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कुंबले ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान अनिल कुंबले ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है. अब वो ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ नागपुर में खेले जानेवाले चौथे और अंतिम टेस्ट में नहीं खेलेंगे. दिल्ली टेस्ट के समाप्त होने के बाद कुंबले ने कहा कि उन्होंने सिरीज़ के बाद संन्यास का फ़ैसला किया था लेकिन चोट लगने के कारण ये थोड़ा पहले ले लिया. उनका कहना था कि दिल्ली उनके लिए विशेष स्थान हैं और यहाँ उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए हैं. टेस्ट बराबरी पर समाप्त होने के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने उन्हें कंधे पर बैठाकर पूरे मैदान का चक्कर लगाया. ऑस्टेलिया के कप्तान रिकी पोंटिंग ने कहा कि कुंबले का शानदार करियर रहा है और वो कड़े प्रतिस्पर्धी रहे हैं. ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से उनकी गेंदबाज़ी को लेकर भारी आलोचना हो रही थी, वो विकेट नहीं ले पा रहे थे और यहाँ तक कहा जाने लगा था कि अब कुंबले को सम्मानपूर्वक संन्यास ले लेना चाहिए. साथ ही कहा जाने लगा कि कुंबले की गेंदों में अब वो धार नहीं रही है और वो थक गए हैं. अनिल कुंबले ने अपना शुरुआती क्रिकेट जीवन एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में शुरू किया लेकिन बाद में उन्हें अहसास हुआ कि स्पिन की कला में वो अपने लिए एक अलग जगह बना सकते हैं. अलग हैं कुंबले अनिल कुंबले बाक़ी स्पिनरों से एकदम अलग हैं.
जहाँ शेन वॉर्न और मुरलीधरन ने गेंद को ज़बर्दस्त तरीक़े से घुमाने की क्षमता पर विकेट लिए हैं वहीं कुंबले ने ज़्यादातर अपनी गुगली, टॉप स्पिन और फ़्लिपर जैसी गेंदों से बल्लेबाज़ों को आउट किया है. उनकी एक सीमा भी है कि वो गेंद को ज़्यादा घुमा नहीं सकते लेकिन ये कमी वो अपनी गेंदों में रफ़्तार लाकर पूरी करते हैं. 38 वर्षीय अनिल कुंबले इस समय दुनिया के तीसरे सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी हैं. उन्होंने 619 विकेट लिए. भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में शायद ही किसी गेंदबाज़ ने भारत को इतने मैचों में जीत दिलवाई होगी जितने मैच अनिल कुंबले ने जितवाए हैं. अपने 18 साल के करियर में अनिल कुंबले ने अच्छे-अच्छे बल्लेबाज़ों के छक्के छुड़ाए हैं और टेस्ट मैचों में 600 विकेट लेने वाले पहले भारतीय और दुनिया के तीसरे गेंदबाज़ हैं. कुंबले के नाम रिकॉर्डों का अंबार है. वर्ष 1999 में उन्होंने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में सभी दस विकेट चटकाए थे और ऐसा करने वाले वे विश्व के दूसरे गेंदबाज़ हैं. कुंबले को अपने करियर के आख़िरी पड़ाव में टेस्ट टीम की कप्तानी मिली और उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को भी बख़ूबी निभाया. |
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