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चेल्सी को हराकर लिवरपूल फ़ाइनल में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंग्लैंड के फ़ुटबॉल क्लब लिवरपूल ने इंग्लैंड के ही मशहूर क्लब चेल्सी को 1-0 से हराकर यूरोपीय क्लब फ़ुटबॉल की प्रतिष्ठित प्रतियोगिता चैंपियंस लीग के फ़ाइनल में जगह बना ली है. लिवरपूल की टीम 20 साल बाद इस प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पहुँची है. सेमी फ़ाइनल के दूसरे लेग के महत्वपूर्ण मैच में अपने मैदान पर खेलते हुए लिवरपूल ने चौथे मिनट में ही चेल्सी के ख़िलाफ़ गोल दाग़ कर बढ़त हासिल कर ली. हालाँकि यह गोल भी विवादित रहा. विवाद इस पर रहा कि क्या गेंद ने गोल लाइन पार की थी या नहीं. जो भी हो रेफ़री ने लिवरपूल के लुईस गार्सिया के खाते में गोल का फ़ैसला दिया और यही विवादित गोल मैच में निर्णायक साबित हुआ. इस गोल के बाद से चेल्सी के गोल उतारने की हर कोशिश नाकाम रही और लिवरपूल ने अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया. रणनीति लिवरपूल के खिलाड़ियों ने रक्षात्मक तकनीक अपनाई और और चेल्सी को सफल होने नहीं दिया. इस सेमी फ़ाइनल का पहला लेग ड्रॉ ख़त्म हुआ था.
इसलिए दूसरे लेग के मैच का महत्व बढ़ गया था. मैच के बाद चेल्सी के बहुचर्चित कोच जोसे मुरिन्हो ने अपना ग़ुस्सा सहायक रेफ़री पर निकाला. उन्होंने कहा कि कोई भी पूरे विश्वास के साथ नहीं कह सकता था कि गेंद ने गोल लाइन पार की थी या नहीं. मुरिन्हो ने इस गोल के बाद लिवरपूल टीम की रणनीति पर भी सवाल उठाए और खिलाड़ियों को यह कह कर कोसा कि वे ज़रूरत से ज़्यादा रक्षात्मक हो गए थे. पिछले साल पुर्तगाल के क्लब पोर्तो के कोच के रूप में मुरिन्हो ने पोर्तो को चैंपियंस लीग का ख़िताब दिलवाया था और उसके बाद ही चेल्सी के साथ क़रार पर दस्तख़त किए थे. इस साल चेल्सी पहले ही इंग्लिश प्रीमियरशिप का ख़िताब जीत चुकी है. लेकिन चैंपियंस लीग का ख़िताब जीतने का उसका सपना चूर-चूर हो गया. अब लिवरपूल का मुक़ाबला एसी मिलान और पीएसवी आइंडहोवेन के बीच होने वाले दूसरे सेमी फ़ाइनल के विजेता से होगा. |
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