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शुक्रवार, 20 मई, 2005 को 12:39 GMT तक के समाचार
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ग्रेग चैपल की नियुक्ति सही फ़ैसला: डूंगरपुर

राज सिंह डूंगरपुर
राज सिंह डूंगरपुर ने ग्रेग चैपल की प्रशंसा की
भारतीय क्रिकेट टीम के नए कोच के रूप में ग्रैग चैपल का चयन होते ही तमाम तरह के सवाल और बहस शुरू हो गए हैं. बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष राज सिंह डूँगरपुर ने फ़ैसले का स्वागत किया.

ग्रैग चैपल को भारतीय क्रिकेट टीम का नया कोच नियुक्त कर दिया गया है. इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

मैं समझता हूँ कि हम बिल्कुल सही नतीजे पर पहुँचे और जो तीन लोग इस चयन समिति में थे. मुझे लगता है कि उससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता था. सुनील गावसकर, रवि शास्त्री और वेंकटराघवन. इन तीनों के सोचने का जो तरीक़ा है, उससे मैं सहमत हूँ.

गावसकर साहब ने कहा था कि कोच वो होना चाहिए, जिसकी ओर टीम देखना पसंद करे. ऐसा नहीं होना चाहिए कि टीम उसकी तरफ़ देखकर यह सोचे कि इसे क्या आता है. जॉन राइट भले ही अच्छे खिलाड़ी न रहे हों पर उनमें कई और चीज़ें थीं जो किसी भी कोच के लिए आवश्यक है और वो टीम भारत की सर्वश्रेष्ठ टीम थी. हालाँकि जब वे गए, तब तक टीम टूट गई थी.

इस बिखरती हुई टीम को संभालने के बारे में अपनी राय रखते हुए मोहिंदर अमरनाथ ने कहा था कि एक भारतीय ही भारतीय टीम को समझ सकता है, क्या आप इससे सहमत हैं?

मैं मोहिंदर अमरनाथ के क्रिकेट से प्रभावित हूँ क्योंकि उनमें एक संघर्ष था पर भारतीय टीम का कोच भारतीय ही हो, इससे मैं सहमत नहीं हूँ. केवल ऑस्ट्रेलिया की टीम को छोड़ दें तो बाक़ी सभी देशों की टीमों के कोच दूसरी जगहों के हैं.

क्या भारतीय क्रिकेट में कप्तानी को लेकर भी बदलाव करने की ज़रूरत है?

सबसे पहले कप्तान ही परिवर्तन ला सकता है और कुछ हद तक गांगुली इसमें सफ़ल भी रहे हैं पर कप्तान अगर खेल के दौरान रन न बनाए तो लोगों को उससे बड़ी चोट आती है. जब कप्तान लड़खड़ाने लगता है तो टीम भी लड़खड़ाने लगती है.

टीम के पास अब दो लोग हैं. एक तरफ़ कप्तान हैं और दूसरी तरफ़ ग्रैग चैपल जैसे कोच, कैसे तालमेल बैठेगा.

इन दोनों की तुलना करना ग़लत है और मैं समझता हूँ कि हिंदुस्तान में केवल दो ही लोग हैं जिनसे इनकी तुलना की जा सकती है और वो हैं सुनील गावसकर और सचिन तेंदुलकर. मैं मानता हूँ कि वो फिर भी इन लोगों से कुछ आगे ही रहेंगे.

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