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अल्लाह से दुआ कर रहे थे इंज़माम

इंज़माम
इंज़माम का कहना है कि आगामी दोनों मैच अहम है
अहमदाबाद की जीत के बाद पाकिस्तान के कप्तान इंज़माम उल हक़ की प्रतिक्रिया.

सवाल- क्या आप इस पारी को अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ पारी मानते हैं?

इंज़माम- नहीं, इसे मैंने अपनी बेस्ट इनिंग्स तो नहीं कह सकता था. जो टॉप ऑर्डर में बैटिंग कर रहे थे जैसे आफरीदी, बट्ट, शोएब मलिक, रज्जाक... मेरे ख्याल में इनका काफी योगदान रहा.

आखिरी ओवरों में हम 6-6.5 की औसत लेकर चले तो मेरे ख्याल में ये पूरे टीम का मिला-जुला प्रयास था कि हमने 316 रनों का पीछा किया और कामयाब हुए.

सवाल- उस वक़्त आप क्या सोच रहे थे जब सचिन को आख़िरी गेंद डालनी थी और आपको जीत के लिए एक रन बनाना था?

इंज़माम- वाकई मैं उस वक़्त कुछ नहीं सोच रहा था, सिर्फ़ अल्लाह से दुआ की थी कि ‘प्लीज़ हेल्प मी’ (मेरी मदद करें).

सवाल- आखिरी गेंद को खेलने से पहले आपने क्या रणनीति तैयार की. आपको कुछ वक़्त मिला क्योंकि सचिन गेंद डालने से पहले काफ़ी देर तक अपने साथियों की सलाह लेते रहे.

इंज़माम- अंतिम गेंद पर बस यही कोशिश थी कि कोई गैप मिल जाए, कहीं से गेंद निकल जाए कि एक रन हो जाए, बस मेरे ज़हन में कुछ नहीं था.

सवाल- आप अच्छा खेल रहे थे लेकिन आपको दो अच्छे बल्लेबाज़ जो आपके साथ खेलने आए, रन आउट हो गए. तो क्या आपका ध्यान कुछ विचलित होने लगा था, कुछ घबड़ाहट थी?

इंज़माम- नहीं, एक दिवसीय मैचों में तेज़ रन लेने होते हैं, क्षेत्र रक्षकों पर दबाव डालना होता है. कभी आप कामयाब हो जाते हैं, कभी नहीं होते हैं.

कभी फील्डर अच्छी फील्डिंग कर देता है जैसे अकमल आउट हुआ-वो डायरेक्ट थ्रो थी. यूनिस विकेटों के बीच तेज़ भाग लेते हैं लेकिन कभी-कभी जब आप जोख़िम उठाते हैं, तब आउट भी होना पड़ता है.

सवाल- मैच में कभी आपको ऐसा लगा जैसे यह मैच आपके हाथों से निकल रहा हो?

इंज़माम-शोएब के आउट होने के बाद जब दो विकेट गिर गए तब मुझे थोड़ी देर के लिए लगा कि मुश्किल हो गई लेकिन सबसे अच्छा काम जो हमारे टॉप ऑर्डर ने किया था वो ये कि उन्होंने काफी तेज़ी से रन बनाकर हमारा काम आसान कर दिया. हमें 6 से 6.5 के औसत से रन बनाने थे और मेरे ज़हन में यही था कि अगर हम आख़िरी गेंद तक खेलते हैं तो 316 रनों का पीछा किया जा सकता है.

सवाल- जब आपने देखा कि अंतिम ओवर में गेंद सचिन को थमा दी गई है तो आपको कोई आश्चर्य हुआ? एक कप्तान के नज़रिए से आप सौरभ गाँगुली के इस फ़ैसले को सही मानते हैं.

इंज़माम- वो सौरभ गाँगुली का एक अच्छा ‘मूव’ था. हमें दो रन चाहिए थे और उसने अपनी तरफ से बेहतरीन कोशिश की थी, अपने सबसे अनुभवी खिलाड़ी को गेंदबाज़ी के लिए लगाया था, क्योंकि एक ओवर में दो रन करना इतना ज़्यादा मुश्किल नहीं था.

उसने अपने एक अनुभवी खिलाड़ी के साथ चांस लिया था. और मेरे ख़्याल में वो काफी हद तक कामयाब भी रहा क्योंकि मैच आखिरी बॉल तक चला गया.

सवाल- अहमदाबाद में सचिन तेंदुलकर के फार्म को देखकर क्या आप चिंतित हैं. सहवाग के अलावा तेंदुलकर भी अब आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं ?

इंज़माम- ज़ाहिर है कि वो एक बड़े अच्छे खिलाड़ी हैं और जब वो स्कोर करेंगे तो दूसरी टीम को मुश्किल होगी. लेकिन ‘इंशा अल्लाह’, अगर मेरे लड़के इस तरह खेलते रहे तो सब ठीक रहेगा.

सवाल- अब दो मैचों में लगातार जीत हासिल करने के बाद और श्रृंखला में बराबरी के बाद, आप आने वाले दो मैचों के बारे में क्या सोचते हैं, क्या पाकिस्तान का पलड़ा भारी रहने की उम्मीद है?

इंज़माम-मैं इस बात पर विश्वास करता हूँ कि क्रिकेट के गेम में हर दिन, एक नया दिन होता है. अगर आपको बाकी दोनों मैच जीतने हैं तो कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, एक योजना तैयार करनी होगी, फिर मैच जीता जाएगा क्योंकि एक दिवसीय मैच के बारे में पहले से कुछ भी कहना मुश्किल है.

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