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'भारत टी-20 का ख़िताब बचाने में सक्षम' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंग्लैंड में खेल जा रहे ट्वेन्टी-20 विश्व कप से कमेंटेटर के तौर पर नई पारी की शुरूआत कर रहे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली का कहना है कि भारत दो साल पहले जीते अपने ख़िताब बचाने में सक्षम है. अपनी इस नई भूमिका को लेकर वे काफ़ी उत्साहित हैं. यह एक संयोग ही है सौरभ अपनी नई पारी उसी इंग्लैंड में शुरू कर रहे हैं जहाँ से उन्होंने एक खिलाड़ी के तौर पर अपना सफ़र शुरू किया था. ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स की विशेषज्ञ टीम का सदस्य बनने के मौक़े पर सौरभ ने अपनी इस नई पारी, भारतीय टीम, ट्वेन्टी-20 विश्व कप में भारत की संभावनाओं, इंडियन प्रीमियर लीग और महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी जैसे मुद्दों पर खुल कर बातचीत की. पेश है विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश: इस नई भूमिका में कैसा लग रहा है? मैं इससे रोमांचित हूँ. वर्ष 1996 के इंग्लैंड दौरे के पहले दो मैचों में शतक लगाने के बाद इसी चैनल पर मेरा पहला इंटरव्यू हुआ था. अब मैं जगह बदलते हुए टीम के अपने पूर्व साथियों से इंटरव्यू लूंगा. मैं सेमीफ़ाइनल से कमेंटरी की शुरूआत करूंगा. नई पारी की शुरूआत के लिए विश्व कप से बेहतर कोई और मौक़ा नहीं हो सकता था. लेकिन क्या कल तक जिनके साथ ड्रेसिंग रूम में थे उनकी ख़ामियों की आलोचना करना मुश्किल नहीं होगा? मैं यही कह सकता हूँ कि मैच ख़त्म होने के बाद वे सब मुझसे हाथ मिलाएंगे. पहले मैं कप्तान और खिलाड़ी के तौर पर अपनी भूमिका निभाता था. अब कमेंटेटर के तौर पर निभाऊंगा. आपके पसंदीदा कमेंटेटर कौन हैं? रिची बेनो और बिल लॉरी. इनके अलावा भारतीयों में सुनील गावसकर का जवाब नहीं. रवि शास्त्री भी बेहतर कमेंटेटर हैं. जहां तक जेफ़्री बॉयकाट का सवाल है, वे तो बल्लेबाज़ी से लेकर कमेंटरी तक हर क्षेत्र में किंवदंती बन गए हैं. आगे क्रिकेट खेलने की योजना?
मैं बंगाल के लिए एक दिवसीय मैच खेलने की सोच रहा हूँ. इससे मेरी फ़िटनेस बनी रहेगी और मैं अपने को अगले साल इंडियन प्रीमियर लीग के तीसरे संस्करण के लिए तैयार कर सकता हूँ. इस बार इंडियन प्रीमियर लीग में आपकी टीम विवादों में घिरी रही. इस पर आप क्या सोचते हैं? विवाद तो आईपीएल के पहले संस्करण में भी पैदा हुआ था, लेकिन मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. अगर मैंने कुछ कहा तो एक नया विवाद खड़ा हो जाएगा. अब मीडिया की पहुँच और बढ़ती भूमिका की वजह से विवाद पैदा होना तो तय ही है. क्या भारत अपना ट्वेन्टी-20 चैम्पियन का ख़िताब बचा पाएगा? भारत अपना यह ख़िताब बचाने में सक्षम है. भारतीय टीम काफ़ी मज़बूत है. उम्मीद है कि वह बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए इस ख़िताब को बचा लेगी. सच तो यह है कि 20-20 ओवरों के मैच में किसी को जीत का दावेदार बताना कठिन है. इन 40 ओवरों के दौरान बेहतर खेलने वाली कोई भी टीम जीत सकती है. ऐसे मैचों में हर टीम भारी दबाव में होती है. भारतीय टीम दबाव से बेहतर तरीक़े से निपटने में सक्षम है. भारत ने पहला टी-20 विश्व कप दो साल पहले जीता था. तब टीम के ज़्यादातर खिलाड़ी युवा थे. अब वे और परिपक्व हो गए हैं. हाँ, ज़हीर की फ़िटनेस को लेकर चिंता ज़रूर है. भारत शुरूआती दौर में आसान ग्रुप में है. लेकिन बाद के सभी मैचों में कड़ा मुक़ाबला होगा. वीरेंदर सहवाग और गौतम गंभीर का फ़ॉर्म में नहीं होना चिंता का विषय नहीं है? ऐसा नहीं है. एकाध महीने बेहतर नहीं खेलने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. यह दोनों आज़माए हुए और काफ़ी अनुभवी खिलाड़ी हैं. इन दोनों की सलामी जोड़ी ने भारत को कई मैचों में जीत दिलाई है. बीते लगभग 10 महीनों से इन दोनों के प्रदर्शन में निरंतरता बनी हुई है. लेकिन कहा जा रहा है कि आईपीएल की वजह से भारतीय खिलाड़ियों पर थकान हावी है?
यह सब बेकार की बातें हैं. टीम के ज़्यादातर खिलाड़ी युवा हैं जो इन परिस्थितियों में ख़ुद को ढाल सकते हैं. हमें यह भी याद रखना चाहिए कि भारतीय टीम पहले टी-20 विश्वकप के लिए इंग्लैंड से सीधे दक्षिण अफ़्रीक़ा पहुंची थी. ढ़ाई महीने लंबे दौरे के बाद और फिर भी हम चैम्पियन बन गए. एक कप्तान के तौर पर धोनी कितने सफल हैं? धोनी को बीते दो वर्षों के दौरान जितनी कामयाबी मिली है उससे किसी भी कप्तान को उनसे ईर्ष्या हो सकती है. ट्वेन्टी-20, टेस्ट और एकदिवसीय मैचों में धोनी को लगातार कामयाबी मिली है. कप्तान के तौर पर वे बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं. उन्होंने कई नए और कामयाब प्रयोग भी किए हैं. मैं भी लंबे अरसे तक कप्तान रहा हूँ. इसलिए जानता हूँ कि कप्तान की भूमिका कितनी कठिन होती है. कोई भी कप्तान उतना ही अच्छा होता है जितनी अच्छी उसकी टीम. धोनी की कप्तानी में भारत इस बार अपना ख़िताब बचा सकता है. एक खिलाड़ी और कप्तान के तौर पर किस टीम के साथ खेलना सबसे रोमांचक रहा है? पाकिस्तान के साथ. भारत-पाकिस्तान मैच के रोमांच के आगे इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाला ऐशेज भी कहीं नहीं ठहरता. भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी क्रिकेट मैच के दौरान होने वाली प्रतिद्वंद्विता की दूसरी कोई मिसाल नहीं मिलेगी. पहले टी-20 विश्व कप के दौरान भी भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए दोनों मैच अंतिम क्षण तक रोमांचक रहे थे. अगर यह दोनों टीमें सेमीफ़ाइनल या फ़ाइनल में भिड़ी तो कमेंटेटर के तौर पर इस रोमांच का आनंद उठा सकता हूँ. |
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