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'टीम में चयन की उम्मीद ही नहीं थी'

रणदेब बोस
रणदेब बोस बंगाल की ओर से रणजी खेलते हैं
इंग्लैंड दौरे पर जा रही भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किए गए पश्चिम बंगाल के तेज़ गेंदबाज रणदेब बोस का कहना है कि पहले वो भारतीय टीम में खेलने के लायक नहीं थे.

पिछले साल खेले आठ प्रथम श्रेणी मैचों में 57 विकेट लेने वाले तेज़ गेंदबाज़ रणदेब ने बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में ऐसा कहा है.

बीबीसी संवाददाता से बात करते हुए बोस ने कहा कि इस दौरे पर उन्हें भारतीय टीम में शामिल होने की उम्मीद नहीं थी.

उन्होंने बताया, "मैं विश्वकप के तीस संभावित खिलाडियों और बांग्लादेश के दौरे पर गई टीम का हिस्सा नहीं था. इसलिए मुझे इंग्लैंड जाने वाली टीम में अपने चयन की कोई संभावना नहीं दिख रही थी. जब बंगाल क्रिकेट ऐसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि मेरा चयन हो गया है तो बहुत ख़ुशी हुई."

रणदेब बोस 28 साल की उम्र में टीम में चुने गए हैं और पिछले लगभग आठ सालों से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल रहे हैं.

उनसे जब ये पूछा गया कि यदि चयन पहले हुआ होता तो क्या वे ज़्यादा ख़ुश होते तो बोस का कहना था, "देर आए दुरुस्त आए. अपने करियर के पहले पाँच-छह साल मैं अच्छी क्रिकेट नहीं खेल पाया था. मुझे बंगाल की टीम में स्थापित होने में ही चार-पाँच साल लग गए."

 मैं आपको ईमानदारी से बताऊँ तो मैं पहले पाँच-छह साल भारतीय टीम में खेलने के योग्य नहीं था. लेकिन बाद में मैंने अच्छा क्रिकेट खेला और भारतीय टीम में खेलने के सपने देखने लगा. पिछले तीन साल में मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है और इसके लिए मैंने बहुत मेहनत की है
रणदेब बोस

वो कहते हैं, "मैं आपको ईमानदारी से बताऊँ पहले पांच-छह साल भारतीय टीम में खेलने के योग्य नहीं था. लेकिन बाद में मैंने अच्छा क्रिकेट खेला और भारतीय टीम में खेलने के सपने देखने लगा. पिछले तीन साल में मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है और इसके लिए मैंने बहुत मेहनत की है."

अपनी खेल तकनीकी में रणदेब बोस ने पिछले सालों में बहुत बदलाव किया है जिससे उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ.

खेल तकनीकी में बदलाव करने के बारे में बोस बताते हैं,"पारस म्हाम्ब्रे पिछले दो साल से बंगाल के कोच हैं. हमारा बॉलिंग स्टाइल काफ़ी हद तक एक जैसा ही है. उन्होंने मेरे साथ बहुत मेहनत की है. वो मेरे पिछले कोच गोपाल बोस से भी संपर्क में थे. मेरी खेल तकनीकी बदलने में दोनों ने ही सहायता की है."

वो बताते हैं,"पारस ने न सिर्फ़ मेरा खेल सुधारने में सहायता की बल्कि मुझे मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी बहुत मज़बूती प्रदान की."

दौरे की तैयारी पर रणदेब बोस कहते हैं,"मुझे लगता है कि यदि इस विषय में मैं सचिन, सौरव और ज़हीर जैसे सीनियर खिलाड़ियों से बात कर सकूँ तो मुझे काफ़ी फ़ायदा हो सकता है. बंगाल टीम के कोच पारस म्हाम्ब्रे अभी इंग्लैंड में ही हैं. वहाँ पहुँचकर मैं उनसे भी खेल की तकनीकी पर चर्चा करुँगा."

इंग्लैंड के खिलाड़ियों के खिलाफ़ रणदेब अपनी जांची-परखी तकनीक ही अपनाना चाहेंगे.

इस मुद्दे पर वो कहते हैं, "पूरी टीम के साथ ही रणनीति बनेगी. इंग्लैंड की टीम में बहुत से अच्छे खिलाड़ी हैं. केविन पीटरसन बहुत ही ख़तरनाक खिलाड़ी है. मैं अपनी पुरानी जांची-परखी तकनीकी ही अपनाऊँगा. मैं अपनी तरफ़ से 100 फ़ीसदी देने की कोशिश करूँगा."

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