आपको इस तरह से नुक़सान पहुंचाती है मल्टीटास्किंग

- Author, जिनर्वा बोनी और थॉमस ल्यूटन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
हर शख़्स ये सोचता है कि वो बहुत व्यस्त है और उसके पास वक़्त की बेहद कमी है.
सबको ये लगता है कि उन्हें उस सफ़ेद ख़रगोश की तरह दौड़ना होगा, जिसका ज़िक्र 'एलिस इन वंडरलैंड' कहानी में आया था. वो ख़रगोश हर वक़्त दौड़ता रहता था, फिर भी वो लेट हो जाता था. वक़्त पर काम पूरे नहीं हो पाते थे.
हम जिस लम्हे में जी रहे होते हैं, उसके बजाय आगे आने वाले वक़्त की फ़िक्र में दौड़ते-फिरते हैं.
ज़माना मल्टीटास्किंग का है, सो एकसाथ काम करके तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी से क़दम-ताल मिलाने की कोशिश होती है.
आइए आज आप को बताते हैं वो नुस्खे, जो ज़िंदगी के पीछे भागने के बजाय आप को अपनी ज़िंदगी पर कंट्रोल करने में मदद करेंगे.
1. मल्टीटास्किंग यानी एक साथ कई काम करना बंद कर दें
कई बार ऐसा होता है कि आप किसी मीटिंग में हैं. कोई अपनी बात कह रहा है, उसी दौरान या तो आप अपना प्रेज़ेंटेशन पढ़ने लगते हैं या फिर मेल-मैसेज चेक करने लगते हैं. ऐसा करने का नतीजा ये होता है कि आप न तो सामने वाले की बात ठीक से सुन पाते हैं और न ही अपने प्रेज़ेंटेशन पर पूरा ध्यान लगा पाते हैं.
वजह ये है कि आप का दिमाग़ एक साथ इतनी जानकारियों को नहीं समझ सकता है. उन्हें प्रॉसेस नहीं कर सकता है.

रिसर्च बताती है कि एक साथ दो काम करने से दोनों कामों को करने में 30 फ़ीसद ज़्यादा वक़्त लगता है. वही काम अगर आप बारी-बारी से करेंगे, तो ये समय बचेगा. आप ग़लतियां भी कम करेंगे.
खाना बनाते वक़्त अगर आपका ध्यान मोबाइल पर है तो कई बार लोग मोबाइल से ही कड़ाही या पैन में चलाने लगते हैं. उन्हें ध्यान ही नहीं रहता. बारी-बारी से काम करने पर इस ग़लती की आशंका ख़त्म हो जाएगी.
2. समय बचाने के लिए फ़ोन का इस्तेमाल करें
इन दिनों हमारी ज़िंदगी का 30 फ़ीसद वक़्त दफ़्तर की ई-मेल, मैसेज पढ़ने में जाता है. मेल और मैसेज में वक़्त ज़ाया करने के बजाय आप सीधे फ़ोन उठाकर अपनी बात कह सकते हैं. इससे आपकी बात सीधे और सपाट शब्दों में सामने वाले तक पहुंचेगी.

फ़ोन पर बात करते वक़्त आपको पता होगा कि सामने वाला क्या कह रहा है. वो आपकी बात को अगर नहीं समझ रहा है, तो, आप उसे तुरंत फिर से समझा कर उस काम को वहीं ख़त्म कर सकते हैं.
इसका एक फ़ायदा ये भी है कि जब आप किसी की आवाज़ सुनते हैं, तो अलग तरह का राब्ता क़ायम हो जाता है. एक रिश्ता परवान चढ़ता है. हम संवाद रिश्ते बनाने के लिए ही करते हैं. ये कारोबार की दुनिया का ईंधन है.

अब चूंकि हम एक साथ कई काम कर सकते हैं. तो हमारे पास इस बात को सोचने के लिए वक़्त ही नहीं होता कि क्या वो काम करना ज़रूरी है या नहीं.
3. सुबह उठकर 10 मिनट तक कुछ न करें
अपने वक़्त पर कंट्रोल का तीसरा नुस्खा ये है कि सुबह जब आप उठें, तो दस मिनट तक कुछ न करें, सिर्फ़ सोच-विचार करें.
घर में इस काम में बाधा आए तो बाहर कहीं जाकर बैठ सकते हैं. पार्क में या कैफ़े में. सोचें कि क्या काम ज़रूरी है. दिन का या हफ़्ते का क्या एजेंडा होना चाहिए.

कई बार वक़्त बचाने का सबसे अच्छा तरीक़ा ये होता है कि आप कुछ न करें. शांत बैठें. अपने बारे में, क़ुदरत के बारे में सोचें.
आज़मा कर देखिए. इन नुस्खों से ज़िंदगी की बागडोर फिर से आप के हाथ में आ जाएगी.
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