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चैंपियंस ट्रॉफ़ी को कर मुक्त किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने 2006 में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफ़ी के आयोजन को कर मुक्त करने की घोषणा की है जिससे अब इस ट्रॉफ़ी के आयोजन की तमाम बाधाएँ दूर हो गई हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने कहा था कि दो साल में एक बार होने वाली यह क्रिकेट प्रतियोगिता भारत में तभी कराई जा सकती है जब तमाम राजस्व को कर मुक्त किया जाए. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मदद का अनुरोध किया था ताकि चैंपियंस ट्रॉफ़ी का आयोजन देश में ही किया जा सके. अगर भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने प्रयास नहीं किए होते और उसे मई के अंत तक सरकार की सहमति नहीं मिलती तो यह प्रतियोगिता पाकिस्तान में भी कराई जा सकती थी. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्र और पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने इस मामले में प्रधानमंत्री से मुलाक़ात भी की थी. बढ़ावा भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "बोर्ड के अनुरोध पर ग़ौर करने के बाद यह फ़ैसला किया गया कि चैंपियंस ट्रॉफ़ी के आयोजन को कर मुक्त किया जाए." चैंपियंस ट्रॉफ़ी क्रिकेट की दुनिया में विश्व कप के बाद दूसरे नंबर पर आती है और यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के विकास कार्यक्रमों के लिए धन जुटाती है.
चैंपियंस ट्रॉफ़ी का आयोजन भारत में 2002 में होना था लेकिन भारत सरकार ने ट्रॉफ़ी के आयोजन को कर मुक्त करने से इनकार कर दिया था जिसके बाद यह श्रीलंका में कराई गई थी. इस बार भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने कहा था कि अगर सरकार इसे कर मुक्त नहीं करती तो इसका स्थान पाकिस्तान कर दिया जाएगा. भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने सभी भारत में होने वाले महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कर मुक्त करने का फ़ैसला किया है. उन्होंने कहा, "इससे न सिर्फ़ खेलों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि विभिन्न स्रोतों से आय भी बढ़ेगी, ख़ासतौर से पर्यटन के ज़रिए." भारत को खेलों की दृष्टि से एक बड़ा देश माना जाता है और वहाँ करोड़ों लोग क्रिकेट को बेहद पसंद करते हैं. |
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