मिर्च कितनी तीखी है ये कैसे बताएंगे आप?

मिर्च, पैमाने, असम, स्कॉटलैंड

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    • Author, एड्रीयन बर्नहार्ड
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

असम की भुत-जोलोकिया ज़्यादा तीखी मिर्च है या स्कॉटलैंड की बॉनेट? या फिर दक्षिण-पूर्वी एशिया की बर्ड्स आई मिर्च सबसे ज़्यादा तीखी है?

हीरा, क्वार्ट्ज़ से कितना ज़्यादा सख़्त है? फटाक से करना ज़्यादा तेज़ होता है, या फिर एक झटके में करना तेज़ होता है?

नाप-तौल करने वाले पैमाने हमारे लिए बहुत मददगार होते हैं. जैसे मीटर या गज, किलोग्राम या पाउंड..फुट, इंच, सेंटीमीटर, मील, कोस, मिनट, घंटे, सेकेंड, साल, महीने, सदी...आदि.

हर चीज़ को नापने का अपना अलग पैमाना है. हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अक्सर इनका इस्तेमाल करते हैं.

लेकिन कुछ चीज़ों को नापने के पैमाने ही नहीं होते. जैसे, मिर्च के तीखेपन को कैसे नापें?

अगर आपकी गर्लफ्रेंड या ब्वॉयफ्रेंड ये पूछें कि तुम मुझे कितना प्यार करते हो? तो, आप नापकर कैसे बताएंगे?

समंदर की हवा, हीरे की सख़्ती, मिर्च का तीखापन या मोहब्बत की गहराई- ये सब नापने के पैमाने अलग ही तरह के होते हैं.

जैसे कि अमरीका में एक ज़माने में MCI यानी मदर काऊ इनडेक्स चला करता था. इसे लोग ज़मीन की ख़रीद-फ़रोख़्त में इस्तेमाल किया करते थे. इससे अंदाज़ा लगाया जाता था कि किसी ज़मीन पर कितनी गर्भवती गाएं पल सकती हैं.

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अंदाज़ों पर बने पैमाने

अक्सर ऐसे पैमाने अंदाज़े की बिनाह पर बनाए जाते हैं. जैसे कि दर्द को नापने के लिए डॉक्टर कुछ लक्षण पूछते हैं. इससे से वो अंदाज़ा लगाते हैं कि आप को कितना दर्द हो रहा है और वो उसी हिसाब से दवा देते हैं.

इसी तरह मौसम के बनने-बिगड़ने को ब्यूफ़ोर्ट स्केल से नापा जाता है. ये भी अंदाज़े का ही काम है.

तारीख़ें हमें दिन, वक़्त, साल और युग बदलने के बारे में बताती हैं. तो दिशा के ज़रिए हम उत्तर-दक्षिण या पूर्व-पश्चिम को समझ पाते हैं.

ऐसे पैमाने बनाना आसान होता है. क्योंकि कुछ चीज़ें पहले से तय हैं. जैसे साल में 365 दिन होते हैं या दूरी नापने के लिए किलोमीटर पैमाना है.

चाय में एक चम्मच चीनी डालनी है या दो चम्मच, लेक्चर एक घंटे चलेगा या फिर ज़्यादा, ये सब आसानी से नाप लिया जाता है. क्योंकि इन्हें नापने के पैमाने तय हैं.

इनके मुक़ाबले गुण नापने वाले पैमाने सटीक नहीं होते. क्योंकि उनकी बुनियाद अंदाज़ होती है. ठीक वैसे ही जैसे कि हम अपने दुनियावी तजुर्बे के बल पर बताते हैं कि मिर्च ज़्यादा तीखी है या कम.

नापने का ये तरीका या पैमाना पूरी तरह से इंसानी है.

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ब्रिटेन की रॉयल नेवी के रियर एडमिरल सर फ्रांसिस ब्यूफ़ोर्ट को ही लीजिए. साल 1805 में वो समुद्री हवाओं के रुख़ को सटीक तरीक़े से नापना चाहते थे. इसलिए वो रोज़ाना अपने जहाज़ पर खड़े होकर हवा की रफ़्तार और समुद्री हालात को अपनी डायरी में नोट करते थे. जैसे कि बहुत तेज़ हवाएं, या डराने वाला सन्नाटा.

उनकी इस रिसर्च के आधार पर ही समुद्र के हालात को नापने का पैमाना ब्यूफ़ोर्ट स्केल बना. इसमें अगर ज़ीरो है, तो मौसम एकदम साफ़ है. वहीं 12 का मतलब है भयानक लहरें, और तूफ़ानी हवाएं, जिसमें दिखना भी बंद हो जाता है.

इनके बीच में हल्की सर्द हवा, गलाने वाली हवा, जैसी और भी स्थितियां हैं जिन्हें ब्यूफोर्ट स्केल से नापा जाता है.

मोटा-मोटी ये गुणात्मक पैमाने दो तरह के होते हैं. जैसे रिक्टर स्केल. जिसमें 1 से लेकर 10 तक के अंक तक ज़लज़ले को नापा जाता है. रिक्टर स्केल पर 3 का झटका, ज़्यादा ख़तरनाक भूकंप नहीं है.

किसी रेस्टोरेंट में खाने के तजुर्बे को तसल्लीबख़्श या ख़ुश करने वाला बताकर हम इसकी तादाद को गुणक में नहीं बताते. बल्कि ये सिर्फ़ अंदाज़ से उस रेस्टोरेंट को अच्छा या बहुत अच्छा बताते हैं.

ब्रिटेन की नेशनल फ़िज़िकल लैबोरेटरी के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट एंड्र्यू हैनसन कहते हैं, "हम कुछ चीज़ों को नाप सकते हैं और कुछ को नहीं. जिन्हें हम नाप सकते हैं, उन्हें भी एक हद तक ही नाप पाते हैं."

एंड्र्यू हैनसन रंग और रोशनी को नापने के तरीकों पर रिसर्च करते हैं. वो कहते हैं कि हर इंसान को कोई रंग अलग तरह से दिखता है. किसी के लिए बैंगनी चटख रंग है, तो किसी के लिए वो हल्का रंग है.

हैनसन कहते हैं, "किसी भी पैमाने की कामयाबी के लिए ज़रूरी है कि हम सब उस पैमाने से सहमत हों."

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नापने के अलग-अलग तरीके

अक्सर ऐसे पैमानों पर तमाम देशों के बीच रज़ामंदी बन ही जाती है. जैसे कि स्कोविल स्केल. ये पैमाना अमरीकी फार्मासिस्ट विल्बर स्कोविल के नाम पर बना है.

इसके ज़रिए मिर्चियों का तीखापन बताया जाता है. लेकिन, इसे मिर्चों में मौजूद कैप्सैसिन के आधार पर नहीं तय करते बल्कि किसी तीखेपन को कम करने के तरीक़े से तय करते हैं.

चकरा गए न!

मिर्च का तीखापन कम करने के लिए उसे हल्का किया जाता है. जैसे कि हाबानेरो मिर्च का तीखापन घटाने के लिए इसे 3500 से 8000 गुना हल्का किया जाना चाहिए. वहीं, किसी आम मिर्च के लिए ऐसा करने की ज़रूरत ही नहीं.

इसी पैमाने के आधार पर आज कैरोलाइना रीपर और ड्रैगन्स ब्रेथ नाम की दो मिर्च दुनिया की सबसे तीखी मिर्च मानी जाती हैं. क्योंकि ये स्कोविल हीट यूनिट यानी SHU के पैमाने पर 30 लाख बैठती हैं.

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अब तीखे खाने पर इतनी बात हो गई है, तो कुछ ठंडा भी पीने की बात भी होनी चाहिए. हर रेस्टोरेंट में अलग-एलग तरह के गिलास होते हैं. किसी में ज़्यादा ड्रिंक परोसी जाती है, तो किसी में कम. जाम कितना बड़ा या छोटा होगा, ये मानने और बनाने वाले पर है.

इसीलिए शराब पीने के लिए शॉट, पिंट और प्रूफ़ जैसे पैमाने बनाए गए हैं. अगर शराब ज़्यादा तेज़ है, तो शॉट में नापी जाएगी. यानी कम ही पी जाएगी. हल्की है तो ड्रिंक के तौर पर देखी जाएगी.

वैज्ञानिक लॉर्ड केल्विन ने कहा था, "हम कुछ चीज़ों को अंकों में नहीं नाप सकते. उन्हें नापने के लिए गुणात्मक पैमानों की ज़रूरत होती है."

इसीलिए गड्ढे की गहराई बताने के लिए कहते हैं कि इतना बड़ा गड्ढा है की पूरी बस समा जाए. इसी तरह ख़ूबसूरती को किसी बेहद ख़ूबसूरत शख़्स को बुनियाद बनाकर नापा जाता है.

एंड्र्यू हैनसन कहते हैं, "नापने का मतलब है किसी जानी हुई चीज़ से अनजानी चीज़ की तुलना."

सही नाप से हम बर्बादी रोकते हैं और वैज्ञानिक समझ बेहतर करते हैं. स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ऐसे पैमाने इस्तेमाल कर के हम ज़िंदगी का स्तर बेहतर करते हैं.

हो सकता है कि आगे चलकर हम ख़ुशी या दर्द को भी अंकों में ज़ाहिर कर सकें.

फिलहाल तो बिजली गिरने, या अंधेरे में सरगोशी को किसी पैमाने में नहीं नापा जा सकता.

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(नोटः ये एड्रीयन बर्नहार्ड की मूल कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी के पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं)

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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