करोड़ों का है कीड़े खाने-खिलाने का कारोबार

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- Author, टेलर वील्डमैन, नीना वेग्नर
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
कीड़ों को खाने के नाम पर उल्टियां आ सकती हैं लेकिन लाखों लोग उनको चाव से खाते हैं और कुछ लोगों के लिए यह करोड़ों का कारोबार है.
वे प्रोटीन से भरे हैं और बीफ़ या पॉल्ट्री के मुक़ाबले बहुत कम संसाधनों पर पलते-बढ़ते हैं.
अगर लोग उनसे घिन करना बंद कर दें तो खाए जा सकने वाले कीड़े खाद्य और कृषि क्षेत्र का बड़ा कारोबार बन सकते हैं.
पश्चिमी देशों के लोग इन कीट-पतंगों को संपूर्ण प्रोटीन के स्थायी स्रोत के रूप में देखने लगे हैं.
इन छोटे जीवों में पशु प्रोटीन की तरह सभी नौ तरह के अमीनो एसिड होते हैं जो मानव आहार के लिए ज़रूरी हैं.
लेकिन यहां सिर्फ़ पौष्टिकता का मामला नहीं है. कीटपालन पर्यावरण के भी अनुकूल है.
खाने लायक़ कीड़ों को अगर बड़े पैमाने पर पाला जाए तो वे पशुओं से मिलने वाले प्रोटीन के बराबर प्रोटीन दे सकते हैं.
इसके लिए बीफ़, पोर्क या पॉल्ट्री उत्पादन से बहुत कम प्राकृतिक संसाधन लगते हैं. साथ ही, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी बहुत कम होता है.
कृषि क्षेत्र में इससे बड़ा बदलाव आ सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र न सिर्फ़ सबसे ज्यादा ज़मीन और पानी का इस्तेमाल करता है बल्कि यह ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा उत्सर्जक भी है.


बड़ा कारोबार
बाज़ार से मिल रहे संकेत नई उम्मीद जगाते हैं. अमरीकी ग्लोबल मार्केट इनसाइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ उच्च-प्रोटीन और सुविधाजनक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के कारण खाने लायक़ कीड़ों का बाज़ार 2017 के 5.5 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2024 में 71 करोड़ डॉलर हो जाएगा.
ऐसे कीड़ों में सबसे लोकप्रिय हैं टिड्डे और झींगुर, जिनका इस्तमाल प्रोटीन से भरपूर आटे, बार और स्नैक्स में होता है.
एक अन्य क्षेत्र भी है जिसमें कीटपालन से क्रांति आ सकती है. वह है पशु चारे का उत्पादन. यह कृषि क्षेत्र का एक अहम हिस्सा भी है.

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कीटपालन बहुत पौष्टिक चारा उपलब्ध करा सकता है जबकि सोया, मक्का और दूसरे मोटे अनाज वाले चारे को उगाने की तुलना में इसमें बहुत कम संसाधनों की ज़रूरत होती है.
इस उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए अमरीका के नए व्यापारिक संगठन द अमरीकन कोलिशन फ़ॉर इंसेक्ट एग्रीकल्चर ने FDA और USDA में लॉबिंग शुरू की है.
यह संगठन चाहता है कि कीड़ों को खाद्य पदार्थ के रूप में मान्यता मिले और इनके उत्पादन के मानक तय हों.
यूरोपीय संघ में 2018 के नोवेल फ़ूड रूल्स ने मुख्यधारा की फ़ूड मैन्यूफैक्चरिंग में कीड़ों को शामिल करने के लिए एक क़ानूनी ढांचा बनाना शुरू कर दिया है.


थाईलैंड से निकला
दुनिया के कई हिस्सों में कीड़ों को खाना कोई नई बात नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का अनुमान है कि दुनिया भर में क़रीब दो अरब लोग कीट-पतंगों को रोज़ाना के खाने में शामिल करते हैं.
कीड़े खाने के मामले में थाईलैंड एशिया का प्रमुख केंद्र है.
यहां के चावल उत्पादक उत्तर-पूर्वी ईसान क्षेत्र में कीड़े खाने की शुरुआत हुई थी. स्थानीय व्यंजनों में उनको साइड डिश के रूप में परोसा जाता है.

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हाल तक पश्चिमी देशों के कुछ जिज्ञासु पर्यटक ही इन व्यंजनों को चखते थे. लेकिन अब थाईलैंड पश्चिमी देशों को खाने लायक़ कीड़ों का निर्यात करने की तैयारी कर रहा है.
2017 में थाईलैंड ने झींगुर पालन के दिशानिर्देश तय किए ताकि उनका सुरक्षित और कुशल उत्पादन हो सके.
थाईलैंड के अधिकांश कीट फार्म छोटे हैं, लेकिन शोधकर्ता और निवेशक उत्पादन बढ़ाने के तरीक़े तलाश रहे हैं.
चियांग माई में 2016 में स्थापित झींगुर लैब में स्वचालित प्रक्रियाओं पर शोध हो रहा है.
इस फ़ार्म के सह-संस्थापक रैडेक हुसेक कहते हैं कि फ़िलहाल यहां हर महीने 3.5 टन कीट उत्पादन की क्षमता है. अब मांग बढ़ने का इंतज़ार है.


ज़ायक़ा भरपूर
FAO के मुताबिक़ दुनिया भर में बीटल्स और कैटरपिलर सबसे ज्यादा खाए जाने वाले कीड़े हैं, मगर विकसित देशों में झींगुर ने मुख्यधारा के व्यंजनों में अपनी जगह बना ली है.
इंसेक्ट बर्गर और मीलवॉर्म नूडल्स कुछ यूरोपीय सुपरमार्केट में भी मिल सकते हैं, लेकिन झींगुर से बने प्रोटीन बार यूरोप और उत्तर अमरीका के बाज़ारों में आम हो गए हैं.

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झींगुर को पसंद करने के पीछे ज़ायक़ा भी हो सकता है या कोई धारणा भी, लेकिन कारोबारियों ने भांप लिया है कि पश्चिमी देशों में झींगुर किसी भी दूसरे कीड़े के मुक़ाबले ज्यादा लज़ीज़ हैं.
हुसेक दूसरी वजह बताते हैं. वह कहते हैं, "कॉकरोच में बहुत प्रोटीन होता है. उसे आटे में मिलाया जा सकता है. लेकिन कॉकरोच के साथ नकारात्मक छवि जुड़ी है."
"घास के मैदान में यहां से वहां कूद रहे झींगुर के बारे में सोचना कॉकरोच को पीसकर आटे में मिलाने और उसे परोसने से अच्छा है.


उल्टी आती है
कुछ दूसरे कीड़े, जैसे कि मीलवॉर्म, प्रोटीन से उतने ही भरपूर होते हैं जितने झींगुर. अलग परिस्थितियों में (ठंडी जलवायु) में उनका उत्पादन भी आसान है.
समस्या यह है कि इन कीड़ों को भोजन के रूप में सभी लोग स्वीकार नहीं करते. पश्चिमी देशों ने यह उनकी मार्केटिंग के लिए चुनौती है.
आबे कहते हैं कि किसी को झींगुर के अलावा दूसरा कोई कीड़ा खाने के लिए मनाने में झींगुर खाने के लिए मनाने से दोगुनी कोशिश करनी पड़ती है.
मिशि आबे अमरीका के हैं जो चियांग माइ में रहते हैं.
थाईलैंड में वह पहले शख्स हैं जिन्होंने 2016 में इंसेक्ट प्रोटीन बार बनाना शुरू किया था. बार बनाने के लिए वह झींगुर को सुखाकर उसे आटे के साथ पीस देते हैं.

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झींगुर में उच्च प्रोटीन के साथ-साथ आयरन, कैल्शियम और विटामिन बी12 की भरपूर मात्रा होती है.
आबे उन ग्राहकों को टारगेट करते हैं जो सेहतमंद, सक्रिय और फिट रहना चाहते हैं. वह थाईलैंड के बाज़ार में ही अपने उत्पाद बेचते हैं, लेकिन उनके ग्रोहक ग़ैर-थाई हैं.
थाईलैंड के लोग दूसरे कीड़े खाने के भी आदी है. वे डीप-फ्राई स्नैक्स के रूप में कीड़े खाते हैं.
आबे कहते हैं, "सेहत और सुख में कोई रिश्ता नहीं है. वास्तव में यह नहीं बताया जा सकता कि बार में झींगुर क्यों हैं."
पश्चिमी देशों में, क्रॉसफिट जैसे सेहत के प्रति जागरूक समूहों के सदस्य और कुछ शाकाहारी भी अब कीड़ों को भोजन में शामिल करने लगे हैं.
शाकाहारियों को विश्वास दिलाया गया है कि झींगुर दर्द महसूस नहीं करते. हालांकि इसे सही साबित करने वाले रिसर्च नहीं हुए हैं, लेकिन अब कई वैज्ञानिकों ने कीट कल्याण के शोध शुरू किए हैं.


विज्ञान साथ है
आर्नोल्ड वैन हुइस नीदरलैंड की वेजेनिन्जेन यूनिवर्सिटी में ट्रॉपिकल एंटोमोलॉजी के प्रोफेसर हैं. वह कीट-आहार (entomophagy) के बारे में दुनिया के चुनिंदा विशेषज्ञों में शामिल हैं.
वह कहते हैं कि पिछले दो दशकों में खाने लायक़ कीड़ों के बारे में विज्ञान की रुचि बहुत बढ़ी है. पिछले दो साल में इसमें और तेज़ बदलाव आया है.
2016 और 2017 में खाने लायक़ कीड़ों के बारे में जितने एकैडमिक पेपर छपे, उतने उसके पहले के 10 साल में भी नहीं छपे थे.

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कीड़ों के बारे में विज्ञान की रुचि बढ़ने का मुख्य कारण है पर्यावरणीय स्थिरता.
वैन हुइस कहते हैं, "सेहत और पोषण के मामले में कीड़े भी प्रोटीन देने वाले दूसरे जानवरों की तरह है. मुख्य फ़ायदा पर्यावरण को है."


यह खाना सुरक्षित रहेगा
जैसे-जैसे दुनिया भर में खान-पान का पश्चिमीकरण हुआ, मांस की मांग बढ़ गई.
जानवरों की मांग और उनके चारे के लिए खेती करने की वजह से जंगल काटे गए. प्रदूषण बढ़ा, पानी की कमी हुई और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ा.
कीटपालन में पशु प्रोटीन की मांग की कुछ कमी पूरी करने की क्षमता है.
कृषि नेताओं का मानना है कि यदि कीड़ों को पशु चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाए तो उसके बड़े पर्यावरणीय और आर्थिक असर होंगे.
वैन हुइस कहते हैं, "यूरोपीय संघ ने पिछले साल अनुमति दे दी. हम अमरीका और कनाडा से भी उम्मीद करते हैं कि वे कीड़ों को पशु चारे के रूप में मंज़ूरी दे देंगे. यह बड़ी बात है. इस क्षेत्र में आ रही कंपनियों को अच्छा-ख़ासा निवेश मिल रहा है."
कीड़े पालने का एक और फ़ायदा यह है कि वे बायो कचरे पर भी पल सकते हैं. इससे दोहरा लाभ होता है.


सबके लिए फ़ायदेमंद
FAO कीड़ों को भोजन की कमी पूरी करने और कुपोषण से निपटने के उपाय के रूप में देखता है. लेकिन शोध और विकास पर बड़े निवेश के बिना इसकी तरक़्क़ी नहीं हो पा रही.
कुछ बड़े इंसेक्ट फार्म, जैसे नीदरलैंड का प्रोटीफार्म्स, ने कम लागत वाली उत्पादन तकनीक विकसित की है, लेकिन ये तकनीक उनके अपने नियंत्रण में है.

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झींगुर लैब के रैडेक हुसेक को लगता है कि कीड़े कुपोषण से जूझ रहे समुदायों की मदद कर सकते हैं.
वह कहते हैं कि उनका लक्ष्य कीड़ों को प्रोटीन के स्रोत के रूप में बढ़ावा देना है. साथ ही वे कम लागत वाले उत्पादन के तरीक़े विकसित कर रहे हैं. यह तकनीक वह छोटे किसानो को मुहैया कराएंगे.
यह कंपनी कीटपालन को मुर्गी पालन जितना सस्ता बनाना चाहती है.
हुसेक कहते हैं, "एक बार इसकी फार्मिंग का सही तरीक़ा हाथ लग जाए तो कीड़े संसाधनों के इस्तेमाल की समूची अर्थव्यवस्था के लिए सहायक होंगे. यह बहुत कम पैसे में देहाती इलाक़ों में प्रोटीन की कमी पूरी करने में कारगर होगा."


भविष्य का खाना
प्रोफेसर वैन हुइस कहते हैं, "20 साल पहले जब मैंने प्रेजेंटेशन देना शुरू किया था, तब कोई नहीं जानता था कि आप कीड़े भी खा सकते है. अब जब मैं भीड़ से पूछता हूं कि किस-किसने कीड़े खाए हैं तो कई हाथ उठ जाते हैं."
"कीड़े खाना ट्रेंडी हो गया है. नीदरलैंड के सुपरमार्केट में इंसेक्ट बर्गर मिलते हैं, लेकिन वे स्वादिष्ट नहीं हैं. यह भविष्य का भोजन बने, इसके लिए इसे लज़ीज़ बनाना होगा."

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बैंकॉक में एक्जीक्यूटिव शेफ माइ थिटिवाट ने 2017 में एक रेस्त्रां खोला था. वह अपने घरेलू बगान में ही कीड़े पालकर भोजन को स्वादिष्ट बना रहे हैं.
माइ ने कीटपालन, उत्पादन प्रक्रिया, पोषण, स्थायित्व, फ्लेवर प्रोफाइल और भोजन के रूप में उनके इस्तेमाल को समझने के लिए एक साल की ट्रेनिंग ली थी.
उन्होंने थाईलैंड के परंपरागत व्यंजनों को चुना और अपने कौशल से फ्रेंच और इटैलियन व्यंजनों का मेन्यू तैयार किया, जिसके हर डिश में कीड़े हैं.


सस्ता मत समझिए
इस रेस्त्रां ने नई चीज़ें आज़माने के लिए तैयार लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी.
यहां कई लोग सिल्कवॉर्म तिरामिसु या लॉब्स्टर और ग्रासहॉपर रिसोट्टो खाने की चुनौती ले रहे हैं. इस रेस्त्रां में सबसे ज्यादा बिकने वाली डिश है जायंट वाटर बीटल रैवियोली.
माइ कहते हैं, "यदि आपने कीड़ों के डिश को भी अच्छे से बनाया है तो वह अच्छा लगेगा."
"अगर मैं चिकेन को उसके पंख और नाख़ून के साथ तैयार करूं, उसे भून दूं और आपके सामने पेश कर दूं तो आप उसे नहीं खाना चाहेंगे. कीड़ों के साथ भी ऐसा ही है."
हो सकता है कि इसमें दशकों लग जाएं, लेकिन माइ को लगता है कि एक दिन सभी कीड़ों को अपना लेंगे. सभी लोग उनको चाव से खाएंगे.
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