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सानिया मिर्ज़ा बनना चाहती हैं नंबर वन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा का अगला लक्ष्य है दुनिया की शीर्ष 50 खिलाड़ियों में बने रहना और एक दिन विश्व की नंबर एक खिलाड़ी बनना. सानिया इस समय दुनिया की 47वें नंबर की खिलाड़ी हैं. हाल ही में चोटी की 50 टेनिस खिलाड़ियों में जगह बनाने वाली सानिया मिर्ज़ा अब वहाँ जमे रहना चाहती हैं और एक दिन दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनने का सपना देख रही हैं. सानिया के पिता इमरान मिर्ज़ा ने बीबीसी को बताया, "सानिया ने इस साल के अंत तक टॉप 50 में पहुँचने का लक्ष्य रखा था जो महीनों पहले ही पूरा हो गया है. अब अगला लक्ष्य है इस ख़ास मुक़ाम पर बने रहना क्योंकि यहाँ से फिसल कर नीचे आना बहुत आसान होता है." अगर सानिया लगातार शीर्ष खिलाड़ियों की सूची में बनी रहती हैं तो उन्हें ग्रैंड स्लैम और अन्य ऊँचे टूर्नामेंटों में वरीयता मिलने के अच्छे आसार हैं. इमरान मिर्ज़ा ने कहा, "उम्मीद है कि इन ऊँची प्रतियोगिताओं में या किसी ग्रैंड स्लैम में वो आगे तक जाएँगी जिससे उनकी रैंकिंग और ऊपर उठेगी." ये पूछे जाने पर कि सानिया का अंतिम लक्ष्य क्या है, उनके पिता ने कहा, दिमाग़ में तो है कि एक दिन वो दुनिया की चोटी की खिलाड़ी बनें लेकिन फ़िलहाल तो ये सिर्फ़ एक सपना ही है. अभी तो टॉप 10 में जाना भी दूर है. जब वो इस लक्ष्य के क़रीब आ जाएँगी तो और मुमकिन लगने लगेगा. "जब सानिया ने शुरुआत की थी तो मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो इतना आगे तक जाएँगी." इमरान मिर्ज़ा के मुताबिक़ सानिया में चोटी तक पहुँचने की काबिलियत भी है. वो कहते हैं कि ये सब क़िस्मत पर भी निर्भर करता है और सानिया को अब भी काफ़ी कुछ साबित करना है कि वो शीर्ष स्तर पर बने रह सकती है. 'सीखना है' कई नामी खिलाड़ियों को मात दे चुकी सानिया बड़ी प्रतियोगिताओं के दूसरे-तीसरे दौर तक पहुँच कर लड़खड़ा क्यों जाती हैं. इसके जवाब में इमरान मिर्ज़ा कहते हैं, "ये इस शीर्ष स्तर पर उसका पहला सत्र है और उसे अभी बहुत कुछ सीखना है. वैसे भी शीर्ष 100 खिलाड़ियों के खेल में ज़्यादा फ़र्क नहीं होता इसलिए हार जीत तो लगी रहती है." इमरान मिर्ज़ा ने बताया कि सानिया थोड़ी निराश हैं क्योंकि वो अमरीका में चल रही एक्युरा क्लासिक टेनिस चैंपियनशिप में 61वें नंबर की जापानी खिलाड़ी अकीको मोरीगामी से हार गईं. हालाँकि विंबलडन में वो मोरीगामी को हरा चुकी हैं लेकिन यहाँ तीसरे दौर में उनसे कड़े मुक़ाबले में मात खा गईं पर इस प्रतियोगिता से बाहर होने से पहले सानिया ने विश्व में 47वाँ स्थान पाकर इतिहास तो रच ही दिया. वो दुनिया के 50 शीर्ष खिलाड़ियों में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं. लिएंडर पेस जब अपने चरम पर थे, वो भी सिंगल्स में 73वें नंबर से ऊपर नहीं जा सके थे. अब सानिया यू एस ओपन ग्रैंड स्लैम की तैयारी में हैं जहाँ उनका प्रदर्शन प्रतियोगिता के ड्रॉ पर भी निर्भर करता है. यूएस ओपन से पहले सानिया तीन और प्रतियोगिताओं में खेलना चाहती हैं लेकिन ये भी निर्भर करेगा कि उनकी पेट की मांसपेशी में लगी चोट कितनी जल्दी ठीक होती है. सानिया अब अगले हफ़्ते लॉस एंजिलिस में होने वाली प्रतियोगिता में उतरेंगी. |
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