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सोमवार, 23 जुलाई, 2007 को 01:24 GMT तक के समाचार
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एक सपने का चकनाचूर होना....

सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर लॉर्ड्स पर शतक नहीं लगा पाए
तो चूक गए सचिन तेंदुलकर. मास्टर ब्लास्टर का बल्ला क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर कभी ठीक से नहीं चला और जब लॉर्ड्स पर अपनी 'आख़िरी टेस्ट' पारी की बात आई, तो शतक की उम्मीद लगाने के बावजूद नाकाम रहा यह सितारा.

ऐसा नहीं है कि सचिन अकेले ऐसे स्टार खिलाड़ी हैं, जो लॉर्ड्स पर शतक नहीं लगा पाए. सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले वेस्टइंडीज़ के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा भी लॉर्ड्स पर शतक नहीं लगा पाए.

लेकिन दुनिया का शायद ही कोई क्रिकेटर होगा जो लॉर्ड्स में शतक ना लगाना चाहे. कई रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले सचिन तेंदुलकर की भी ख़्वाहिश थी कि वे अपने टेस्ट जीवन में लॉर्ड्स पर शतक ज़रूर लगाएँ.

माना जा रहा है कि लॉर्ड्स के मैदान पर सचिन का ये आख़िरी टेस्ट मैच है. टेस्ट मैच शुरू होने से पहले सचिन ने कहा था कि वे अपना सपना पूरा करना चाहते हैं यानी इस मैदान पर शतक जड़ना चाहते हैं.

टेस्ट मैच से पहले अभ्यास मैच में शतक लगाने पर सचिन से उम्मीद भी थी कि वे ऐसा कर दिखाएँगे. लेकिन पहली पारी में ज़रूरत से ज़्यादा संभल कर खेल रहे सचिन 37 पर आउट हो गए तो दूसरी पारी में ज़रूरत के वक़्त भी सिर्फ़ 16 ही बना पाए.

ख़्वाहिश पूरी

सचिन का सपना जहाँ पूरा नहीं हो पाया, वहीं एक खिलाड़ी की ख़्वाहिश ज़रूर पूरी हुई. और वो खिलाड़ी हैं मोंटी पनेसर. इंग्लैंड का यह स्पिनर सचिन को अपना हीरो मानता है.

लेकिन ख़्वाहिश है मौक़ा मिलने पर अपने हीरो को चित्त करना. अपने टेस्ट जीवन का पहला विकेट सचिन तेंदुलकर के रूप में लेने वाले मोंटी पनेसर के लिए लॉर्ड्स टेस्ट एक बार फिर ख़ास ख़ुशियाँ लेकर आया.

ख़ुशी से झूम उठे मोंटी पनेसर

जब उन्होंने दूसरी पारी में सचिन तेंदुलकर को छकाया और सचिन भी गच्चा खा गए. गेंद सीधे पैड पर आकर लगी. अपील हुई और अंपायर स्टीव बकनर की उंगली क्या उठी, लॉर्ड्स पर भांगड़ा होने लगा.

मोंटी के पाँव ज़मीन पर नहीं पड़ रहे थे तो दूसरी ओर क्रिकेट की दुनिया का एक सितारा धीमे-धीमे, सिर झुकाए पवेलियन की ओर लौट रहा था.

जी हाँ, ये क्षण था एक खिलाड़ी का सपना चूर-चूर होने का तो दूसरे की ख़्वाहिश पूरी होने का. जब मोंटी पनेसर ने सचिन के रूप में अपना पहला टेस्ट विकेट लिया था, तो उस गेंद पर अपने हीरो का ऑटोग्रॉफ़ भी लिया.

सचिन ने उस पर लिखा था- ऐसा फिर नहीं होगा यानी मोंटी उन्हें फिर आउट नहीं कर पाएँगे. लेकिन ऐसा हुआ और लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर हुआ. जहाँ शतक लगाने की आस लगाए सचिन को निराश लौटना पड़ा.

ऐसी निराशा जो शायद ही सचिन कभी भूल पाएँगे.

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