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'देश के लिए खेलना सपना सच होने जैसा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान सौरभ गांगुली की कमी को भरना भारतीय टीम के लिए बेहद मुश्किल होगा. नागपुर टेस्ट के साथ ही गांगुली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया. वे ऐसे जुझारु कप्तान रहे जिनकी छवि अपने खिलाड़ियों के समर्थन में हर समय खड़े रहने की रही. बीबीसी के साथ हुई उनकी बातचीत के प्रमुख अंश. कैसे देखते हैं आप अपने करियर को? इतने वर्षों तक भारत के लिए खेला. मेरे लिए यह सपने के सच होने जैसा था. क्रिकेट ने मुझे काफ़ी संतुष्टि दी है. आज आपके करियर का बड़ा दिन है. जब आप सुबह उठे तब कैसा लग रहा था? मेरे लिए कुछ भी मुश्किल नहीं रहा. मैंने पहले भी कहा है कि मैं अपने निर्णय से खुश हूँ. कोई दिक्कत नहीं है मुझे. कितना मुश्किल होगा क्रिकेट से दूर रहना आपके लिए? नहीं, मुश्किल नहीं होगा. इतने वर्ष क्रिकेट खेले. ज़िदगी में और भी बहुत कुछ करना है. आप खिलाड़ियों के कप्तान के रुप में जाने जाते हैं. देखिए अंत में खिलाड़ी ही आपको मैच जिताते हैं तो आपको उनका ख़्याल रखना ही पड़ेगा. जिन्होंने भी अच्छा खेला मैंने उनका समर्थन किया. आप और अनिल कुंबले दोनों ने ही अंतरराष्ट्रीय खेल से संन्यास ले लिया है. कैसा भविष्य देखते हैं आप भारतीय क्रिकेट का? आप उम्र के साथ नहीं लड़ सकते है. गावसकर गए तो सचिन आएँ. हम जाएँगे तो नए खिलाड़ी आएँगे. |
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