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नारायण कार्तिकेयन ने उम्मीदें जगाईं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के नारायण कार्तिकेयन को फ़ॉर्मूला-1 दौड़ में शामिल होने का गौरव हासिल हो रहा है. इस प्रतिष्ठित दौड़ में स्थान पाने वाले वह भारत के पहले कार चालक हैं. उन्हें इसी साल होने वाली जॉर्डन फॉर्मूला-1 विश्व कार दौड़ में भाग लेने का मौक़ा मिलेगा. 28 वर्षीय नारायण कार्तिकेयन को यह स्थान मिल तो गया है लेकिन अभी एक मुश्किल भी है. उन्हें यह स्थान बिल्कुल पक्का करने के लिए प्रायोजक तलाशने हैं. नारायण के साथी चालक होंगे पुर्तगाल के टियागो मोंटीरो जिन्होंने 2004 की दौड़ में निसान विश्व सीरिज़ में दूसरा स्थान हासिल किया था. जॉर्डन कंपनी को पिछले महीने रूसी धनी अलेक्स श्नाइडर के मिडलैंड समूह ने ख़रीदा था. जॉर्डन के खेल निदेशक टेरी कार्लिन ने इन दोनों कार चालकों को चुनने में कोई देरी नहीं की. टैरी कार्लिन का कहना था, "हमने इन दोनों कार चालकों को चुनकर वाक़ई एक ऐसी टीम बनाई है जिसमें जोश, तकनीकी क्षमता, प्रतिभा और रफ़्तार का बेहतरीन संगम है." टेरी का कहना था कि वह नारायण को अच्छी तरह जानते हैं क्योंकि नारायण 1998 में फ़ॉर्मूला-3 में उनके लिए दौड़ की थी और उसके बाद से उन्होंने नारायण को अनेक दौड़ों में शामिल कराया है. टेरी ने कहा, "हमने बहुत सारी दौड़ें साथ जीती हैं, वह बहुत सक्षम चालक हैं, एक बहुत ही धमाकेदार चालक, कभी-कभी वह अपनी साहसिक शैली में कुछ अजीब भी नज़र आते हैं लेकिन यह साबित हो चुका है कि वह एक विजेता कार चालक हैं और मुझे भरोसा है कि वह हमारे साथ भी ऐसे ही आगे बढ़ेंगे." नारायण कार्तिकेयन ने ब्रितानी फ़ॉर्मूला-3 और निसान विश्व श्रंखला में अच्छी कामयाबी हासिल की थी और अब भारत के लिए एक बड़ी ज़िम्मेदारी और उम्मीदें उनके कंधों पर आ गई हैं. "अब मेरे साथ एक देश की उम्मीदें जुड़ गई हैं इसलिए मेरे पास जीतने के अलावा अब और कोई विकल्प नहीं है." नारायण का कहना था, "मैंने अपनी कुशलता और क्षमता को तीन विभिन्न फ़ॉर्मूला कार दौड़ों में आज़माया है और इस दौड़ में अपना सबकुछ आज़माने जा रहा हूँ." नारायण कार्तिकेयन ने उम्मीद ज़ाहिर की कि यह साल उनके लिए अच्छा रहेगा. |
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