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लारा के साथ होड़ नहीं: सचिन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वनडे और टेस्ट क्रिकेट में दर्जनों रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके सचिन दुनिया में जहाँ भी जाते हैं, एक सवाल उनका पीछा नहीं छोड़ता. कौन है दुनिया का सबसे महान बल्लेबाज़, सचिन या लारा? लारा के देश त्रिनिदाद में बोलते हुए सचिन ने कहा, "इस बात से हम दोनों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि ज़्यादा रिकॉर्ड किसके नाम हैं. ज़्यादा महत्व इस बात का है कि हम आने वाली पीढ़ी को किस तरह रास्ता दिखाते हैं." सचिन कहते हैं, "हमें ख़ुशी है कि हम क्रिकेट दुनिया को कुछ यादगार साल दे पाए. हम एक दूसरे की बहुत इज्जत करते हैं, बहुत अच्छे दोस्त भी हैं और हमारे लिए यही अहम है." यह पूछे जाने पर कि क्या लारा के साथ क्रिकेट के मैदान पर उनका कोई मुक़ाबला नहीं, सचिन बोले, "मुक़ाबला कभी दो खिलाड़ियों के बीच नहीं होता बल्कि दो टीमों में होता है." वो कहते हैं, "व्यक्तिगत तौर पर ऐसा कुछ नहीं है लेकिन हमारी टीमों के बीच जब भी मुक़ाबला होता है तब हम ज़रूर अपने-अपने देश को जितवाने के लिए जी-जान लगा देते हैं." अति-आत्मविश्वास घातक होगा सचिन का मानना है कि विश्व कप 2007 में कोई भी टीम आगे निकल सकती है इसलिए भारत को हर वक़्त सतर्क रहना होगा. उनके मुताबिक़ जो भी टीम जीतना शुरू कर देगी और जल्दी लय पा लेगी, वो टूर्नामेन्ट में काफ़ी दूर तक जाएगी. सचिन ने कहा, "भारत के आसार अच्छे हैं लेकिन यह सुनिश्चित करना ज़रूरी होगा कि आत्मविश्वास एक सीमा के अंदर ही रहे." विश्व कप के शुरुआती दौर में भारत को अपने ग्रुप की बाक़ी तीन टीमों से एक-एक मैच खेलना है. पहला मैच है 17 तारीख़ को बंग्लादेश से, दूसरा 19 को बर्मूडा से और तीसरा और सबसे बड़ा मैच है श्रीलंका के ख़िलाफ़ 21 तारीख़ को. इस ग्रुप के सभी मैच त्रिनिदाद में खेले जाने हैं जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं. सचिन ने कहा, "मुझे याद है कि पिछली बार 2002 में जब भारत यहाँ खेला था, तब स्थानीय लोगों का समर्थन पा कर खिलाड़ी काफ़ी ख़ुश थे." उन्होंने अपील की है कि वो सब लोग हमेशा की तरह भारतीय क्रिकेट टीम का उत्साह ,बढ़ाने के लिए स्टेडियम में ज़रूर आएँ. अलग विश्व कप वनडे क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले मास्टर ब्लास्टर ने पिछले कई महीनों में ख़राब समय देखा है लेकिन पिछले कुछ मैचों में उन्होंने पुरानी फ़ॉर्म में लौटने के संकेत दिए हैं. सचिन भारतीय वनडे टीम के सबसे सीनियर खिलाड़ी और उपकप्तान भी हैं इसलिए रणनीति बनाने में और टीम से जुड़े फ़ैसले करने में उनकी भूमिका अहम होती है.
उनका कहना है कि फ़िलहाल तो वो सिर्फ़ ग्रुप मैचों के बारे में सोच रहे हैं. सुपर एट दौर के मुश्किल मैचों की तैयारी बाद में होगी. ब्रायन लारा और इंज़माम उल हक़ के साथ अपना पाँचवाँ विश्व कप खेल रहे सचिन का मानना है कि इस बार का टूर्नामेन्ट पिछले मुक़ाबलों से अलग है. उन्होंने कहा, "इस बार हर टीम को दूसरी हर टीम से खेलना है यानी हर मैच के लिए अलग तैयारी और लचीलापन चाहिए." आख़िरी विश्व कप..? अपने करियर में कई बार चोट की वजह से लंबे समय तक बाहर रहे सचिन से पूछा गया कि क्या यह लारा की तरह उनका भी आख़िरी विश्व कप है, तो सचिन बोले, "पता नहीं, 2011 अभी काफ़ी दूर है, देखते हैं मेरा शरीर मैदान पर मेरा कैसा साथ देता है उसी के हिसाब से मैं देखूँगा कि मुझे और कितने समय तक खेलना है." क्रिकेट इतिहास के सबसे महान बल्लेबाज़ों में से एक सचिन तेंदुलकर से फ़िलहाल तो भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की यही उम्मीद है कि वो पिछले विश्व कप की तरह जादू की छड़ी यानी अपना बल्ला घुमाएँ और भारत को 24 साल बाद एक बार फिर विश्व कप दिलाएँ. | इससे जुड़ी ख़बरें ...तो कैन छोड़ देंगे सचिन का कैच 14 मार्च, 2007 | खेल विश्व कप क्रिकेट की रंगारंग शुरुआत11 मार्च, 2007 | खेल 'विश्व कप में खेलने का पूरा भरोसा था'10 मार्च, 2007 | खेल भारतीय क्रिकेट का सुनहरा पल08 मार्च, 2007 | खेल 'हम भी किसी से कम नहीं'06 मार्च, 2007 | खेल लारा को 'बेहतरीन विदाई' की उम्मीद05 मार्च, 2007 | खेल मुझ पर कोई दबाव नहीं है:सचिन04 मार्च, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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