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लक्ष्य का पीछा कर सकते थे... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बंगलौर में खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ होने के बाद भारतीय कप्तान अनिल कुंबले ने कहा कि यदि वीरेंदर सहवाग और गौतम गंभीर अच्छी शुरुआत देते तो भारत लक्ष्य का पीछा कर सकता था. उल्लेखनीय है कि दूसरी पारी में भारत को जीत के लिए 299 रनों का लक्ष्य मिला था. लेकिन जब पाँचवें और आख़िरी दिन का खेल ख़त्म हुआ तो उस समय भारत का स्कोर था चार विकेट के नुक़सान पर 177 रन. वीवीएस लक्ष्मण 42 और सौरभ गांगुली 26 रन बनाकर नाबाद रहे. दूसरी पारी में वीरेंदर सहवाग ने छह और गौतम गंभीर ने 29 रनों का योगदान दिया. कुंबले का कहना था, '' यदि वीरू और गंभीर हमें अच्छी शुरुआत दे देते, तो हम निश्चित ही लक्ष्य को हासिल कर लेते.'' उनका कहना था,'' ज़हीर और हरभजन के अच्छे प्रदर्शन से हमें मैच की बेहतरीन समाप्ति करने को लेकर आश्वस्त थे. यदि हमें पहली पारी की तरह शुरुआत मिलती, तो हम निश्चित ही लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर सकते थे. लेकिन हम ऐसा करने में नाकाम रहे और हमें ड्रॉ पर संतोष करना पड़ा.'' कुंबले ने टॉस की भूमिका भी अहम बताते हुए कहा कि यदि वो टॉस जीतते, तो परिस्थितियां कुछ अलग होतीं. उन्होंने कहा,'' मेरा मानना है कि टॉस काफ़ी अहम रहा. यदि हम इसे जीत लेते, तो फिर बात कुछ और होती. हम पाँचवें दिन में इससे बेहतर स्थिति में होते.'' कुंबले का बंगलौर के चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच के बारे में कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में बंगलौर की पिच का मिज़ाज भी बदल गया है. |
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