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कार्तिकेयनः फ़ॉर्मूला वन में पहले भारतीय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्ट्रेलियन ग्राँ प्री के साथ फॉर्मूला वन की शुरूआत रविवार से मेलबर्न में होने जा रही है और इस बार भारतीय लोग भी इसमें ख़ास दिलचस्पी लेने वाले हैं. कारण है 27 वर्षीय नारायण कार्तिकेयन का इस रेस में शामिल होना, वे फ़ार्मूला वन में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय हैं. उन्होंने अपने बुलंद हौसले का परिचय पहली क्वालिफ़ायर रेस में ही दे दिया जब वे सात बार के चैंपियन माइकल शूमाकर को पीछे छोड़ते हुए नौवें स्थान पर आए. उन्हें जीत हासिल करने की कितनी जल्दी है इसका अंदाज़ा तब मिला जब उनके ऊपर 'पिट लेन' में निर्धारित सीमा से तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाने के लिए जुर्माना लगा. 86 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से अपनी जॉर्डन कार चला रहे कार्तिकेयन पर 6750 डॉलर का जुर्माना लगाया गया है क्योंकि पिट लेन में ड्राइवरों को गाड़ी धीरे चलाने के निर्देश हैं. बदलाव क्रिकेट के दीवाने देश भारत में मोटर रेसिंग में बहुत कम लोगों की दिलचस्पी है, जिनकी दिलचस्पी है भी वे शहरों में रहने वाले ख़ासे अमीर नौजवान हैं. लेकिन नारायण कार्तिकेयन की ताज़ा सफलता से लगता है कि यह स्थिति बदल सकती है, भारत में टीवी, अख़बारों और पत्रिकाओं में हर जगह उनकी तस्वीरें नज़र आ रही हैं. भारत में तो लोग फ़िलहाल इसी बात से ख़ुश हैं कि कार्तिकेयन फ़ार्मूला वन रेस तक पहुँच गए हैं, रविवार को जब उनकी गाड़ी हवा से बातें कर रही होगी तो भारत में बहुत सारे लोग दम साधे टीवी देख रहे होंगे. भारत जैसे देश में जहाँ फ़ार्मूला वन रेसिंग ट्रैक भी नहीं है, कार्तिकेयन का इस मुकाम तक पहुँचना वाक़ई बड़ी उपलब्धि रहा है. पिछले चार वर्षों में कार्तिकेयन ने जॉर्डन, जगुआर और मिनार्दी की गाड़ियों पर हाथ आज़माया और अब आख़िरकार उन्हें जॉर्डन चलाने का मौक़ा मिल गया है. |
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