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जयपुर में बन रही हैं फुटबॉल की पताकाएँ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी में आयोजित विश्वकप फ़ुटबॉल में भारत की जीत का परचम भले ही ना लहराए लेकिन विश्वकप विजेता के हाथों में भारत में बनी पताका लहरा सकती है. जयपुर की एक फर्म ने ब्राजील, ब्रिटेन, जर्मनी, कोरिया, इटली और पुर्तगाल के झंडे तैयार कर जर्मनी भेजे हैं. भाँति भाँति के रंग, आकार और राष्ट्रचिन्ह से परिपूर्ण इन देशों के झंडे जयपुर के एक व्यापारिक प्रतिष्ठान छगनलाल एंड संस ने तैयार कर निर्यात किए हैं. अपनी इस भूमिका से हर्षित छगनलाल एंड संस के विष्णु अग्रवाल ने बीबीसी से कहा, ''मेरे लिए यह एक व्यापारिक सौदे से ज़्यादा भारतीय गौरव की बात है.'' इस फर्म ने इन प्रत्येक देशों के लिए दस हज़ार झंडे तैयार कर जर्मनी भेजे हैं. उनका दावा है कि भारत में वो अकेले ऐसे निर्यातक हैं जिन्होंने ये झंडे बनाए हैं. विष्णु अग्रवाल को विभिन्न देशों के राष्ट्रीय ध्वज बनाने का काम इंटरनेट के जरिए मिला. वो बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ की साइट से उन्होंने इन देशों के कौमी परचम की स्वीकृति ली और पोलिस्टर के 30 गुना 45 और 16 गुना 24 आकार के ध्वज तैयार किए. सावधानी प्रत्येक झंडे पर 15 रुपए की लागत आई. चूंकि किसी राष्ट्र का ध्वज बहुत नाजुक विषय होता है. इसलिए ध्वज निर्माण में बहुत एहतियात बरती गई. इन झंडों की खूबी यह है कि इसके किनारों पर पारंपरिक सिलाई नहीं की गई है और अलग ढंग से तैयार किए गए हैं. अग्रवाल कहते हैं इससे ये झंडे हवा में लहराने में आसान होंगे. झंडों का ऑर्डर मिला तो श्री अग्रवाल का पूरा परिवार इसमें जुट गया. वो कहते हैं हमें दस दिन लगे काम को पूरा करने में. अब हमें आत्मिक संतेष मिला है. छगनलाल एंड संस को अब तक चुनाव सामग्री और भाजपा व काँग्रेस के झंडे तैयार करने का अनुभव रहा है. लेकिन राजनीतिक झंडे बनाने का यह कौशल फ़ुटबॉल के मैदान पर कितना रंग जमाएगा, कहना मुश्किल है. इतना तय है कि जिस दिन विश्वकप का निर्णय होगा, जयपुर के लोगों की नज़रें इस पर लगी रहेंगी कि विजेता के हाथ में किसका परचम है. |
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