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'हास्यास्पद' रेस में माइकल शूमाकर जीते | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुछ समय पहले तक फ़ॉर्मूला वन रेसिंग के उस्ताद माने जाने वाले माइकल शूमाकर ने अमरीकी ग्रां प्री में इस साल की अपनी पहली रेस तो जीत ली लेकिन वे भी अपनी इस जीत को शायद ही कभी भूल पाएँ. अमरीकी ग्रां प्री में उनकी जीत इतिहास में दर्ज हो गई है. फ़ॉर्मूला वन के इतिहास में पहली बार हुई इस हास्यास्पद रेस में सिर्फ़ छह फ़ॉर्मूला वन ड्राइवरों ने हिस्सा लिया. सात ड्राइवरों को रेस में इसलिए हिस्सा लेने से रोक दिया गया क्योंकि कार निर्माताओं ने उनकी कार की मिचेलिन टायरों को असुरक्षित घोषित कर दिया. जिन तीन टीमों को रेस में उतरने की अनुमति मिली वे थीं- फ़ेरारी, जॉर्डन और मिनार्डी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ये टीमें अपनी कार में ब्रिजस्टोन टायर का इस्तेमाल करती हैं. इस अजीबो-ग़रीब रेस का फ़ायदा भारत के पहले फ़ॉर्मूला वन ड्राइवर नारायण कार्तिकेयन को भी हुआ. जॉर्डन टीम के ड्राइवर नारायण कार्तिकेयन ने छह ड्राइवरों में चौथा स्थान हासिल किया. जॉर्डन टीम के उनके साथी खिलाड़ी टिएगो मॉन्टिएरो को तो तीसरा स्थान मिला. फ़ेरारी के ही ड्राइवर रुबिन बैरिकेलो को दूसरा स्थान मिला. दर्शक नाराज़ लेकिन इंडियानापोलिस सर्किट पर हुई इस रेस से दर्शक इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने रेस सर्किट पर बोतल, कैन और अन्य चीज़ें फेंकी.
नाराज़ दर्शकों ने आयोजकों से टिकट की राशि लौटाने की मांग की. कई दर्शक तो रेस बीच में छोड़कर ही चले गए. दरअसल सारा विवाद शुक्रवार को उस समय शुरू हुआ जब टोयोटा की सवारी कर रहे राफ शूमाकर की कार का टायर अचानक फट गया. टायर बनाने वाली कंपनी मिचेलिन घटना का कारण नहीं बता पाई और उसने कह दिया कि वे ड्राइवरों की सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकते. मिचेलिन और ज़्यादातर टीमों की मांग की सर्किट के सबसे तेज़ हिस्से पर अवरोध खड़ा किया जाए ताकि कारों की गति कम हो सके. एक विकल्प यह भी रखा गया कि फ़्रांस से नए टायर मंगा लिए जाएँ. लेकिन आयोजकों और अधिकारियों ने इसकी अनुमति नहीं दी, जिसके बाद मिचेलिन टायर का इस्तेमाल कर रहे सात ड्राइवरों को रेस से हट जाना पड़ा. जीत के बाद शूमाकर ने भी संभल कर प्रतिक्रिया दी. शूमाकर ने कहा, "यह बड़ी आश्चर्यजनक रेस थी. मैं भी साल की अपनी पहला रेस इस तरह तो नहीं जीतना चाहता था." लेकिन शूमाकर ने माना कि इस साल की पहली रेस जीतकर उन्हें ज़्यादा बुरा भी नहीं लग रहा है. |
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