महानगरों की डिज़ाइन में बच्चों की सुविधाओं का ध्यान क्यों नहीं

इमेज स्रोत, Empics
- Author, क्रिस्टीन रो
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़
महानगरों के निर्माण के लिए काम करने वाले स्थानीय अधिकारी अक़्सर शहरों के डिज़ाइन के बारे में निर्णय लेते समय खुले हाथ से पैसे खर्च करने वाले वयस्कों की ज़रूरतों का जितना ध्यान रखते वैसी प्राथमिकता परिवारों को नहीं दे पाते.
42 वर्षिय जेनिफ़र वीडॉन पलाज़ो अमरीका के मेसेच्यूसेट्स राज्य के एक एक गांव में रहती हैं. जेनिफ़र वीडॉन पलाज़ो ने मांओं के रोज़मर्रा के अनुभवों पर आधारित कॉमेडी वीडियो की एक वेबसाइट बनाई है जिसका नाम है मॉम केव.
बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत के दौरान बीच में ही उनकी चार साल की बेटी उनसे पीनट बटर और जेली सैडवीच की मांग करती है.
वो कहती हैं, "ग्रामीण इलाके मुझे ख़ास पसंद नहीं थे. मैं सोचती थी मैं जीवन भर शहर में ही रहूंगी."
पलाज़ो अपने पति ईवान के साथ लगभग 15 वर्षों तक न्यूयॉर्क शहर में एक ऐसे मकान में रहीं जहां किराए एक निश्चित समय तक के लिए नियंत्रित होते हैं यानी उन्हें एक निश्चित समय तक बढ़ाया नहीं जा सकता.
हालांकि उनका घर केवल एक बेडरूम का था. उस बेडरूम में वो अपने पति ओर बेटे के साथ रहती थीं.
बेटे का बेड उनके बेड से केवल एक फ़ुट दूर होता था. लेकिन जेनिफ़र वीडॉन पलाज़ो ने तय कर रखा था कि वो मैनहटन में ही रहेंगी क्योंकि एक अभिनेत्री और मॉडल होने के चलते उन्हें शहर में ही काम के अवसर मिल सकते थे.
लेकिन फ़िर किराए पर नियंत्रण की मियाद ख़त्म हो गयी और किराया बढ़ने के बाद शहर में रहना उनके परिवार के लिए आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक नहीं रहा.

इमेज स्रोत, Brandalyn Bickner
उपनगरों में घर लेने का चलन
ना कि किराया तीन गुना बढ़ गया बल्कि गाड़ी पार्क करने की स्थायी जगह भी चली गई. अब कई बार सड़क पर पार्किंग ढूंढने में दो घंटे तक लगने लगे.
बेटे को कहीं लाने ले जाने के लिए गाड़ी ज़रूरी थी. उस समय वो अपने अगले बच्चे को जन्म देने के बारे में भी सोच रहे थे और जगह की कमी चिंता का विषय बनने लगी थी.
उन्होंने दूसरा मकान देखना शुरू किया. जेनिफ़र वीडॉन पलाज़ो कहती हैं, "जो मकान मिल रहे थो वो दूर थे और बहुत छोटे थे और वहां बच्चों के लिए पार्क जैसी सुविधाओं की कमी थी."
46 वर्षिय जेनिफ़र वीडॉन पलीज़ो उन लोगों में से है जिन्हें शहर से इसलिए निकलना पड़ा क्यों वहां किराये मंहगे हो गये थे और बच्चों वाले परिवारों के लिए सुविधाएं कम थीं.
अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर काफ़ी हिसाब लगाने के बात उन्होंने शहर छोड़ने का निर्णय लिया.
शहर से दूर जाकर बसने के बाद पलाज़ो को अपने पेशे में भी बदलाव लाना पड़ा ताकि वो ऐसे काम कर सकें जो शहर से दूर रह कर किए जा सकते हैं. इस तरह उन्होंने विडियो एडिटिंग का काम करना शुरु किया.
ईवान जैज़ संगीत कलाकार हैं और उनके पेश के हिसाब से उनके लिए शहर से दूर जाकर बसना आसान था. वो बहुत ख़ुश हैं कि उनके बच्चों ने इस बदलाव को आसानी से स्वीकार कर लिया.
हालांकि उन्हें अभी भी शहर में रहना अच्छा लगता है, उनकी तरह कई और परिवार हैं जिनके लिए शहर में रहना आसान नहीं रहा है.

इमेज स्रोत, Maya Lilly
'अति स्पर्धात्मक' शहरों में जन्म दर में गिरावट
प्रभावशाली और अति स्पर्धात्मक शहर ऐसे व्यावसायिकों को आकर्षित कर रहे हैं जो ज़्यादा पैसे कमाते हैं, ज़्यादा काम करते हैं और जिनके पास समय कम होता है और अपना परिवार शुरू करने के लिए रुचि और पैसे कम होते हैं.
अमरीका की जनगणना के विश्लेषण से पता चलता है कि घनी आबादी वाले अमरीकी शहरों में उस वर्ग के लोगों की संख्या सबसे तेज़ी से बढ़ रही है जिसमें धनी, श्वेत और नि:संतान कॉलेज स्नातक शामिल हैं.
मिसाल के तौर पर सैन फ़्रैसिस्को, जो बेहद महंगा शहर है और स्टार्टअप कंपनियों या युवाओं द्वारा शुरु किए जा रहे नए किस्म के उद्यमों को प्रोत्साहना देने के लिए मशहूर है, वहां बच्चो की संख्या का अनुपात अमरीका के सौ सबसे बड़े शहरों की तुलना में सबसे कम यानी 13% प्रतिशत है.
जबकि पूरे अमरीका की आबादी में बच्चों का अनुपात 23% है. हालांकि अमरीका में 1970 से लेकर अब तक यह अनुपात घट कर आधा हो गया है.
बड़ें शहरों में कुल आबादी में बच्चों की संख्या घटने के कई कारण हैं, उनमें से एक कारण यह भी है कि केवल अमरीका ही नहीं बल्कि विश्व के दूसरे देशों के बड़े शहरों में भी लोग कम बच्चे पैदा करना पसंद करने लगे हैं.
फ़िनलैंड के कुछ शहरों में स्थानीय प्रशासन बच्चों के खेल के मैदानों को बंद कर रहे हैं ताकि वहां आधुनिक सुरक्षा प्रबंधों के लिए उन्हें निवेश न करना पड़े.
मायकेल सेमन कोलोराडो स्टेट युनिवर्सिटी में कला प्रबंन पर शोधकार्य करते हैं. उनका कहना है, "आप्रवासियों सहित कई लोग अब शहर के केंद्रीय इलाकों के बजाय उपनगरों में रहना पसंद करते हैं क्योंकि वहां उन्हें अच्छे स्कूल और बड़े मकान और अधिक सहूलियत वाले काम मिल जाते हैं."
और सबसे बड़ा कारण यह है कि यह सुविधाएं बड़े शहरों की तुलना में उपनगरों या दूर के इलाकों में सस्ती होती हैं.

इमेज स्रोत, Kay Michael
बच्चों के लिए सुविधाजनक शहरी डिज़ाइन बनाने की क़ीमत
किसी बड़े शहर में रह पाने का आर्थिक सामर्थ्य बाज़ार की स्थितियों पर निर्भर करता है. लेकिन कई बार नगर निर्माण की नीतियों का भी इस पर प्रभाव पड़ता है.
उदाहरण के तौर पर तेज़ी से विकसित होते एम्सटरडम जैसे शहर में कई प्रॉपर्टी डेवेलपर शहर की भारी मांग पूरी करने के लिए ऐसी बहुमंज़िला इमारतें बना रहे हैं जिसमें बच्चो वाले परिवारों का सुविधाएं उनकी प्राथमिकता नहीं हैं.
इन इमारतों मे वो बड़े मकानों को तोड़ कर छोटे मकान बना रहे हैं ताकि उतनी ही जगह मे अधिक मकान बनाए जा सकें.
हालांकि यह कह पाना कठिन है कि बच्चों वाले परिवार पर नगर प्रशासन को कितने पैसे खर्च करने पड़ते हैं. यह निश्चित है कि बिना बच्चों वाले परिवार पर प्रशासन को कम पैसे खर्च करने पड़ते हैं. कुछ नगर अधिकारी कहते हैं बिना बच्चों वाले परिवारों को शहर में बसाने से शहर को आर्थक लाभ होता है जबकि बच्चों वाले परिवारों से शहर को आर्थिक नुकसान होता है.
वो शायद ऐसा इसलिए सोचते हैं क्यों कि बच्चे न बड़ी ख़रीददारी करते हैं और ना ही करने देते हैं. मगर प्रशासन के सबसे अधिक पैसे बच्चों के स्कूलों पर खर्च होते हैं.
बाज़ार से प्रभावित इस सोच का एक परिणाम यह है कि अमरीका के फ़िलेडेल्फ़िया शहर में तकनीकी शिक्षा के एक स्कूल को बंद कर के वहां एक मंहगा रेस्त्रां बनाया जा रहा है. उसी तरह फ़िनलैंड में बच्चों के खेल मैदानों को इसलिए बंद किया जा रहा है ताकि वहां आधुनिक सुरक्षा प्रबंध बनाने के लिए निवेश नहीं करना पड़े.
परिवारों के शहरों में बसर के लिए आवश्यक है ऐसे घर जिसका किराया वो आसानी से चुका सकें. ऐसा अनुमान है कि अमरीका के बड़े शहरों में केवल 5% मकान ऐसे हैं जहां कम से कम तीन बेडरूम हों.

बहुमंजिला इमारतें और परिवार
एम्सटरडम में, जहां परिवारों के लिए बड़े मकान हुआ करते थे वहां अब बिल्डर उनकी जगह छोटे मकान बना रहे हैं जिन्हें अकेले लोगों या निसंतान लोगों को किराए पर दिया जा सके.
'वरकैमरिंग' नामक इस नयी विवादास्पद प्रथा का मक़सद यह है कि कम जगह में ज्यादा मकान बना कर बेचे जाएं ताकि इनके मकान मालिक ज़्यादा किराया कमा सकें.
जगह की कमी के हल के लिए यहां उंची बहुमंज़िला इमारतों का निर्माण शुरु किया गया है.
एम्सटरडम के मिडेनमिर इलाक़े में कई दशकों तक रह चुकी शहरी भूगोल की शोधकर्ता लिया कर्सटेन कहती हैं कि यह बहुमंज़िला इमारतें परिवारों के लिए सुलभ नहीं है.
वो कहती हैं हांगकांग मे काफ़ी लोग उंची बहुमंज़िला इमारतों में रहते हैं लेकिन उनके शोध के अुनसार, वहां भी उंची इमारतों मे बाहर से आने वाले शोर को रोकने के लिए सही इनसुलेशन नहीं होता और इमारत के बाहर खुली जगह की कमी होती है जिससे परिवारों को दिक्कत होती है.
लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि उंची बहुमंज़िला इमारतें परिवारों के अनुकूल नही हो सकतीं.
सिंगापूर में कई उंची बहुमंज़िला इमारतें हैं जिनमें बच्चों की सुविधा का ध्यान रखा गया है, जहां उनके खेलने के लिए जगह बनाई गयी है और साथ ही छतों पर बागीचे बनाए गए हैं.
लिया कर्स्टेन मानती हैं कि इस समस्या से निबटने के लिए पर्याप्त शोधकार्य नहीं हुआ है वहीं एक बड़े शहर में आवास की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है जबकि अकेले वयस्कों के लिए मकान बनाने आसान हैं.
लेकिन कुछ बड़े शहर अपवाद हैं. वैंकुवर में प्रशासनिक नीति के अंतर्गत नई इमारतों में एक निश्चत अनुपात में ऐसे मकान होने चाहिए जिसमें एक से अधिक बैडरूम हों. रॉटरडैम में भी फ़ुटपाथों को चौड़ा किया जा रहा है और ऐसी इमारतें बनाई जा रही हैं जो परिवारों के लिए सुविधाजनक हों. लेकिन ऐसी आवास नीतियां विश्व में बहुत ही कम शहरों में हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
किस प्रकार के शहर फलफूल सकते हैं?
धनी परिवार इस समस्या से इतना प्रभावित नहीं होते. शहर के केंद्रीय इलाकों परिवारों के लिए सुविधाएं होती हैं मगर वो अक्सर इतनी मंहगी होती हैं कि आम परिवारों की पहुंच से बाहर होती हैं.
उल्लेखनीय है कि ज़्यादातर जो परिवार सैन फ़्रैसिस्को में रह पा रहे हैं वे संपन्न हैं. इनमें से 30% लोगों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं. इस शहर के मध्यवर्ग के लोग अच्छे सरकारी स्कूलों मे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए वहां जा रहे हैं जहां अच्छ स्कूल हों.
जबकि सैन फ्रैंसिस्को के व्यावसायिक युवा शहरी मां बाप शहर के केंद्र में बने निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ा सकते हैं.
शहरों में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने इर्दगिर्द की जगह केवल वयस्कों को देना चाहते हैं.
32 वर्षीय एमी बैंस और उनके पति हाल ही में सिएटल छोड़ कर आए हैं. ऐसी बात नहीं कि बैस बच्चों के ख़िलाफ़ हों मगर वो कहती हैं, "मैं ऐसे अपार्टमेंट में रहना अधिक पसंद करूंगी जहां बच्चे ना हों." और इसके लिए वो अतिरिक्त पैसे देने को भी तैयार हैं.
कई शहरों मे बैंस जैसे लोगों के लिए वयस्कों के लायक जगहें बनाने में लाभ है क्योंकि इससे वहां आराम और तफ़री के लिए जगहें खुलने लगती हैं, नयी दुकानें और बड़े शॉपिंग सेंटर खुलते हैं ना कि बच्चों की देखभाल के लिए डे केयर.
नज़दीकी भविष्य में केवल अकेले वयस्कों के लिए शहर में सुविधाएं बनाने में भले ही फ़ायदा हो, लेकिन लंबे समय में तरक्की के लिए शहरों को युवा श्रमिक वर्ग की मदद करनी होगी और पीढ़ियों को जोड़ने पर ध्यान देना होगा.
दरअसल अमरीका के उन शहरों ने ज़्यादा प्रगति की है जहां परिवार ज़्यादा रहते हैं.

इमेज स्रोत, SUSANNA ZARAYSKY
फायदे के लिएजगह का छोटा किया जाना
अमरीका में 2008 महानगर योजना सर्वेक्षण में पाया गया कि अकेले व्यक्ति और छात्रों के लिए बेहद छोटे कमरों के मकान अनुकूल होते हैं लेकिन यह लोग कुछ समय बिता कर निकल जाते हैं और अपने आसपास कि जगहों या आस पड़ौस को बेहतर बनाने में उनकी रुचि कम होती है.
जबकि एक जगह पर लंबे समय तक टिकने वाले अपने आस पड़ोस को बेहतर बनाने में अधिक सक्रिय होते हैं.
परिवारों के शहर से निकल जाने का एक बुरा प्रभाल महिला सशक्तिकरण के लिए अब तक किए गए प्रयासों पर भी पड़ेगा.
लिया कर्स्टेन कहती हैं, "1990 के दशक मे घनी आबादी वाले बड़े शहरों में आकर बसने से श्रमिक वर्ग में महिलाओं की संख्या बढ़ी थी. लेकिन शहरों के केंद्रीय इलाकों से निकलकर उपनगरों यी दूरस्थ इलाकों में जाने से उनके लिए रोज़गार के अवसर कम होंगे. बच्चों को दूर के स्कूल लान ले जाने में मां बाप का अधिक समय खर्च होगा और महिलाओं को दोबारा पारंपरिक कामों में जुटना पड़ेगा."
यह सच है कि सभी वर्गों की ज़रुरतों को ध्यान में रख कर शहर कि योजना बनाना चुनौतीपूर्ण है लेकिन आर्थिक स्थिरता और लैंगिक समानता बनाए रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है.
(ये बीबीसी वर्कलाइफ़ की स्टोरी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. मूल कहानी देखने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो सकते हैं.)














