस्से में नवजातों की मौत की दर बहुत ज़्यादा रही है. आज भी कई देशों में बच्चे पैदा होते ही मर जाते हैं.

औसत उम्र निकालने से कई बार ऐसे संकेत मिलते हैं कि लोग कम उम्र ही जीते थे. जैसे पुराने ज़माने में रोमन या यूनानी साम्राज्य में रहने वालों की औसत उम्र 30-35 बरस बताई गई थी.

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सुइको

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इमेज कैप्शन, छठवीं शताब्दी की महारानी सुइको की 74 वर्ष की आयु में मौत हुई थी

मगर इस बात में कितनी सच्चाई है?

अगर हम बहुत ज़्यादा बुढ़ापे की बात करें, तो ईसा से सात सदी पहले के यूनानी कवि हेसियोड ने लिखा था, "आप को 30 साल से बहुत कम उम्र में ब्याह नहीं करना चाहिए."

पुराने रोमन साम्राज्य की ब्यूरोक्रेसी 'करसस होनोरम' जो सबसे छोटा पद था, उस पर कोई 30 साल से कम उम्र का आदमी नहीं बहाल किया जा सकता था. बाद में रोमन सम्राट ऑगस्टस ने ये उम्र घटाकर 25 साल कर दी थी.

ख़ुद ऑगस्टस की मौत 75 बरस की अवस्था में हुई. रोमन साम्राज्य का दूत बनने की शर्तों में से एक थी उम्मीदवार का 43 बरस का होना. जबकि आज अमरीकी राष्ट्रपति बनने की न्यूनतम उम्र 35 साल है.

रोमन भूगोलविद् प्लिनी ने पहली सदी में लिखी अपनी किताब में ऐसे लोगों की फ़ेहरिस्त बनाई थी, जिन्होंने लंबी उम्र जी. इनमें से एक थे कॉन्सुल वैलेरियस कॉर्विनस थे, जो 100 साल जिए.

सिसेरो की पत्नी टेरेंशिया 103 बरस और क्लोडिया नाम की दूसरी महिला तो 115 साल जीती रही. प्लिनी की किताब में लुकेचिया नाम की अदाकारा का भी ज़िक्र मिलता है, जिसने 100 साल की उम्र में स्टेज परफ़ॉर्मेंस दी थी.

मिस्र के शहर अल सिकंदरिया में एक क़ब्र मिलती है, जो ईसा से 3 सदी पहले की एक महिला की. उसके बारे में लिखा है कि 80 साल की उम्र में भी उसके हाथ कांपते नहीं थे. वो शानदार कशीदाकारी करती थी.

वैसे प्लिनी ने बुढ़ापे को इंसान की ज़िंदगी का सबसे बुरा वक़्त बताया है. प्लिनी ने लिखा है, "इंसान को जो सबसे बड़ी क़ुदरती नेमत मिली है, वो है कम उम्र में मर जाने की. ज़्यादा उम्र तक जीने पर पैर अकड़ जाते हैं. हाथ हिलते नहीं. दिखाई-सुनाई नहीं देता. दांत टूट जाते हैं. पेट कमज़ोर होने की वजह से खाना नहीं पचता. यानी इंसान के मरने से पहले उसके जिस्म का एक-एक अंग मर चुका होता है."

प्लिनी की नज़र में सिर्फ़ एक शख़्स ऐसा गुज़रा था, जो 105 साल की उम्र में भी चपल था.

साम्राज्यवाद के दौर की बात करें, तो भी उम्र के ऐसे उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं.

1994 में एक रिसर्च हुई थी. जिसमें ऑक्सफ़ोर्ड क्लासिकल डिक्शनरी में दर्ज ऐतिहासिक लोगों की उम्र की पड़ताल की गई. इनकी तुलना हालिया चैम्बर्स बायोग्राफिकल डिक्शनरी में दर्ज लोगों के नामों से की गई.

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रोमन सम्राट तिबेरियस

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इमेज कैप्शन, रोमन सम्राट तिबेरियस 77 साल तक जिए और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि उनकी हत्या हुई थी

जब टीबी थी भयंकर बीमारी

ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में दर्ज 397 लोगों में से 99 की मौत हिंसा यानी क़त्ल, ख़ुदकुशी या जंग के मैदान में लड़ने की वजह से हुई. ईसा से 100 साल पहले पैदा हुए बाक़ी के 298 लोगों की औसत उम्र 72 साल आंकी गई. जबकि इसके बाद के दौर में पैदा हुए लोगों की औसत उम्र 66 बरस ही देखी गई. इसकी वजह सीसे से फैलने वाले ज़हरीले केमिकल को माना गया.

जो लोग 1850 से 1949 के बीच जिए, उनकी औसत आयु 71 साल निकाली गई.

अब ईसा से एक सदी पहले पैदा हुए लोगों और आधुनिक युग में जीने वालों में कोई ख़ास फ़र्क़ तो नहीं है!

वैसे इस सैंपल में महिलाएं नहीं थीं. ऐसे लोग थे, जो समाज के क्रीमी लेयर का हिस्सा थे. यानी उनके पास ज़िंदगी बसर करने के बेहतर साधन थे.

शीडेल कहते हैं कि इस रिसर्च को पूरी तरह से नहीं ख़ारिज किया जा सकता है.

इटली की ला सैपिएंज़ा यूनिवर्सिटी की वैलेंटिना गज़ानिगा कहती हैं कि उस दौर में भी अमीर और ग़रीब के बीच गहरी खाई थी.

2016 में वैलेंटिना ने अपनी एक रिसर्च प्रकाशित की थी. इसमें उन्होंने प्राचीन रोमन साम्राज्य के 2000 से ज़्यादा कंकालों की पड़ताल की रिपोर्ट जुटाई थी. इन कंकालों की औसत उम्र 30 साल थी. यानी उस दौर के ये लोग उम्र के तीसरे दशक में ही मर गए थे. बहुत से लोग मेहनत-मज़दूरी के बोझ से मरे, तो कई बीमारी के शिकार भी हुए.

उस दौर में मर्दों को जंग से लेकर मेहनत-मज़दूरी तक, अपने शरीर पर तमाम तरह के ज़ुल्म बर्दाश्त करने पड़ते थे. लेकिन, महिलाओं की हालत कोई अच्छी नहीं थी. तब भी महिलाएं खेतों में काम करती थीं. घर के काम तो वो करती ही थीं.

इसके अलावा जचगी के दौरान बहुत सी महिलाओं की मौत हो जाती थी. गर्भधारण करना ही बहुत बड़ी चुनौती होती है. महिला को अपनी कोख में एक और ज़िंदगी को पालना पड़ता है. इससे बीमारियों से लड़ने की महिलाओं की क्षमता पर असर पड़ता है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की इतिहासकार जेन हम्फ्रिस कहती हैं, "गर्भवती होने पर आपका इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है. फिर आप को दूसरी बीमारियां होने का डर होता है. अगर कोई गर्भवती महिला टीबी की शिकार हो जाए, तो उसे इस बीमारी से लड़ने में बहुत मुश्किल होती है. पुराने ज़माने में टीबी भयानक बीमारी हुआ करती थी."

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वैलेंटिना कहती हैं कि पुराने ज़माने में महिलाओं को मर्दों के मुक़ाबले कम खाना मिलता था. पौष्टिक खाना तो और भी कम मिलता था. नतीजा ये होता था कि लड़कियों का ठीक से विकास नहीं हो पाता था. बच्चे पैदा करते वक़्त उनकी मौत हो जाती थी.

पुराने दौर के लोगों की उम्र से जुड़े आंकड़े न होने से उस दौर की जनसंख्या की उम्र की सही-सही गणना मुश्किल होती है.

उस दौर के लोगों के बारे में जानकारी टैक्स के दस्तावेज़ों, क़ब्र पर लिखे शिलालेखों से हासिल की जाती है. ऐसे आंकड़ों में उन नवजात बच्चों का ज़िक्र नहीं होता, जो पैदा होते ही मर गए.

शीडेल कहते हैं कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए ठोस आंकड़ों की ज़रूरत होती है.

कुल मिलाकर ये कहें कि रोमन साम्राज्य में आबादी की हालत आज के दौर जैसी ही थी. बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं था. औसत आयु में थोड़ा-बहुत ही अंतर था. हम ये नहीं कह सकते कि औसत आयु में बहुत फ़ासला था.

हां, नवजातों और गर्भवती महिलाओं के लिए पहले के मुक़ाबले आज हालात बेहतर हैं.

जैसे-जैसे हमारे पास आबादी की सेहत, उम्र और दूसरे आंकड़े जमा होने लगे, तैसे-तैसे हमें किसी नतीजे पर पहुंचने में आसानी होने लगी.

पिछली एक सदी से ज़्यादा वक़्त के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों की मौत की दर पिछली सदी में बहुत ज़्यादा थी. लेकिन अगर कोई इंसान 21 बरस की उम्र तक पहुंच गया, तो उसके आज के लोगों के बराबर ही जीने की उम्मीद थी. सन 1200 से लेकर 1745 तक 21 बरस की उम्र तक पहुंचने वाला इंसान 62 से 70 साल तक जीता था. इसका अपवाद केवल 14वीं सदी थी, जब प्लेग की वजह से इंसानों की औसत उम्र 45 बरस ही रह गई थी.

महारानी विक्टोरिया

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इमेज कैप्शन, ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की 1901 में 81 वर्ष की आयु में मौत हुई थी

पैसा होने पर ज़्यादा उम्र तक जीते हैं लोग?

इस सवाल का जवाब हमेशा हां में हो ये ज़रूरी नहीं. मध्य युग के एक लाख 15 हज़ार यूरोपीय लोगों की उम्र के आंकड़े बताते हैं कि वो अपने राजा या सामंतों से छह साल ज़्यादा जीते थे.

17वीं सदी में इंग्लैंड में सामंती तबक़े के लोगों से ज़्यादा उम्र गांव में रहने वालों की हुआ करती थी.

रईस लोग तमाम संसाधन होने के बावजूद इसलिए कम उम्र ही जीते थे, क्योंकि 18वीं सदी तक के शहरों में गंदगियों और बीमारियों का जमावड़ा था. नतीजा ये होता था कि वो बीमारियों के शिकार होते थे.

जब सेहत और मेडिकल सुविधाओं में इंक़लाबी सुधार आया, तो इसका फ़ायदा सबसे पहले अमीरों को ही हुआ.

औद्योगिक क्रांति से पैदा हुए प्रदूषण से लड़ाई में इंसान ने जीत हासिल की, तो यूरोपीय रईसों की औसत उम्र सबसे पहले बढ़ी.

ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के युग में अगर आप बचपन की मुश्किलों से जीत गए, तो महिलाएं 73 साल और पुरुष 75 साल तक जी जाते थे.

आज भी कामकाजी तबक़े के लोगों की औसत आयु 72 साल और महिलाओं की 76 साल निकाली जाती है. यानी ये मानना कि हम अपने पुरखों के मुक़ाबले ज़्यादा जीते हैं, ग़लत होगा.

आदिम काल में झांकें, जब के कोई आंकड़े हमारे पास नहीं हैं, तो उस वक़्त इंसान कितने बरस जीता होगा?

माना जाता है कि आदि मानव अगर तमाम मुसीबतों से पार पा गया, तो उसकी औसत उम्र 51 से 58 साल होती रही होगी. हालांकि एक और रिसर्च ये कहता है कि आदि मानव की औसत उम्र 30 से 37 साल रहती होगी. वहीं, महिलाएं अगर 45 साल तक जीती रह गईं, तो उनके 65 से 67 साल तक जीने की उम्मीद जग जाती थी.

ऑस्ट्रेलिया के एंथ्रोपोलॉजिस्ट क्रिस्टीन केव और मार्क ओक्सेनहैम ने 1500 साल पुराने कंकालों से निष्कर्ष निकाला कि ज़्यादातर लोग 65 साल तक जिए थे. हालांकि, इनमें से 16 लोग ऐसे भी थे जो 65 से 74 साल तक जिए. वहीं, नौ ने तो 75 की उम्र भी पार की थी.

तो, कुल मिलाकर ये कहना ठीक रहेगा कि हमारी अधिकतम उम्र में प्राचीन काल से लेकर आज तक कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है.

मेडिकल साइंस की तरक़्क़ी और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी ने ये सुनिश्चित किया है कि हम में से ज़्यादा लोग इस उम्र तक पहुंच पाते हैं.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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