BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 15 अप्रैल, 2005 को 11:14 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
क्रिकेट, क्रिकेटर और कानपुर

बॉब वुल्मर
कानपुर में पैदा हुए हैं बॉब वुल्मर
गंगा के सबसे ज़्यादा प्रदूषित तट पर बसा गंदगी और चप्पल जूतों के लिए मशहूर इस शहर के इतिहास के पन्नों में समाए हैं कुछ ऐसे क्रिकेटरों के नाम जो आज भी ग्रीन पार्क के स्टेडियम में बैठे थे.

सबसे पहले तो पाकिस्तानी टीम के कोच बॉब वूल्मर जिनका जन्मस्थान है कानपुर.

57 वर्ष पहले जॉर्जीना नैकरॉबर्ट मेमोरियल अस्पताल के ‘लेबर रूम’ में बॉब वूल्मर का जन्म हुआ था.

बॉब के पिता चार्ली रॉयल एक्सचेंज इंश्योरेंस कंपनी में काम करते थे और कानपुर स्पोर्ट्स क्लब के सदस्य थे. जिस ‘लेबर रूम’ में बॉब वूल्मर पैदा हुए थे, वहाँ अब ऑपरेशन थियेटर बना दिया गया है और 14 अप्रैल को इस ऑपरेशन थियेटर को नया नाम दिया गया ‘बॉब वूल्मर ऑपरेशन थियेटर’ जिसका उद्घाटन स्वयं बॉब वूल्मर ने किया.

एक समारोह में वूल्मर को उनका जन्म प्रमाण पत्र भेंट किया गया. अतीत की यादों के उन गलियारों में पहुँचने पर भाव-विभोर पाकिस्तानी कोच ने कानपुर की मेहमाननवाज़ी का शुक्रिया अदा किया और अस्पताल में बच्चों और कर्मचारियों के साथ समय बिताया.

कप्तानों की ससुराल

कानपुर में ही मिली थी पूर्व कप्तान स्वर्गीय लाला अमरनाथ को अपनी जीवन संगिनी और कानपुर की ही हैं सुनील गावस्कर की पत्नी मार्शनील गावस्कर.

गावस्कर के बाद जिस कप्तान का दिल कानपुर में लुटा, वे हैं बिशन सिंह बेदी और जब शायद भारतीय कप्तानों को दुल्हा बनाने में मुश्किल होती दिखी कानपुर की समीना को तो पाकिस्तान के पूर्व कप्तान ज़हीर अब्बास को कानपुर का दामाद बनना पड़ा.

वृहस्पतिवार को अपने दामादजी की खिदमत में समीना ज़हीर अब्बास की माँ और भाई ने स्वरूप नगर स्थित अपने निवास पर एक शानदार दावत दी थी जिसमें भारत और पाकिस्तान के कई दिग्गज खिलाड़ी शामिल थे.

बिशन बेदी अपनी पत्नी और साले साहब के साथ ससुराली आव-भगत के एक और अंदाज़ का लुत्फ उठाने पहुँचे और उनके साथ ही आए सैय्यद किरमानी.

अफसोस था किरी को कि कानपुर में उनकी जीवन संगिनी की तलाश पूरी नहीं हो पायी और उन्होंने तो अपनी इस नाकामयाबी की सफाई में एक सिद्धांत प्रतिपादित कर डाला. ‘कानपुर की लड़की का हाथ थामने के लिए कप्तान होना ज़रूरी था, इसलिए मैं रह गया.’

सुनील गावस्कर
गावस्कर की ससुराल भी कानपुर में ही है

उधर विकेट के पीछे इंतज़ार करने में महारत हासिल करने वाले सैय्यद किरमानी के पाकिस्तानी दोस्त वसीम बारी ने कहा कि कानपुर के बंधन में बंधने की तमन्ना लिए अब भी उनकी तलाश जारी है... और ज़हीर की पत्नी ने जोर आवाज़ लगाई, ‘सुन लो पाकिस्तान टीम वालों कानपुर में दिल दिया तो ज़िंदगी सुधर जाएगी.’

'रहना तो यहीं है...'

कानपुर क्रिकेट संघ में भारत-पाकिस्तान मैच से पहले वैसे ही भूचाल आ गया था जब अध्यक्ष ज्योति वाजपेयी त्यागपत्र देकर दिल्ली में आज्ञातवास में चले गए.

लेकिन मैच के आयोजन और टिकटों तथा पासों के वितरण में पसीना बहाते संघ के अधिकारियों के हाथ-पॉव ठंठे पड़ गए, जब स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सारे अधिकार और पास अपने हाथों में ले लिए.

यहाँ तक कि स्टेडियम के जो बॉक्स उद्योगपतियों और कंपनियों को लाखों रुपए में बेचे गए थे, उन्हें खाली करा लिया गया और पैसे लौटाने के आदेश दिए गए.

एक प्रसिद्ध पान मसाला कंपनी के मालिक ने इन आदेशों के बाद बेहिचक कहा कि ‘रहना यही हैं, उनसे झगड़ा मोल लेंगे तो हमारा जीना मुश्किल हो जाएगा.’

मंत्रियों, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के मेले के आयोजन का काम स्थानीय प्रशासन को अपने हाथों में लेना ही था.

वैसे उत्तरप्रदेश क्रिकेट संघ के लिए करेले पर नीम का काम किया कानपुर सिटी के सीनियर एसपी साहब की चिट्ठी ने जिसमें संघ से कहा गया है कि वो तीन दिनों की पुलिस सुरक्षा के लिए 57 लाख 18 हज़ार रुपए शुल्क के रूप में अदा करें.

जवाब में क्रिकेट संघ ने पत्र लिखकर कहा है ‘हमने तो पुलिस से सुरक्षा नहीं माँगी थी फिर हम उन्हें 57 लाख क्यों दें.’

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>