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डेम्पो ने फिर जीती राष्ट्रीय फ़ुटबॉल लीग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में फ़ुटबॉल की सबसे बड़ी प्रतियोगिता मानी जाने वाली 11वीं राष्ट्रीय फ़ुटबॉल लीग सबसे ज़्यादा 36 अंकों के साथ डेम्पो स्पोर्ट्स क्लब ने एक बार फिर जीत ली है. पिछले तीन सालों में इस टूर्नामेंट में यह उसकी दूसरी ख़िताबी जीत है. अभी टूर्नामेंट के ख़त्म होने में कुछ मैच और बचे हैं पर इसके आयोजन को लोकर कई ख़ामियाँ सामने आई हैं. फुटबॉल विशेषक्ष ग़ौस मोहम्मद ने आरोप लगाया कि मैच रेफ़री की भूमिका ठीक नहीं रही है. वे कहते हैं,'' रेफ़रियों की भूमिका कई महत्वपूर्ण मैचों में संदेहास्पद रही है. टीमें हमेशा रेफ़रियों को लेकर संशकित रहीं. भारतीय फ़ुटबाल महासंघ को इस पर ध्यान देना होगा.'' लेकिन पिछले 11 सालों से राष्ट्रीय लीग में फ़ीफ़ा द्वारा मान्यता प्राप्त किए हुए रेफ़री रिज़वान उल हक़ ने टीमों को ही कठघरे में खड़ा किया है. वे कहते हैं,''रेफ़री को लेकर पूरी दुनिया में समस्या है. टीमों को प्रशिक्षित किए जाने की ज़रूरत है, खिलाड़ियों को नियमों के बारे में जानकारी नहीं है. इस वजह से हम सही फ़ैसला भी देते हैं तो उन्हें ग़लत लगता है.'' अगले साल से राष्ट्रीय लीग प्रोफ़ेशनल फुटबॉल लीग हो जाएगी और इसमें कई बदलाव होंगे. ग़ौस मोहम्मद के अनुसार कई महत्वपूर्ण बदलाव होंगे. वे कहते हैं,''नई लीग के लिए सभी क्लबों के कोचों को फ़ीफ़ा से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा लेना होगा. जैसे सुखविंदर ने अपनी टीम को चैंपियन बनाया है और भारतीय टीम के कोच रह चुके हैं लेकिन उनके पास फ़ीफ़ा से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा नहीं है.'' डेम्पो के कोच आरमांडो क्लासो का भी मानना है कि कोचों को शिक्षित किया जाना ज़रूरी है. इसके अलावा हर क्लब को प्रोफ़ेशनल लीग के मैचो के लिए अपना ख़ुद का मैदान भी मुहैया कराना होगा. ग़ौस मोहम्मद कहते हैं, '' प्रोफ़ेशनल लीग में टीम को मैच के लिए मैदान ख़ुद ही उपलब्ध कराना होगा. कुछ ही क्लबों के पास अपना मैदान है और जिनके पास है भी तो स्तरीय नहीं है.'' ज़मीनी बदलाव ये तो हुई नियमों में बदलाव की बात. कुछ मूलभूत बदलाव भी करने होंगे जिससे भारत में फ़ुटबॉल का स्तर बढ़ा सके. एयर इंडियो के कोच बिमल घोष का कहना है कि हर क्लब विदेशी खिलाड़ियों पर ज़्यादा निर्भर है. बिमल कहते हैं,'' जब तक घरेलू खिलाड़ियों पर क्लब की निर्भरता नहीं बढ़ेगी तक देश में फ़ुटबाल का स्तर नहीं उठेगा. '' कुछ दिनों पहले भारतीय फ़ुटबॉल का जायजा लेने आए फ़ीफ़ा के अध्यक्ष सैप ब्लेटर ने भारत में बुनियादी सुविधाओं पर चिंता प्रकट की थी. रिज़वान उल हक़ ने खिलाड़ियों को सुविधाएँ दिलाए जाने की माँग करते हैं. वे कहते हैं, '' खिलाड़ियों को उचित चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जानी चाहिए.'' जबकि अरमांडो क्लासो का कहना की राष्ट्रीय लीग के अलावा खिलाड़ियों का ज़्यादा से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ खिलाई जानी चाहिए, जिससे उनके खेल में सुधार आ सके. पहले राष्ट्रीय लीग और अब प्रोफ़ेशनल लीग, लेकिन क्या यह बदलाव भारतीय फ़ुटबाल को अंतरारष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला पाएँगे.सबको उम्मीद है कि शायद नई लीग भारतीय फ़ुटबॉल में ऐसा दिन ले आए जिसकी सुबह अभी तक नहीं हुई है. | इससे जुड़ी ख़बरें फ्रांस के प्लातिनी बने यूएफ़ा अध्यक्ष26 जनवरी, 2007 | खेल कैनावारो सर्वश्रेष्ठ यूरोपीय फुटबॉलर27 नवंबर, 2006 | खेल ईरान को फ़ीफ़ा ने निलंबित किया23 नवंबर, 2006 | खेल पूर्व कप्तान सत्यन ने आत्महत्या की18 जुलाई, 2006 | खेल पीड़ा एक होनहार फ़ुटबॉल खिलाड़ी की09 जुलाई, 2006 | खेल जयपुर में बन रही हैं फुटबॉल की पताकाएँ06 जून, 2006 | खेल ओलंपिक खेलों में भारत का सफ़र21 जुलाई, 2004 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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