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बुधवार, 09 जनवरी, 2008 को 20:05 GMT तक के समाचार
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बकनर का इतिहास ही दाग़दार है: मनिंदर
बकनर
मनिंदर की मानें तो बकनर पहले से ही भारत के ख़िलाफ़ ग़लत फ़ैसले देते रहे हैं
पूर्व भारतीय टेस्ट क्रिकेटर मनिंदर सिंह का कहना है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसआई) को स्टीव बकनर की अंपायरिंग का विरोध ऑस्ट्रेलिया के साथ टेस्ट सिरीज़ शुरू होने से पहले ही करना चाहिए था.

उन्होंने कई उदाहरण गिनाते हुए कहा कि बकनर वर्ष 1992 के बाद से कई बार भारत के ख़िलाफ़ ग़लत फ़ैसले दे चुके हैं.

मनिंदर सिंह ने आपकी बात बीबीसी के साथ कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए अपने विचार रखे.

उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में स्टीव बकनर ने जोंटी रोड्स को रन आउट क़रार देने से इनकार कर दिया जबकि टेलीविज़न रिप्ले के मुताबिक वे आउट थे.

इसी एक फ़ैसले के कारण दक्षिण अफ़्रीका वह मैच बचाने में कामयाब हो गई. तब बकनर ने स्पष्ट कहा था कि वो रनआउट के मामले को भी थर्ड अंपायर के सुपुर्द करने के पक्ष में नहीं हैं.

इसके बाद जब उन्होंने कुछ और ऐसे फ़ैसले दिए तब तत्कालीन कप्तान सौरभ गांगुली ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें शून्य अंक दे दिए.

मनिंदर सिंह कहते हैं, "बीसीसीआई को टेस्ट सिरीज़ से पहले ही स्टीव बकनर को हटाने के लिए दबाव डालना चाहिए था. अगर ऐसा नहीं भी हुआ तो सिडनी टेस्ट के पहले दिन तो आवाज़ उठानी ही चाहिए थी."

भेद-भाव

मनिंदर सिंह इस बात के ख़िलाफ़ हैं कि एलबीडब्ल्यू के फ़ैसलों में भी तकनकीकी का इस्तेमाल किया जाए.

वो कहते हैं कि 'हॉकाई' से सही-सही गेंद की ऊँचाई मापना मुमकिन नहीं है.

हालाँकि उन्होंने हर उस मामले को तीसरे अंपायर के हवाले करने की माँग की जब मैदान पर खड़े अंपायरों को थोड़ा भी संशय हो.

मनिंदर सिंह कहते हैं कि फ़ील्ड अंपायर अगर कोई ग़लत फ़ैसला करते हैं तो तीसरे अंपायर को उसमें दखल देना चाहिए.

वो ये भी मानते हैं कि परंपरागत रूप से मैच के दौरान एशियाई खिलाड़ियों के साथ अंपायर भेद-भाव बरतते रहे हैं.

उन्होंने बतौर कमेंट्रेटर वर्ष 1997 के अनुभवों के आधार पर बताया कि किस तरह एलन डोनाल्ड और ग्लेन मैकग्रा पिच पर छींटाकशी करते थे तो उन्हें अंपायर कुछ नहीं कहते थे लेकिन प्रतिद्वंद्वी एशियाई खिलाड़ियों को सिर्फ़ ज़्यादा अपील पर सज़ा सुना दे जाती थी.

सुझाव

अंपायरिंग स्तर को सही बनाने के लिए उन्होंने एक उम्रसीमा के बाद नियमित अंतराल पर अंपायरों का फिटनेस टेस्ट करान की मँग की.

पूर्व क्रिकेटर का सुझाव था कि अगर फ़ील्डिंग करने वाली टीम का कप्तान अंपायर के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं है तो उसे टेनिस की तरह थर्ड अंपायर के पास अपील करने का अधिकार मिलना चाहिए.

उन्होंने आईसीसी के एलीट पैनल में अंपायरों की संख्या आठ से बढञाकर 16 करने की माँग की.

एलीट पैनल में एक भी भारतीय के शामिल नहीं होने पर दुख जताते हुए उन्हों कहा कि इसके लिए बोर्ड ज़िम्मेदार हैं जो घरेलू अंपायरों को बढ़ावा नहीं देता है.

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