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शुक्रवार, 15 अप्रैल, 2005 को 20:18 GMT तक के समाचार
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शाहिद अफ़रीदी से बातचीत
शाहिद आफ़रीदी और सलमान बट
आफ़रीदी का बल्ला ख़ूब जमकर चला
कानपुर एक दिवसीय मैच में आतिशी पारी खेलने वाले पाकिस्तानी बल्लेबाज़ शाहिद अफ़रीदी से मलय नीरव ने ख़ास बातचीत की.

सवाल - भारत में खेलना कैसा लग रहा है.

जवाब - क्रिकेट का माहौल यहाँ बहुत अच्छा है, जब इतनी भीड़ हो और दबाव हो तो उसमें खेलने में बहुत मज़ा आता है और ख़ासतौर से अगर यह भारत के ख़िलाफ़ होती है तो बहुत यादगार पारी होती है.

सवाल - जिस विकेट पर सचिन तेंदुलकर, वीरन्दर सहवाग, महेंद्र धोनी सब स्ट्रगल कर रहे थे, उस विकेट पर आप गए तो बॉल की बखिया उधेड़कर रख दी. तो क्या विकेट में कुछ नहीं था.

जवाब - नहीं, ऐसी बात नहीं थी, उनका दिन नहीं था. सचिन और सहवाग बहुत अच्छे बल्लेबाज़ हैं, वही गेंद, वही बैट सबकुछ वही, बस उनका आज दिन नहीं था और अल्लाह ने मेरी क़िस्मत में यह पारी लिखी थी और बस कुछ नहीं.

सवाल - एक सलामी बल्लेबाज़ के रूप में टीम में जगह बना ली है तो क्या आपको लगता है कि टीम में सलामी बल्लेबाज़ के रूप में आगे भी एक दिवसीय मैच खेलते रहेंगे.

जवाब - खिलाएंगे तो खेलूंगा, मैं टीम के ऊपर बोझ नहीं बना चाहता. गेंदबाज़ी, बैटिंग या फील्डिंग कुछ भी करूँ. बस इसी तरह यह टीम जीतती रहे, इसी में मेरी ख़ुशी है.

सवाल - एक स्पिनर के तौर पर आपको टीम ने इस्तेमाल किया है तो क्या आप अपने प्रदर्शन से ख़ुश हैं.

जवाब - पिछले तीन चार सीरीज़ में मेरा नंबर नीचा हो गया था जिससे मैं ख़ुश भी था और बॉलिंग पर ध्यान दिया. गेंदबाज़ी अच्छी हो रही थी. बॉलिंग करने के बाद इतना समय नहीं होता, तो पैड करना थोड़ा मुश्किल काम है. लेकिन टीम को ज़रूरत है, इसलिए कर रहा हूँ.

सवाल - अगर मैं यह कहूँ कि क्रिकेट में वापसी कैसे होती है तो यह कहना ग़लत नहीं होगा कि उसकी मिसाल आपने क़ायम की. आपको ख़ुद कैसा लगता है जब आप अपनी पिछली पारी को देखते हैं और अब अच्छा खेल रहे हैं.

जवाब - पहले भी अच्छा ही खेलते थे. कुछ-एक मैच खिलाते थे फिर बदल देते थे. लेकिन यह था कि थोड़ा कप्तान की वजह से मुझे मिला और टीम को ज़रूरत थी मैं ओपन करूँ. वैसे तो मैं नीचे ही नंबर पर खेल रहा था लेकिन टीम को ज़रूरत थी, और उस पर खरा उतरा हूँ.

66कप्तान बोले
अहमदाबाद में अंतिम गेंद फेंके जाने से पहले वह सिर्फ़ अल्लाह से दुआ कर रहे थे.
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