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गुरुवार, 04 जून, 2009 को 20:05 GMT तक के समाचार
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टेस्ट और वनडे से आगे ट्वेन्टी-20


जीवन का यह सिद्ध सत्य है कि परिवर्तन को स्वीकार करना हमेशा कठिन होता है. ख़ासकर प्रकृति जब बुनियादी नियमों को चुनौती देती है.

उन अन्य खेलों के अलावा जिनमें कुछ बदलाव हुए हैं क्रिकेट एक ऐसा खेल है जहाँ 1960 के दशक में पहली बार एकदिवसीय क्रिकेट का पदार्पण हुआ.

अब उसका भी संक्षिप्त संस्करण ट्वेन्टी-20 क्रिकेट के रूप में आया है जिसने क्रिकेट की बुनियादी प्रकृति को ही बदल दिया है.

टेस्ट क्रिकेट पाँच दिन तक चलने वाला खेल है. इसमें खिलाड़ियों का कौशल सामने आने में पाँच दिन तक का समय लग जाता है. इसमें खिलाड़ी अपनी पारी काफ़ी धैर्य से खेलते हैं और आक्रामकता का सहारा तब लेते हैं जब उसकी ज़रूरत होती है.

कमाई का दबाव

गेंदबाज़ विकेट लेने के लिए गेंदबाज़ी करते हैं रन रोकने के लिए नहीं लेकिन दर्शकों की कम होती संख्या और कमाई के बढ़ते दबाव ने क्रिकेट के एक नए संस्करण की ओर देखने को मज़बूर किया.

इस तरह एक दिवसीय क्रिकेट का जन्म हुआ. पहला विश्व कप 1975 में खेला गया जिसे शानदार क़ामयाबी मिली.

परंपरागत क्रिकेट के प्रेमियों ने इसकी आलोचना की. यहाँ तक कि इसे ‘पायजामा क्रिकेट’ भी कहा लेकिन धीरे-धीरे एकदिवसीय क्रिकेट यहाँ आया और लोकप्रिय हुआ.

भारत ने 1983 में जब विश्व कप जीता तो उसके बाद यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर छा गया.

केबल टीवी के आगमन, निजीकरण और उदारीकरण से भारतीय अर्थव्यवस्था सुधरी. इससे क्रिकेट और उससे मिलने वाला राजस्व भी बढ़ा.

एक समय ऐसा भी था जब दर्शकों की बढ़ती भीड़ और कमाई ने टेस्ट क्रिकेट के लिए ख़तरा पैदा कर दिया लेकिन प्रशासकों के इस पर बुद्धिमानी पूर्वक नियंत्रण पाया. इसने यह दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ियों की प्राथमिकता है और आज भी है.

 पहला विश्व कप 1975 में खेला गया जिसे शानदार क़ामयाबी मिली. परंपरागत क्रिकेट के प्रेमियों ने इसकी आलोचना की यहाँ तक की इसे 'पायजामा क्रिकेट' भी कहा लेकिन धीरे-धीरे एक दिवसीय क्रिकेट यहाँ आया और लोकप्रिय हुआ.

आज टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट इंग्लैंड तक में साथ-साथ हैं, जहाँ घरेलू क्रिकेट में ट्वेन्टी-20 क्रिकेट की शुरुआत हुई थी.

उस समय उम्मीद जताई गई थी कि साढ़े तीन घंटे का यह खेल उन लोगों को पसंद आएगा जो एकदिवसीय क्रिकेट तक को समय बर्बाद करने वाला मानते थे.

विडंबना यह थी कि भारत, जो आज ट्वेन्टी-20 के केंद्र में है, उसने भी बहुत लंबे समय तक क्रिकेट के इस तीसरे संस्करण में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई थी.

वह एक दिवसीय क्रिकेट से होने वाली अपनी कमाई से संतुष्ट था. उन्हें डर था कि ट्वेन्टी-20 टीवी से बहुत अधिक पैसे नहीं बना पाएगा क्योंकि यह बहुत लंबा खेल नहीं था जिससे विज्ञापनदाताओं से अधिक पैसे उगाहा जा सकें.

भारत का रुख़

भारत ने ट्वेन्टी-20 के पहले विश्व कप में अपनी टीम भी बहुत अनिच्छा से भेजी थी लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वह विश्व कप जीतने में सफल रहा.

भारत-पाकिस्तान के बीच खेल गए फ़ाइनल मैच ने दर्शकों और टीवी विज्ञापनों से होने वाली कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) जी टीवी के स्वामित्व वाले इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) से डरा हुआ था. आईसीएल ने शहरों को केंद्र में रखकर एक प्रतियोगिता शुरू की.

इसके बाद बीसीसीआई ने ट्वेंटी 20 क्रिकेट की लोकप्रियता भुनाने के लिए फ्रेंचाइजी आधारित इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत की.

इसके पहले संस्करण को काफ़ी लोकप्रियता मिली. आज लोग न केवल टेस्ट क्रिकेट बल्कि एकदिवसीय क्रिकेट के अंत की भी बात करने लगे हैं.

ट्वेन्टी-20 विश्व कप का दूसरा संस्करण इन आशंकाओं और अटकलों के बीच शुरू हो रहा है. एक मनोरंजक प्रतियोगिता के विचार के साथ शुरू हुआ यह आयोजन आज महत्वपूर्ण आयोजन बन गया है.

महेंद्र सिंह धोनी
तीव्रता और लोकप्रियता के मामले में आईपीएल का मुक़ाबला विश्व कप नहीं कर सकता है.

दक्षिण अफ़्रीका में खेले जाने के बाद भी आईपीएल के दूसरे संस्करण की सफलता ने कुछ विदेशी खिलाड़ियों को बेतहाशा पैसा कमाने में मदद की.

भारत जिसकी पहले से ही क्रिकेट की अर्थव्यवस्था पर मज़बूत पकड़ है इससे क्रिकेट की दुनिया में और ताक़तवर होकर उभरा है.

आईपीएल और विश्व कप

आज एक दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ ट्वेन्टी-20 क्रिकेट अंतररराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ क्लबों पर आधारित प्रतियोगिताओं में भी बंट गया है.

इसमें आईपीएल सबसे आगे है. कुछ विशेषज्ञों का तो यहाँ तक मानना है कि तीव्रता और लोकप्रियता के मामले में आईपीएल का मुक़ाबला विश्व कप नहीं कर सकता है.

अब यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि क्रिकेट की दुनिया ऐसे समय में पहुँच गई है जहाँ किसी को यह नहीं पता है कि ट्वेंटी 20 क्रिकेट की क्रांति में क्या गिरेगा.

अगर इंग्लैंड में होने वाला ट्वेंटी 20 विश्व कप सफल हो जाता है, ऐसा न होने की संभावना भी बहुत कम है, तब यह क्रिकेट प्रसाशकों के लिए काफ़ी कठिन समय होगा.

उनके पास एक तरफ़ तो क्रिकेट के इस संस्करण से पैसा कमाने की लालच होगी. इसके बाद उनके पास टेस्ट क्रिकेट और यहाँ तक की एक दिवसीय क्रिकेट तक के लिए समय नहीं होगा.

हम अभी इन दिलचस्प दिनों से दूर हैं लेकिन इसके पहले कि प्रशासक इस पर नियंत्रण ले और अपना खेल खेलें हमें इस 15 दिन के तमाशे का आनंद लेते हैं जहाँ किसी भी तरह रन बनाना क्रिकेट का कौशल दिखाने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है.

(लेखक ' हिंदुस्तान टाइम्स' के खेल सलाहकार हैं)

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