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फ़ुटबॉल स्टेडियमों की सुरक्षा पर सवाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी में होने वाले फ़ुटबॉल विश्व कप के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले स्टेडियमों की दशा के बारे में विवाद खड़ा हो गया है. जर्मनी के एक उपभोक्ता संगठन ने रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि पाँच में से चार स्टेडियमों में सुरक्षा के हिसाब से कई ख़ामियाँ हैं. एक स्टेडियम को आग लगने की सूरत में असुरक्षित बताया गया है. जबकि बाकी तीनों स्टेडियमों के बारे में कहा गया है कि उनमें गढ्ढे और कई तरह के अवरोधक हैं और आपात स्थिति में लोग आसानी से भाग नहीं सकते. इन पाँच स्टेडियमों में बर्लिन का नाम भी शामिल है रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि आठ अन्य स्टेडियमों में भी कमियाँ हैं. इनमें हैमबर्ग, हैनओवर, फ़्रैंकफ़र्ट, म्यूनिख़ और न्यूरमबर्ग के स्टेडियम शामिल हैं. उपभोक्ता संगठन के प्रवक्ता ने कहा है कि रिपोर्ट इसलिए जारी की गई है ताकि स्टेडियम में कमियों के बारे में क़दम उठाए जा सकें.
लेकिन जर्मनी फ़ुटबॉल एसोसिएशन ने उपभोक्ता संगठन के आरोपों से इनकार किया है. फ़ुटबॉल एसोसिएशन ने तुरंत ही पत्रकार वार्ता बुलाई और आरोपों का खंडन किया. विश्व कप आयोजन कमेटी के उपाध्यक्ष ने कहा, “एक ग़लत धारणा बनाई गई है कि स्टेडियम सुरक्षित नहीं है. इन स्टेडियमों की हर हफ़्ते जाँच होती है.” न्यूरमबर्ग के स्टेडियम मैनेजर का कहना था कि जिन कमियों की बात की गई है उनका कारण हाल ही में स्टेडियम में किया गया काम है और विश्व कप शुरू होने से पहले इन्हें दूर कर दिया जाएगा. इस मसले पर जर्मनी के कैबिनेट मंत्रियों ने कहा है कि मामले की जाँच होगी. जर्मनी ने इन स्टेडियमों पर एक अरब पाउंड खर्च किए हैं जिसके चलते स्टेडियमों के असुरक्षित होने के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है. फ़ुटबॉल विश्व कप नौ जून को म्यूनिख़ में शुरू हो रहा है और फ़ाइनल नौ जुलाई को बर्लिन में होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें विश्व कप फ़ुटबॉल की एशियाई टीमें तय08 जून, 2005 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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