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'बल्लेबाज़ी का मध्य क्रम अयोग्य नहीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नॉंटिंघम में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच सात विकेट से जीत लिया है. इस मैच में सचिन तेंदुलकर की भी अहम भूमिका रही. उन्होंने 91 रनों का योगदान किया था. मैच जीतने के बाद सचिन तेंदुलकर ने बीबीसी से विशेष बातचीत की. पेश है बातचीत के मुख्य अंश: ये जीत आपको क्या लगता है, कितनी अहम है? हमारे लिए बहुत अहम है यह जीत- जिस तरह से हम ये मैच खेले हैं, ख़ास तौर से लॉर्ड्स के बाद. हम सभी ने अच्छी तैयारी की थी और उम्मीद कर रहे थे कि हम अच्छा प्रदर्शन कर पाएँगे यहाँ. हालाँकि मैच से पहले हमें आउटडोर प्रैक्टिस का मौक़ा नहीं मिला था लेकिन यहाँ आकर हमने इनडोर प्रैक्टिस में काफ़ी ज़ोर लगाया. अच्छी प्लानिंग की और उसका अमल भी अच्छी तरह किया. ये जीत काफ़ी अच्छी रही है, स्पेशल रही है. ज़हीर ख़ान के बारे में कुछ कहेंगे जिन्होंने नौ विकेट लिए इस मैच में. ज़हीर ने सिर्फ़ इसी मैच में ही नहीं, पिछले मैच में भी बहुत अच्छी ज़हीर जिस तरह की आक्रामकता लेकर आए हैं उसकी राहुल ने बहुत तारीफ़ की.क्या आपको लगता है कि उनकी इस शैली की वजह से टीम का जोश काफ़ी बढ़ा हुआ था मैदान पर? मेरे ख़्याल से उन्होंने मैदान पर बहुत नियंत्रित आक्रामकता दिखाई. मैं समझता हूँ कि सफलता नियंत्रित आक्रामकता से ही मिलती है. आक्रामकता में आप कई बार होश खो बैठते हैं लेकिन ज़हीर ने ऐसा नहीं होने दिया. भारतीय बल्लेबाज़ी के मध्य कम की काफ़ी आलोचना हुई थी.क्या भारतीय बल्लेबाज़ों ने अपनी क्षमता का असली परिचय अब जाकर दिया है, इस मैच में? भारतीय बल्लेबाज़ अपनी क्षमता का परिचय तो देते ही रहे हैं, लेकिन तरह-तरह के विचार भी होते हैं. कहीं इधर-उधर नाकाम भी रहे. इसका ये मतलब नहीं है कि भारतीय बल्लेबाज़ी का मध्य क्रम अयोग्य है. बरसों से भारतीय मध्य क्रम अपना काम करता रहा है, जो लोग चैलेंज करते हैं उन्हें भी एक बार सोचना चाहिए बोलने से पहले. सचिन आपके 11 हज़ार रन तो बन गए लेकिन आपका शतक पूरा नहीं हुआ. ग्यारह हज़ार रन पूरे करने की ख़ुशी तो हुई लेकिन साथ ही में निराशा भी हुई 91 रन पर आउट होने की.लेकिन ये सब चीज़ें तो चलती रहती हैं ज़िंदगी में. इसका ये मतलब नहीं है कि मैं इसके लिए रोता रहूँ, मैं चाहता हूँ कि ये सब चीज़ें मेरे पीछे रह जाएँ. मैं चाहता हूँ कि अगले मैच में कुछ कर दिखाऊँ और जो भी मेरे साथ हुआ है उसे भूल जाऊँ. ज़ाहिर है, आप इंग्लैंड में सिरीज़ जीतकर जाएँगे तो ये सब बातें तो भूल ही जाएँगे. बिल्कुल, ध्यान तो अगले मैच पर ही रहेगा, जो हुआ वह तो अतीत है. इस जीत से हमें जो आत्मविश्वास मिला है हम उसके साथ खेलना चाहेंगे लेकिन हम ओवरकॉन्फ़िडेंट नहीं होंगे. हाल के दिनों में ऐसी कई बातें आई हैं कि टीम में एकता नहीं है, सीनियर खिलाड़ियों के बीच ख़ास तौर पर मनमुटाव है. टीम में काफ़ी एकता रही है. ऐसा नहीं है कि टीम में फूट रही हो, लेकिन अलग-अलग लोगों की अपनी अपनी राय है. मैं तो लोगों से यही कहना चाहूँगा कि अलग-अलग विवाद शुरू न करें. ड्रेसिंग रूम में बहुत अच्छा माहौल रहता है, टीम हारे या जीते, बहुत अच्छा माहौल रहता है. जब जीतते हैं तो सारी टीम जीतती है और जब हम हारते हैं तो सारी टीम हारती है. ग़म सभी को होता है, खुशी सभी को होती है. टीम में बहुत एकता है इस पर कोई शक न करे. |
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