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मास्टर ब्लास्टर 31 साल के हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अब 31 साल के हो गए है. अपनी आयु का लगभग आधा समय क्रिकेट को देने वाले सचिन को ढेरों बधाइयाँ मिलीं. अपने जन्मदिन की पूर्वसंध्या पर तेंदुलकर ने कहा कि उम्र के कारण उनका खेल प्रभावित नहीं हुआ है. 1989 में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले सचिन तेंदुलकर ने पिछले 15 सालों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में न सिर्फ़ अपने को स्थापित किया है बल्कि अपनी धाक भी जमाई है. सचिन ने अभी तक 114 टेस्ट और 333 एक दिवसीय मैच खेले हैं. टेस्ट क्रिकेट में सचिन ने 57.39 की औसत से 9470 रन बनाए हैं जिनमें 33 शतक भी शामिल हैं. 333 एक दिवसीय मैचों में सचिन के शतकों की संख्या है 37 और 44.82 की औसत से रन हैं 13134. इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और ख़ासकर भारतीय क्रिकेट में कितनी अहमियत रखते हैं. भूमिका आज जबकि भारतीय क्रिकेट उठान पर है और टीम सिर्फ़ एक स्टार खिलाड़ी की मोहताज नहीं रह गई है क्रिकेट के जानकार इसमें भी सचिन तेंदुलकर की अहम भूमिका मानते हैं.
सचिन के साथ आज भारतीय टीम में वीरेंदर सहवाग, वीवीएस लक्ष्मण, सौरभ गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे धुरंधर बल्लेबाज़ भी हैं. सचिन के खेल में इसका भी फ़ायदा हुआ है और अब अकेले भारतीय टीम का दबाव उनके कंधे पर नहीं है. यानी सचिन अगर न भी चलें तो टीम चल जाती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सचिन की अहमियत कम हुई है. दरअसल सचिन की मौजूदगी ही टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला देती है और विपक्षी टीम का सिरदर्द बढ़ा देती है. इस बात का अंदाज़ा हाल ही के पाकिस्तान दौरे पर हुआ जब वीरेंदर सहवाग ने भारत की ओर से पहला तिहरा शतक जमाया. शतक लगाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में सहवाग ने साफ़ शब्दों में कहा कि सचिन की पिच पर मौजूदगी की उनके तिहरा शतक बनाने में अहम भूमिका थी. हालाँकि इन वर्षों में सचिन पर ये भी आरोप लगते रहे हैं कि वे टीम के लिए कम ही मौक़े पर विजय दिलाने वाले खिलाड़ी की भूमिका निभा पाते हैं. लेकिन आँकड़ों पर भरोसा करने वाले लोग भारतीय क्रिकेट में इस खिलाड़ी की भूमिका को शायद ही नज़रअंदाज़ कर पाए. टीम में उनके साथी लेग स्पिनर अनिल कुंबले कहते हैं, "मैं नहीं जानता की उनकी बल्लेबाज़ी में कोई बदलाव आया है लेकिन इतना तो मैं ज़रूर कह सकता हूँ कि वे अब क्रिकेट को अच्छी तरह समझते हैं और उनकी बल्लेबाज़ी और मज़बूत हुई है." कुंबले ने कहा कि नए और युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण सचिन पर से दबाव भी कम हुआ है. प्रतिक्रिया सचिन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत करने वाले पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वक़ार युनूस अब संन्यास ले चुके हैं. वक़ार का कहना है कि तेंदुलकर अब क्रिकेट में माहिर हो चुके हैं और पहले से ज़्यादा संयम से खेलते हैं. उन्होंने कहा, "समय के साथ सचिन ने जान लिया है कि टेस्ट क्रिकेट है क्या. वे जान गए हैं कि क्रीज़ पर डटे रहने की आवश्यकता है." वक़ार का मानना है कि अगर आप अपना खेल नहीं बदलते तो गेंदबाज़ आप पर हावी हो सकते हैं और इसलिए सचिन ने भी कुछ बदलाव किया है और उनका विकेट लेना गेंदबाज़ों के लिए ज़्यादा मुश्किल साबित हो रहा है. पूर्व भारतीय कप्तान अजित वाडेकर का कहना है कि सचिन की पिच पर मौजूदगी युवा बल्लेबाज़ों के लिए सबक का काम करती है. |
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