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मंगलवार, 28 दिसंबर, 2004 को 13:30 GMT तक के समाचार
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जलती रही जोत साल भर

खेल 2004
खेलों ने अपनी भूमिका सालों से निभाई है
खेल-खेल में एक और साल निकल गया. इस वर्ष दुनियाभर में कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताएँ हुईं, ओलंपिक खेल हुए, यूरो कप फ़ुटबॉल हुआ तो भारत ने पाकिस्तान का ऐतिहासिक दौरा भी किया.

कई विवाद भी हुए-कभी मैदान के बाहर, तो कभी मैदान के भीतर. खिलाड़ियों के साथ-साथ रेफ़री भी लोगों के ग़ुस्से का निशाना बने, तो नस्लवादी और रंगभेदी टिप्पणियाँ भी हुईं.

फ़ुटबॉल के मैदान पर क्रिस्टियानो की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया तो पाकिस्तान में भारतीय टीम को मिले स्वागत ने लोगों को भावुक भी बनाया.

खेल की दुनिया में हर तरह की घटनाएँ घटीं. कई खिलाड़ियों ने सफलता के नए प्रतिमान स्थापित किए तो कई खिलाड़ियों ने खेल के मैदान को अलविदा भी कहा.

कहते हैं खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए, लेकिन इस साल जनवरी में भारत और पाकिस्तान के बीच नए सिरे से शुरू हुई शांति प्रक्रिया के बाद क्रिकेट को आज़माया गया इसे आगे बढ़ाने के लिए.

जी हाँ, भारत का पाकिस्तान दौरा. कई तरह की आशंकाएँ थीं, तो खिलाड़ियों के मन में उलझने भी थीं- लेकिन सब कुछ शुभ-शुभ रहा.

दिल जीता

यानी बिना किसी अप्रिय घटना के सिरीज़ का ख़त्म होना और भारतीय खिलाड़ियों को मिला असीम स्नेह. सालों से अपने प्रतिद्वंद्वी देश के खिलाड़ियों का इंतज़ार करती आँखों से छलकते प्रेम ने सबका दिल जीत लिया.

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भारत का पाकिस्तान दौरा हर तरह से सफल रहा

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान जाते समय खिलाड़ियों से कहा था कि वे दिल जीतकर वापस आए.

भारतीय टीम ने वहाँ वनडे और टेस्ट- दोनों सिरीज़ में जीत हासिल की. लेकिन इस जीत से ज़्यादा खिलाड़ी प्रफुल्लित थे वहाँ दिल जीतकर वापस लौटने से.

क्रिकेट सिरीज़ के बाद दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का जो दौर शुरू हुआ, वो बेरोक-टोक अभी भी जारी है. एक बार फिर खेल ने पुल का काम किया- रिश्तों को जोड़ने में, संवेदनाओं को जगाने में.

ओलंपिक

फिर आई अगस्त में दुनिया के सबसे बड़े खेल मेले ओलंपिक की. अपनी मातृभूमि एथेंस लौट रहे ओलंपिक को लेकर दुनिया भर में उत्साह का माहौल था.

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फ़ुटबॉल में इराक़ की टीम जीती पुर्तगाल से

ओलंपिक का लक्ष्य भी है खेल भावना से ओत-प्रोत एक ऐसा त्यौहार जिसमें बंधुत्व की भावना को बढ़ावा मिले. ओलंपिक का सूत्र वाक्य है- और तेज़, और ऊँचा, और मज़बूत.

इस खेल मेले में कई नए रिकॉर्ड बने, कई टूटे तो कई खिलाड़ियों को निराशा भी हुई. हार ने उन्हें रुलाया भी तो किसी को जीत ने सातवें आसमान पर पहुँचा दिया.

सालों से पाबंदी झेल रहे इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान के दल ने जब एथेंस की धरती पर मार्च पास्ट किया तो सचमुच अदभुत नज़ारा था.

और तो और जब यूरोप में फ़ुटबॉल की शीर्ष टीम पुर्तगाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी कर रही इराक़ की टीम से पिटी तो यह वाकई खेल की जीत थी.

रंगभेद

एक समय रंगभेद से जूझ रहे पश्चिमी देशों ने समय के साथ इसके ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की और प्रभावी क़दम भी उठाए.

आज यूरोपीय फ़ुटबॉल या अन्य खेलों में जिस तरह नस्लवाद और रंगभेद के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है वह प्रशंसनीय है. फिर भी घटनाएँ होती हैं, पक्षपात पूर्ण व्यवहार होते हैं.

पर राहत की बात है कि अब ऐसी घटनाएँ इक्का-दुक्का ही रह गई है. आज इंग्लैंड की टीम में कई काले खिलाड़ी हैं और उन्हें उतना ही प्यार और सम्मान हासिल है, जितना गोरे खिलाड़ियों को.

पिछले दिनों स्पेन में इंग्लैंड और स्पेन के मैच के दौरान रंगभेदी नारे जब दर्शक दीर्घा से गूँजे तो पूरा यूरोप इसके ख़िलाफ़ खुल कर सामने आया. स्पेन को चेतावनी मिली और साथ में ज़ुर्माना भी लगा.

एक बार फिर खेल के मैदान से निकलने वाली गंदी राजनीति को करारा जवाब मिला.

वैसे रंगभेद को लेकर क्रिकेट बहुत ज़्यादा प्रभावित नहीं रहा है. लेकिन इस साल ज़िम्बाब्वे क्रिकेट में जो कुछ हुआ उसे बिल्कुल सही नहीं ठहराया जा सकता.

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रंगभेदी नारों के कारण स्पेन की किरकिरी हुई

खिलाड़ियों को बाहर निकाला गया- उसके सही और ग़लत पहलू हो सकते हैं. लेकिन इसका संदेश जिस स्तर पर गया वह ज़िम्बाब्वे की एकतरफ़ा राजनीति में प्रतिकूल प्रभाव ही डालेगा.

इंग्लैंड में कई स्तर पर चल रहे विरोध के बावजूद उनकी क्रिकेट टीम ज़िम्बाब्वे के दौरे पर गई. यहाँ भी खेल के माध्यम से संकेत देने की कोशिश की गई कि खेल में भाईचारे को निभाने की हरसंभव कोशिश की जाएगी.

सालों से खेलों पर राजनीति हुई है तो कई बार खेल माध्यम बने हैं राजनीति के. खेलों के कारण कई बार कठिनाइयाँ दूर हुई हैं, भाईचारा बढ़ा है. और तो और कई बार खेल विरोध करने के लिए मंच भी साबित हुआ है.

लेकिन खेल की अपनी महत्ता है, महिमा है, प्रभाव है और दायरा बहुत व्यापक है. इस साल भी खेल ने अपने दायरे को और व्यापक बनाया. कुछ नकारात्मक पहलू तो हर विषय के हैं. लेकिन सच और साहस जिसके मन में है- अंत में जीत उसी की है.

उम्मीद करें कि इस साल खेल की दुनिया में जो भी बुरा हुआ, वह नए साल में कम हो. खेल माध्यम बने रिश्तों में बनी दूरी को पाटने का, दिलों को जोड़ने का और भाईचारा बढ़ाने का.

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