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शनिवार, 25 दिसंबर, 2004 को 17:00 GMT तक के समाचार
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'अब भी भूखा है क्रिकेट का जादूगर'

 सचिन
अपना खेल जारी रखना चाहते हैं तेंदुलकर
वह बचपन से ही क्रिकेट के जादूगर थे और आज तो वे भारतीय क्रिकेट का आदर्श बन गए हैं. उनकी उम्र मात्र 31 वर्ष है लेकिन वह अब तक 71 अंतरराष्ट्रीय शतक लगा चुके हैं और उनके खाते में हैं 25 हज़ार से भी ज़्यादा रन.

भारतीय क्रिकेट का पर्याय बन चुके सचिन तेंदुलकर से आइए जानते हैं कैसा रहा उनके लिए यह साल. क्रिकेट की दुनिया के अलावा और भी कुछ बातें करते हैं मास्टर ब्लास्टर से.

सचिन आप इस साल को कैसे देखते हैं. आपने इस साल की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिडनी में 241 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए की थी. उसके बाद अप्रैल में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मुल्तान में नाबाद 194 रन और फिर साल के आख़िर में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट जीवन की सर्वश्रेष्ठ 258 रनों की नाबाद पारी. अगर मुल्तान में पारी नहीं घोषित होती तो शायद आपके खाते में तीन नाबाद दोहरे शतक होते....

देखिये, यह साल मेरे लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहा. मैं इस साल कुछ ख़ास करना चाहता था. लेकिन चोट ने मुझे परेशान किया.

मेरे लिए यह बहुत ही निराशाजनक था और इस चोट से उबरने में मुझे काफ़ी समय भी लगा. सिर्फ़ शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी यह काफ़ी परेशान करने वाला था.

निराशा

आप मुल्तान में पारी घोषित करने के फ़ैसले से काफ़ी निराश थे. आपने खुले तौर पर इस बारे में अपनी मनोभावना व्यक्त की और इससे विवाद भी खड़ा हुआ. क्या आपके और कप्तान के बीच बातचीत नहीं हुई थी? क्या टीम में ये बात नहीं उठी? हुआ क्या था?

दरअसल मैच के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में किसी ने मुझसे यह सवाल पूछा कि क्या आपको निराशा हुई. अगर मैं ये कहता कि नहीं, मुझे निराशा नहीं हुई, तो मैं ग़लत होता.

 दरअसल मैच के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में किसी ने मुझसे यह सवाल पूछा कि क्या आपको निराशा हुई. अगर मैं ये कहता कि नहीं, मुझे निराशा नहीं हुई, तो मैं ग़लत होता.
सचिन तेंदुलकर

मेरा मानना है कि मुझे अपनी भावना व्यक्त करने की अनुमति होनी चाहिए. मैंने सिर्फ़ ये कहा कि मैं निराश था और चकित भी. और मामला यही ख़त्म हो गया.

मैं इसे आगे नहीं खींचना चाहता. मैंने हमेशा टीम हित को ज़्यादा महत्व दिया है. मैं आगे भी ऐसा ही करता रहूँगा. अगर टीम के हित में पारी घोषित करने का फ़ैसला होता है तो मुझे कोई परेशानी नहीं.

लेकिन क्या टीम ने इस मसले का हल निकाला?

यह कोई समस्या थी ही नहीं. मैंने राहुल द्रविड़ (उस मैच में कप्तान द्रविड़ ही थे) के साथ बातचीत की और फिर इसे हल कर लिया.

हमारे बीच पूरी समझदारी है और किसी तरह के मतभेद का तो सवाल ही नहीं उठता. इस मामले में सबसे अच्छी बात यही थी कि हमें उस तीसरे व्यक्ति की कोई चिंता नहीं थी, जो इस बारे में लिख रहा था.

'गंभीर चोट'

आपकी कुहनी की चोट कितनी गंभीर थी. क्या चोट इतनी गंभीर थी कि शायद आप दोबारा नहीं खेल सकते थे?

यह बहुत गंभीर थी. मैं बहुत चिंतित था. मेरे मन में कई विचार आ रहे थे. लेकिन ऐसी स्थिति से ख़ुद ही निपटना होता है.

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अपनी चोट को लेकर सचिन भी बहुत चिंतित थे

सुनील गावसकर के 34 शतकों की बराबरी करने के बाद आपने कहा था कि ऐसी कई चीज़े हैं तो लोग नहीं जानते हैं. क्या इनमें दर्द के बावजूद खेलना भी शामिल है? आपने कहा था कि आप अभी भी पूरी तरह फ़िट नहीं हैं.

देखिये, अभी भी पूरी तरह चोट गई नहीं है. इसका थोड़ा-बहुत असर अब भी है. डॉक्टरों का भी कहना है कि इसमें अभी समय लगेगा. समय की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है.

सुनील गावस्कर की तरह आपको भी साइट स्क्रीन से समस्या होती है. कितना असर पड़ता है आप पर इसका और आप चटगाँव टेस्ट में इससे कितना परेशान थे?

चटगाँव टेस्ट में गेंद फेंके जाने से पहले ही साइट स्क्रीन से मुझे काफ़ी परेशानी हो रही थी. साइट स्क्रीन के ऊपर वाले स्टैंड में बैठे व्यक्ति को यह समझाने में पाँच मिनट लग गए कि इससे क्या परेशानी हो रही है.

मेरा मानना है कि साइट स्क्रीन को अधिकारी उतना महत्व नहीं देते लेकिन यह गंभीर मसला है और आईसीसी को इस पर ध्यान देना चाहिए. हर मैदान पर एक निश्चित आकार की साइट स्क्रीन होनी चाहिए.

पचास शतक

सुनील गावसकर की इच्छा है कि आप टेस्ट क्रिकेट में 50 शतक लगाए. क्या सोचते हैं आप?

मैं क्या कह सकता हूँ. मैं सिर्फ़ खेलना जारी रखूँगा. और अगर ऐसा होता है तो यह शानदार उपलब्धि होगी.

 मैं क्या कह सकता हूँ. मैं सिर्फ़ खेलना जारी रखूँगा. और अगर ऐसा होता है तो यह शानदार उपलब्धि होगी. लेकिन अभी मुझे इसके लिए 16 और शतक चाहिए जो बहुत दूर है
पचास शतकों के बारे में सचिन

लेकिन अभी मुझे इसके लिए 16 और शतक चाहिए जो बहुत दूर हैं. इसके लिए मुझे लगातार खेलना जारी रखना होगा और उसी तरह खेलना होगा जैसा मैंने पहले खेला है.

सचिन, आप उस खिलाड़ी के रूप में जाने जाते थे जिससे विपक्षी टीम डरती थी. जिस तरह आप गेंदबाज़ों से पेश आते थे. क्या आप उस सचिन को मिस करते हैं?

नहीं, बिल्कुल नहीं. जब मैं खेलने जाता हूँ तो शुरू से ही एक खिलाड़ी डीप प्वाइंट पर और एक लाँग ऑन पर रहता है. जब सीमा रेखा पर खिलाड़ी खड़े हों तो ऐसी बल्लेबाज़ी की ज़रूरत क्या है.

जब क्रिकेट के जानकारों से लेकर आम आदमी तक यह कहता है कि आप अपना नेचुरल गेम खेलिए. आप अपने नेचुरल शॉट्स खेलिए. क्या आप उन लोगों की सुनते हैं या फिर अपने विवेक से फ़ैसला करते हैं. जैसा कि स्टीव वॉ ने कहा था- जो व्यक्ति 15 साल क्रिकेट खेल चुका है, उसे पता है कि क्या बुरा है.

यह महत्वपूर्ण है कि लोग ये समझें कि मैं कितने साल और कितने मैच खेल चुका हूँ. इसके अतिरिक्त मैं ये भी जानता हूँ कि क्या हो रहा है. लोग अपने घर में बैठे विशेषज्ञ की तरह बोलने लगते हैं.

लेकिन खेल के मैदान पर उतरना आसान नहीं होता. कुछ लोगों की बोलने की आदत होती है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनसे मैं बात करता हूँ. मेरा उनमें पूरा भरोसा है. मैं उनका सम्मान भी करता हूँ.

पाकिस्तान दौरा

आप पाकिस्तान दौरे के बारे में बताइए. इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों पर भी असर पड़ा. सुना है आपने भी वहाँ जमकर ख़रीददारी की. मुल्तान में एक चैरिटी होम भी गए और वाघा सीमा पर भी गए.

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मुशर्रफ़ से मुलाक़ात सचिन के लिए यादगार रही

पाकिस्तान का दौरा बहुत अच्छा अनुभव था. मैंने ज़्यादा ख़रीददारी नहीं की. मैं सिर्फ़ अपनी पत्नी, अपनी बहन और परिवार के लोगों के लिए कपड़े लेकर आया. मैं ज़्यादा ख़रीददारी नहीं कर पाता.

मैं सिर्फ़ वहाँ घूमना चाहता था. वाघा सीमा पर भी जाना अपने आप में अनोखा अनुभव था. वहाँ सैनिक क्या करते हैं- यह देखने-सुनने का भी अवसर मिला. हम भारत के इतने क़रीब थे.

मैं भारतीय ज़मीन पर अपने पैर रखना चाहता हूँ. मुझे ऐसा करने का मौक़ा भी मिला. एक सेकेंड के लिए मैंने अपना एक पैर भारत में तो दूसरा पाकिस्तान में रखा. दोनों तरफ़ के सैनिकों ने मुझे ऐसा करने भी किया. यह मेरे लिए बहुत बड़ा क्षण था.

जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ से मुलाक़ात कैसी रही. उन्हें भी क्रिकेट पसंद है.

मैं इतना ज़रूर कहूँगा कि वह अच्छे इंसान है और तेज़तर्रार भी हैं. हमने पाकिस्तान दौरे का खूब आनंद उठाया. मुशर्रफ़ साहब ने हमलोगों का मनोरंजन भी किया और कुछ चुटकुले भी सुनाए. उन्हें क्रिकेट की भी अच्छी जानकारी है.

आपने कहा था कि विश्व कप जीतना आपकी इच्छा है. आप भारत की ओर से चार विश्व कप में खेल चुके हैं- 1992, 1996, 1999 और 2003 में. इन चारों प्रतियोगिताओं में कब आपको लगा था कि टीम ख़िताब के काफ़ी क़रीब थी. 2007 विश्व कप के बारे में क्या कहेंगे.

देखिये, मेरा मानना है कि 1996 और 2003 दोनों में विश्व कप जीतने का मौक़ा था.

जहाँ तक 2007 की बात है अभी उसके बारे में कहना जल्दबाज़ी होगी. हमें सही समय पर प्रदर्शन सुधारना होगा जैसा हमने दक्षिण अफ़्रीका में किया था.

तगड़ी टीम

आप विपक्षी टीम में से किसे सबसे तगड़ी टीम मानते हैं- पाकिस्तान या ऑस्ट्रेलिया को. आप किसके ख़िलाफ़ खेलना सबसे ज़्यादा पसंद करते हैं. क्या पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेलना आपको ज़्यादा शक्ति प्रदान करता है?

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सचिन तेंदुलकर ऑस्ट्रेलियाई टीम के प्रशंसक हैं

ऑस्ट्रेलिया दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम है. जब हम पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेलते हैं तो दबाव तो रहता ही है. जहाँ तक मेरा सवाल है, मैं भारत के लिए खेल कर काफ़ी ख़ुश हूँ. विरोध में चाहे बांग्लादेश की टीम हो या फिर कीनिया की या फिर वेस्टइंडीज़ की.

दूसरे खेलों में आपको क्या पसंद है और कौन से खिलाड़ी आपके प्रिय है.

टेनिस और फ़ॉर्मूला वन रेस मुझे पसंद है. अभी मेरे पसंदीदा खिलाड़ी हैं माइकल शूमाकर और रोज़र फ़ेडरर.

आप किससे मिलना पसंद करेंगे और क्यों?

मैं मोहम्मद अली से ज़रूर मिलना चाहूँगा. इसमें कोई संदेह नहीं कि वे सर्वकालिक महान खिलाड़ी हैं. ऐसे व्यक्ति से मैं ज़रूर मिलना चाहूँगा जिसने जीवन में इतनी सारी रुकावटों से पार पाया है. उनके साथ कुछ क्षण भी बिताना बहुत बड़ी बात होगी.

अमिताभ के प्रशंसक

आपको फ़िल्म देखना पसंद है. आपके पसंदीदा हीरो-हीरोईन कौन हैं. क्या अमिताभ और ऐश्वर्या आपको पसंद हैं? क्या आप कभी ऐश्वर्या से मिले हैं क्योंकि आप दोनों एक ही बिल्डिंग में रहते हैं?

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बचपन से ही अमिताभ के प्रशंसक हैं सचिन

अमिताभ बच्चन हमेशा से मेरे प्रिय हीरो रहे हैं. बचपन से ही. वह नंबर वन अभिनेता हैं. जहाँ तक ऐश्वर्या की बात है, वह मेरी पड़ोसी हैं, इसलिए मैं उनसे मिला हूँ.

पिछले साल ऑस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस के दौरान मार्टिना नवरातिलोवा ने मुझसे कहा था कि उन्हें आपकी सिडनी टेस्ट की बल्लेबाज़ी बहुत अच्छी लगी थी. नारंगी रंग की ऑस्ट्रेलियाई ओपन की कैप उन्होंने आपको साइन करके दी भी थी. आपके लिए कैसा मौक़ा था वह?

मेरे लिए वह कैप अभी क़ीमती है. इतनी बेहतरीन खिलाड़ी से कैप हासिल करना अपने आप में बहुत बड़ी बात थी.

इससे यह भी साबित होता है कि खिलाड़ी दूसरे खेलों के बारे में भी उतनी ही जानकारी रखते हैं. यह सोचना ज़रा मुश्किल था कि एक अमरीकी खिलाड़ी क्रिकेट के बारे में इतना जानती है. लेकिन मार्टिना जानती हैं और यह मेरे लिए सुखद अनुभूति थी.

हाल ही में शाहरुख़ ख़ान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अपने बच्चों को स्कूल छोड़ना बच्चों के लिए अच्छा संकेत होता है. क्या आप भी ऐसा करते हैं?

जब भी मैं मुंबई में होता हूँ. मैं उन्हें छोड़ने जाता हूँ और लेने भी जाता हूँ. जब हम स्कूल से घर लौट रहे होते हैं, तो वह मौक़ा मज़ेदार होता है.

प्रभाव

सचिन, एक व्यक्ति का नाम बताइए, जिसका आपके जीवन पर गहरा प्रभाव है.

वो एक व्यक्ति मेरे भाई अजित हैं. उन्होंने मेरे लिए मेरे क्रिकेट के लिए सब कुछ किया है.

पैसा आपके जीवन में क्या मायने रखता है?

पैसा एक हद तक महत्वपूर्ण है. पैसा आपके, आपके परिवार और आपके दोस्तों का जीवन आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण है.

सचिन आप चैरिटी से भी जुड़े हैं. जिनमें अपनालय भी शामिल है. आप कभी ऐसे बच्चों से मिलने का अवसर नहीं चूकते, जो ज़रूरतमंद हैं. आपने मुल्तान में भी एक अनाथालय का दौरा किया था. हाल ही में नागपुर में आप एक विकलांग बच्चे को देखकर काफ़ी भावुक हो गए थे. लेकिन बहुत लोग आपके इस रूप को नहीं जानते.

मैं यह काम इसलिए नहीं करता हूँ कि लोग मेरी प्रशंसा करें. मैं यह इसलिए करता हूँ ताकि मैं यह महसूस कर सकूँ कि समाज में मैं भी अपना कुछ योगदान कर पा रहा हूँ.

 मैं यह काम इसलिए नहीं करता हूँ कि लोग मेरी प्रशंसा करें. मैं यह इसलिए करता हूँ ताकि मैं यह महसूस कर सकूँ कि समाज में मैं भी अपना कुछ योगदान कर पा रहा हूँ. यह महत्वपूर्ण है कि विकलांग बच्चों को भी समान अवसर मिले
सचिन तेंदुलकर

यह महत्वपूर्ण है कि विकलांग बच्चों को भी समान अवसर मिले. अगर मैं अपने बच्चों की अच्छी देखभाल कर सकता हूँ तो मैं कुछ दूसरे बच्चों की सहायता भी कर सकता हूँ.

क्रिकेट खेलने के कारण आपकी पढ़ाई पर असर पड़ा. क्या आपको इसका खेद है. क्या आपको लगता है कि अच्छी शिक्षा-दीक्षा के कारण आप बेहतर इंसान होते और चीज़ों को और बेहतर तरीक़े से कर पाते?

मैं नहीं मानता कि शिक्षा का मेरे खेल पर कोई असर पड़ता. लेकिन शिक्षा के कारण आपको बेहतर इंसान बनने में मदद मिलती है. शिक्षा आपको बुरा आदमी नहीं बनाती.

मेरे मामले में ऐसा जान-बूझकर नहीं हुआ. स्थितियाँ ऐसी बनीं कि एसएससी परीक्षा के बाद मैं क्रिकेट खेलने लगा. जिस तरह का क्रिकेट हम खेलते हैं, हमें अभ्यास के लिए जितना समय चाहिए, उस स्थिति में कॉलेज के लिए समय निकालना मुश्किल था.

सचिन तेंदुलकर यहाँ से कहाँ जाते दिख रहे हैं आपको.

कहीं नहीं. मैं सिर्फ़ क्रिकेट जारी रखना चाहता हूँ. मैं हर क्षण का आनंद ले रहा हूँ. अभी तक मेरी यात्रा काफ़ी अच्छी रही है. मैं सिर्फ़ इसका मज़ा लेना चाहता हूँ और अपनी ओर से अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूँ.

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