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कार्तिकेयन 15वें नंबर पर रहे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़ॉर्मूला वन रेस में भाग लेने वाले पहले भारतीय नारायण कार्तिकेयन ऑस्ट्रेलियाई ग्रां प्री रेस में 15 वें नंबर पर रहे. इटली के जियानकार्लो फिसिशेला ने रेस जीती जबकि सात बार के विश्व विजेता माइकल शूमाकर रेस पूरी नहीं कर सके. मेलबोर्न में फ़ॉर्मूला वन सीज़न की पहली रेस में विजेता फिसिशेला रेनॉ कार चला रहे थे जबकि शूमाकर फ़रारी. नारायण कार्तिकेयन के लिए फ़ॉर्मूला वन का पहला अनुभव अच्छा रहा क्योंकि ना केवल उन्होंने रेस पूरी की बल्कि जिन चार नए खिलाड़ियों ने अपनी शुरूआत की उनमें वे सबसे आगे रहे. नारायण ने 12वें स्थान से रेस शुरू की थी मगर पहले ही लैप में वे पिछड़कर 18वें स्थान पर चले गए. मगर बाद में वे 15वाँ स्थान पाने में सफल रहे. पहला भारतीय 27 वर्षीय नारायण कार्तिकेयन फ़ार्मूला वन में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय हैं. उन्होंने अपने बुलंद हौसले का परिचय पहली क्वालिफ़ायर रेस में ही दे दिया जब वे सात बार के चैंपियन माइकल शूमाकर को पीछे छोड़ते हुए नौवें स्थान पर आए. उन्हें जीत हासिल करने की कितनी जल्दी है इसका अंदाज़ा तब मिला जब उनके ऊपर 'पिट लेन' में निर्धारित सीमा से तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाने के लिए जुर्माना लगा. 86 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से अपनी जॉर्डन कार चला रहे कार्तिकेयन पर 6750 डॉलर का जुर्माना लगाया गया है क्योंकि पिट लेन में ड्राइवरों को गाड़ी धीरे चलाने के निर्देश हैं. भारत जैसे देश में जहाँ फ़ार्मूला वन रेसिंग ट्रैक भी नहीं है, कार्तिकेयन का इस मुकाम तक पहुँचना वाक़ई बड़ी उपलब्धि रहा है. पिछले चार वर्षों में कार्तिकेयन ने जॉर्डन, जगुआर और मिनार्दी की गाड़ियों पर हाथ आज़माया और अब आख़िरकार उन्हें जॉर्डन चलाने का मौक़ा मिल गया है. |
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