पृथ्वी को बचाने में बहुत मददगार साबित होंगे ये 'सुपर प्लांट'

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- Author, सोफ़िया स्मिथ गेलर
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
पेड़-पौधों का इस्तेमाल हमारी ज़िंदगी के कमोबेश हर काम में होता है. उनके बग़ैर ज़िंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
हम इन्हें खाते हैं, पहनते-ओढ़ते हैं, और घर बनाने में इस्तेमाल करते हैं. बीमारियों के इलाज से लेकर घर सजाने और तोहफ़े देने के लिए भी इन्हें इस्तेमाल करते हैं.
लेकिन, वैज्ञानिक मानते हैं कि हम अभी भी पेड़-पौधों का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. ब्रिटेन के कीव स्थिन बॉटैनिकल गार्डन्स में रिसर्चर पौधों की ऐसी ख़ूबियों का पता लगा रहे हैं, जिनसे इंसान की ज़िंदगी और बेहतर हो सके.
अब पौधों की मदद से सूखे, बाढ़ और जंगल की आग से निपटने की कोशिश की जा रही है. यही नहीं, लोगों को भुखमरी से बचाने के लिए और पानी की किल्लत से पार पाने के लिए भी वैज्ञानिक 'मसीहा पौधों' की तलाश कर रहे हैं.
बहुत काम आ सकते हैं कुछ खास पौधे
इंसान आज हज़ारों तरह के पेड़-पौधों की खेती करता है. ये खाने में इस्तेमाल होते हैं. कपड़े बनाने में इस्तेमाल होते हैं. घर बनाने में काम आते हैं.
मगर, जो पौधे हम उगाते हैं, उनके कई भाई-बंधु और रिश्तेदार जंगलों में होते हैं. उनकी कई और ख़ूबियां होती हैं, जो इंसान के काम आ सकती हैं.

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कीव का बॉटैनिकल गार्डन्स 'क्रॉप वाइल्ड रिलेटिव्स' मिशन के ज़रिए ऐसे पौधे तलाश रहा है जिनके रिश्तेदारों की हम खेती करते हैं. ये जंगली नस्लें, कीड़ों, बीमारियों और पानी की कमी के हिसाब से ख़ुद को ढाल चुके हैं. ये धरती की बदलती आबो-हवा के हिसाब से भी अपने-आप को बदल चुके हैं. इसीलिए इनकी तमाम ख़ूबियां हमारे काम आ सकती हैं.
वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं कि मुसीबतों से लड़ने की इनकी ख़ूबियों को इनके उन रिश्तेदार पौधों में डाला जाए, जिनका उत्पादन हम खेती के ज़रिए करते हैं.
पौधों का बीमारियों से लड़ने में इस्तेमाल न जाने कब से हो रहा है. मगर दिक़्क़त ये है कि हम मर्ज़ के इलाज में काम आने वाले नए पौधे नहीं तलाश रहे हैं. साथ ही जो पौधे लंबे वक़्त से इस्तेमाल हो रहे हैं, उनके नाम भी हम भूलते जा रहे हैं.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, आज की तारीख़ में 28 हज़ार पौधों का इलाज में इस्तेमाल होता है. लेकिन इन पौधों में से 16 फ़ीसद का ही ज़िक्र दवाओं और पर्चों में होता है.
पौधों पर आधारित दवाओं का दुनिया भर मे क़ारोबार क़रीब 83 अरब डॉलर का है. दुनिया भर में क़ुदरती तरीके से इलाज की तकनीक दिनो-दिन लोकप्रिय हो रही है. जर्मनी में 90 फ़ीसद लोग पौधों पर आधारित दवाएं इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि लहसुन और लौंग वगैरह.
दिक़्क़त ये है कि ऐसी दवाओं के नाम पर धोखाधड़ी बहुत होती है. बहुत सी कंपनियां जड़ी-बूटियों के नाम पर लोगों को बेवक़ूफ़ बनाती हैं.
चीन में इस दिशा में कड़ाई से काम हो रहा है. चीन की सरकार ने तय किया है कि 2020 तक अपने हेल्थकेयर सिस्टम में वो देसी दवाओं को ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करेंगे. चीन ने दवाओं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों के नाम ज़ाहिर करने को लेकर कुछ सख़्त दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं.
चमत्कारी हैं कुछ पौधे
पौधों की कुछ ऐसी जंगली क़िस्में हैं, जो हमारे लिए चमत्कार का काम कर सकती हैं. ऐसा ही एक पौधा होता है एन्सेट. ये अफ्रीकी देश इथियोपिया में होता है. इथियोपिया के लोग इसे दो सौ नामों से बुलाते हैं. वो इसे खाते हैं. इससे दवाएं और चटाई बनाते हैं. घर बनाने में इस्तेमाल करते हैं. जानवरों के लिए चारे के तौर पर प्रयोग करते हैं. एन्सेट से कपड़े भी बनते हैं.

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एन्सेट, केले के परिवार का जंगली सदस्य है. वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं कि इस पौधे को दूसरे देशों में उगाया जा सके. क्योंकि इसकी मदद से ज़्यादा लोगों का पेट भरा जा सकता है. एन्सेट से आटा बनता है. सूप बनता है. इसे आलू की तरह उबालकर भी खाया जाता है.
एन्सेट की ख़ूबी यहीं तक नहीं है. ये पौधा, सूखे में, बाढ़ में और तूफ़ान में भी ख़ुद को बचा लेता है.
कीव के बॉटेनिकल गार्डेन में कुछ ऐसे पौधे तलाशे जा रहे हैं, जो आग में जलते कम हैं. ऐसे पौधों की मदद से जंगल में भड़कने वाली आग पर क़ाबू पाया जा सकता है.
यानी वैज्ञानिक ऐसे जादुई पेड़-पौधों की तलाश में हैं, जो हमारी हर ज़रूरत को पूरा करें. हमारी हर मुश्किल को दूर करें. हमारी हर चुनौती का सामना करें. ये पौधे पृथ्वी को बचाने में बहुत मददगार होंगे.
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