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ईरान की 'लिटिल शूमाकर' सम्मानित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के इतिहास में पहली बार महिला कार चालकों को एक कार रेसिंग मुक़ाबले में सम्मानित किया गया है. इन्हीं महिलाओं में थी एक ऐसी महिला जिसे ईरान के लोग मानते हैं कि वह रेसिंग में पुरुषों को भी पछाड़ सकती हैं. नीले हिजाब में लालेह सेदिग़ जब स्टेज पर चढ़ीं तो लोगों ने तालियों के साथ उनका ज़ोरदार स्वागत किया. ईरान में 28 वर्षीया लालेह अपनी ख़ूबसूरती और कार चलाने की बेहतरीन क्षमता के लिए जानी जाती हैं. तेहरान में पीएचडी की छात्रा लालेह को वहाँ लोग, जर्मनी के फ़ॉर्मूला वन रेसिंग चैंपियन माइकल शूमाकर के नाम पर ‘अ लिटिल शूमाकर’ के नाम से भी जानते हैं. अब उन्हें ईरान की ‘सर्वश्रेष्ठ महिला चालक’ का ख़िताब दिया गया है. 'प्रतिभा से अन्याय'
मगर कई लोगों को लगता है कि ये ख़िताब उनकी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं करता. पिछले दो वर्षों में लालेह ईरान की सबसे प्रतिभाशाली कार चालक के रूप में उभरी हैं और इस दौरान उन्होंने इस क्षेत्र के कई प्रमुख पुरुष चालकों को भी पछाड़ा है. इस बारे में जब ख़ुद लालेह से पूछा गया तो उनका कहना था, “मेरे ख़्याल से उनमें से अधिकतर मुझसे ईर्ष्या करते हैं मगर मैं उनकी परवाह नहीं करती और मैं आगे बढ़ती ही जा रही हूँ.” लालेह अगले वर्षों में चैंपियन होने की उम्मीद रखती हैं. वैसे उन्हें लगता है कि ईरान में पुरुषों के साथ मुक़ाबला करना आसान काम नहीं होगा मगर उन्हें उम्मीद है कि उनके उदाहरण से और महिलाएँ इस क्षेत्र में आगे आएँगी. ईरानी महिलाओं के बीच अब कार रेसिंग काफ़ी लोकप्रिय हो रही है. इस साल के पहले पुरस्कार के लिए लगभग 30 महिलाओं ने हिस्सेदारी की मगर उन्हें पुरुषों के साथ उसी वर्ग में मुक़ाबला करने नहीं दिया गया और उन्हें अलग से सम्मानित किया गया. अब तक इतनी सफलताएँ मिलने के बावजूद लालेह अपना प्रदर्शन और सुधारना चाहती हैं और आगे इससे भी कड़े मुक़ाबलों के बावजूद वह निडर हैं, अडिग हैं. वैसे अब भी उन्हें इंतज़ार है आने वाले मुक़ाबलों में पुरुषों के साथ मैदान में उतरने का. |
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